
उदय सिंह
मल्हार – बासंती चैत्र नवरात्र के प्रथम दिन गुरुवार को माँ डिडनेश्वरी देवी मंदिर में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। माता शैलपुत्री के रूप में देवी की पूजा-अर्चना की गई। अभिजीत मुहूर्त में वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ घटस्थापना संपन्न हुई, जिसके बाद प्रथम ज्योतिकलश प्रज्वलित किया गया और श्रद्धालुओं द्वारा मनोकामना दीप जलाए गए। इस वर्ष 3 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने विभिन्न मनोकामनाओं के साथ माता के दरबार में ज्योत जलवाई है। मंदिर परिसर में श्रीमद देवीभागवत कथा ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ वेदी पूजन के साथ किया गया, जिसे आचार्यों द्वारा विधि-विधान से संपन्न कराया गया।

प्रातःकाल देवी माँ का स्नान कर विशेष श्रृंगार किया गया। इसके पश्चात षोडशोपचार पूजन एवं भोग