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मंगलवार को देव शिल्पी भगवान विश्वकर्मा की जयंती बिलासपुर और आसपास के अंचल में धूमधाम से मनाई गई। इस मौके पर वर्क शॉप, कल कारखाना, यांत्रिक प्रतिष्ठान और उन सभी संस्थानों में भगवान की प्रतिमा स्थापित की गई , जिनका संबंध शिल्पकारी, तकनीक और यंत्रों से है। हिंदू मान्यताओं में भगवान विश्वकर्मा सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा के मानस पुत्र माने जाते हैं। भगवान विश्वकर्मा ने ही तीनो लोक में अद्भुत शिल्पो की रचना की है। स्वर्ग के रचयिता भी भगवान विश्वकर्मा ही माने जाते हैं। इसके अलावा इंद्रपुरी, यमपुरी भी इन्हीं के द्वारा निर्मित की गई। रामायण में वर्णित रावण की सोने की लंका का निर्माण भी भगवान विश्वकर्मा ने ही किया था। इसीलिए सभी शिल्पकार उन्हें अपना आराध्य मानते हैं। हिंदू मान्यताओं में सभी तरह के कार्य करने वालों के अपने-अपने आराध्य हैं। मजदूर से लेकर शिल्पकार इंजीनियर मैकेनिक सभी भगवान विश्वकर्मा को अपना आराध्य मानते हैं। इसीलिए इस मंगलवार को विश्वकर्मा जयंती पर ऐसे ही प्रतिष्ठानों में भगवान विश्वकर्मा की पूजा अर्चना की गई , जिनका संबंध शिल्प ,निर्माण, तकनीक से है।

बिलासपुर में सभी कल कारखानों, वर्कशॉप, प्रतिष्ठानों में देव शिल्पी की पूजा हुई लेकिन असली चमक रेलवे क्षेत्र में नजर आई । यहां लगभग सभी विभागों में भव्य पंडाल बनाकर भगवान विश्वकर्मा की पूजा की गई। कई स्थानों पर तीन दिवसीय आयोजन भी हुआ है । रेलवे के मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, सिग्नल, संयुक्त लॉबी, आई ओ डब्ल्यू, कंट्रोल रूम समेत लगभग सभी विभागों में हमेशा की तरह भगवान विश्वकर्मा की पूजा अर्चना की गई। यहां पूजा आरती के बाद प्रसाद का वितरण भी किया गया।

रेलवे क्षेत्र में विश्वकर्मा जयंती के मौके पर आकर्षक पंडाल और साज-सज्जा भी की गई है । बिजली की सजावट भी यहां मनोहरी बन पड़ी है। यहां अमूमन तीन दिवसीय आयोजन किया जाता है और दुर्गा और गणेश उत्सव की तरह विश्वकर्मा जयंती पर भी लोग सड़कों पर निकल आते हैं और पंडाल पंडाल परिक्रमा कर झांकियों के दर्शन करते हैं । रेलवे के अधिकांश विभागों में मंगलवार को अवकाश का नजारा रहा। तकनीकी कार्यों से विराम लेते हुए तकनीशियन ने अपने आराध्य की पूजा अर्चना की।
