
डेस्क

स्कूल कभी शिक्षा के मंदिर हुआ करते थे ,लेकिन आज तो ये दुकान बन चुके हैं, जिनका अंतिम और एकमात्र लक्ष्य सिर्फ मुनाफा कमाना रह गया है ।बड़ी-बड़ी अट्टालिकाये बनाकर फाइव और थ्री स्टार होटल जैसी सुविधाएं जुटाने का दावा कर ऐसे संस्थान सिर्फ अभिभावकों से उस तथाकथित सुविधा की बेजा कीमत वसूल रहे हैं। शिक्षा का लक्ष्य अब हाशिए पर जा चुका है । पूरा फोकस तामझाम और तामझाम के नाम पर मोटी फीस वसूली भर रह गई है । शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन की भी इनके सामने एक नहीं चलती। पिछले कुछ समय से बिलासपुर के निजी स्कूलों ने मनमाने ढंग से फीस में भारी बढ़ोतरी कर दी है। बच्चों को पढ़ाने में मां बाप कर्जदार बन रहे हैं । पूरे घर का खर्च एक तरफ और बच्चों की स्कूल फीस दूसरी तरफ। इस असंतुलन से हैरान-परेशान अभिभावक हर मंच पर अपनी फरियाद कर चुके हैं।

थक हार कर इन लोगों ने पालक संघ भी बना लिया है , लेकिन इतने भर से इनकी समस्या हल नहीं होने वाली। शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन ने भी कई बार ऐसे स्कूलों को अपनी हद में रहने की हिदायत दी है, लेकिन उन पर तो जैसे किसी आदेश का कोई असर ही नहीं हो रहा ।आरोप है कि पिछले कुछ दिनों से व्यापार विहार स्थित सेंट जेवियर्स स्कूल के संचालक, अभिभावकों को ब्लैकमेल कर रहे हैं। जिन अभिभावकों ने पूरे वर्ष भर की फीस नहीं पटाई है उनके बच्चों को मासिक परीक्षा के पेपर तक देखने नहीं दिए जा रहे। बार-बार ऐसे अभिभावकों को मैसेज भेज कर फीस जमा करने की चेतावनी दी जा रही है। इस तरह का मैसेज पाकर अभिभावक खुद को शर्मिंदा महसूस कर रहे हैं। लगातार स्कूल प्रबंधन द्वारा बच्चों और उनके अभिभावकों को फीस के नाम पर अपमानित किए जाने से खफा अभिभावक संघ के सदस्य शनिवार को स्कूल प्रबंधन से मिलने पहुंचे तो हमेशा की तरह स्कूल प्रबंधन की गुंडागर्दी का उन्हें शिकार होना पड़ा।
दरअसल सरकंडा सेंट जेवियर्स स्कूल के पेरेंट्स पवन ताम्रकार भी इन्हीं परेशान अभिभावकों में से एक है, जिनके द्वारा विरोध में वार्षिक और मासिक फीस जमा नहीं की गई है। इसी वजह से उनके बच्चे के एग्जाम के पेपर तक उन्हें नहीं देखने दिए जा रहे। स्कूल प्रबंधन द्वारा उनके साथ बुरा बर्ताव किए जाने के बाद वे व्यापार विहार सेंट जेवियर्स स्कूल प्रबंधन से इसकी शिकायत करने पहुंचे थे, लेकिन उन्हें गेट से धक्के मार कर निकाल दिया गया। सेंट जेवियर्स स्कूल प्रबंधन द्वारा पीटीएम कर बच्चों के पेपर पैरंट्स को दिखाए जाते हैं, लेकिन जिन बच्चों की फीस जमा नहीं हुई है उन्हें इससे वंचित रखा जा रहा है। इसका विरोध करने पर अभिभावकों के साथ गुंडागर्दी और मारपीट की गई। शनिवार को व्यापार विहार सेंट जेवियर्स स्कूल पहुंचे अभिभावकों को गेट के बाहर ही रोक दिया गया और उनसे बदसलूकी की गई । पैरेंट्स के अनुसार स्कूल का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी बात करने तक सामने नहीं आया और स्कूल के एक बददिमाग टीचर जितेंद्र सराफ को उन्हें धमकाने भेजा गया। अभिभावकों का आरोप है कि जब जितेन श्रॉफ प्रबंधन की ओर से उन्हें धमका रहे थे तो अभिभावक पवन ताम्रकार और अन्य अभिभावक मोबाइल पर इसे रिकॉर्ड करने लगे। जिससे जितेंद्र सराफ अपना आपा खो बैठे और उन्होंने उनके मोबाइल पर हाथ मारकर मोबाइल गिरा दी और अभिभावकों के साथ गाली-गलौज करते हुए धक्का-मुक्की करने लगे।
इससे खफा अभिभावक वहीं धरने पर बैठ गए । इसके बाद तो अभिभावकों को धमकाने स्कूल प्रबंधन द्वारा दर्जनभर बाउंसर बुला लिए गए, लेकिन इसके बाद भी अभिभावक सेंट जेवियर्स स्कूल के गेट के सामने ही धरने पर बैठे रहे, तो उन पर दबाव डालने सिविल लाइन पुलिस को भी स्कूल बुला लिया गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने भी सीसीटीवी फुटेज खंगाले तो पाया कि जितेंद्र श्रॉफ और अन्य कर्मचारियों ने अभिभावकों के साथ बदसलूकी की है। सिविल लाइन टी आई कलीम खान के सामने जब यहां दूध का दूध और पानी का पानी हो गया तो अपने बद दिमाग टीचर जितेंद्र सराफ की करतूत के लिए सेंट जेवियर्स स्कूल और इसके कर्ता-धर्ता जे एस पटनायक द्वारा अभिभावकों से माफी मांगी गई।
लेकिन यह विवाद यही थमने वाला नहीं है। स्कूल प्रबंधन अभी भी फीस बढ़ोतरी मामले में कदम पीछे लेने को तैयार नहीं है, तो वहीं अभिभावकों के साथ लगातार हो रही बदसलूकी और फीस वृद्धि वापस न लिए जाने के खिलाफ अभिभावक आगामी 20 अगस्त को एक बड़ी रैली करने की तैयारी में है। 20 अगस्त को गांधी चौक से लेकर नेहरू चौक तक अभिभावक रैली निकालेंगे और फिर नेहरू चौक पर धरना और भूख हड़ताल करने की रणनीति पर विचार किया जा रहा है। अफ़सोस इस बात की है कि जिन स्कूलों से बच्चों को नैतिकता का पाठ पढ़ाने की उम्मीद की जाती है उन्हीं स्कूलों के शिक्षक और प्रबंधक बच्चों के सामने कैसा आदर्श प्रस्तुत कर रहे हैं ? टीचर गुंडे बन चुके हैं , स्कूल चलाने वाले व्यापारी। ऐसे में इनसे अगर अभिभावक नैतिकता और मानवता की उम्मीद पाले बैठे हैं तो फिर लगता नहीं कि उनकी उम्मीद कभी पूरी होगी। इस मामले में जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग अपनी टांग अड़ा कर कई बार अपनी फजीहत पहले ही करा चुका है। प्राइवेट स्कूल चलाने वाला संगठन किसी माफिया से कम नहीं है , जिनके आगे तो शासन प्रशासन भी बौना है। अगर ऐसा नहीं होता तो फिर आप ही बताइए कि किसी स्कूल में बाउंसर की क्या भूमिका होती है ? क्यों सेंट जेवियर्स स्कूल में बाउंसर्स तैनात किए गए हैं ? ज़ाहिर है निजी स्कूल के संचालक किसी की परवाह नहीं कर रहे है। वही महंगे और बड़े स्कूलों में बच्चों को तालीम दिलाने का लालच रखने वाले अभिभावकों को भी ऐसे स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ाने के ख्वाब की कीमत इस तरह ज़लील होकर चुकानी पड़ रही है । इसके लिए उन्हें पग पग पर अपमानित होना पड़ रहा है। अपनी जीवन भर की जमा पूंजी बर्बाद करनी पड़ रही है , लेकिन जनाब शौक बड़ी चीज है ।बच्चे बड़े और महंगे स्कूलों में पढ़ेंगे तो पड़ोसियों और जान पहचान वालों में अच्छी रौब पड़ेगी । तो फिर इसके लिए यह सब तो झेलना ही होगा। खैर ताजा घटनाक्रम से एक बार फिर बोतल में बंद जिन्न बाहर आ चुका है। इस घटना ने आग में घी का काम किया है। फिर से अभिभावक और स्कूल प्रबंधन आमने-सामने हैं और यह लड़ाई आने वाले दिनों में बेहद दिलचस्प बनने वाली है।
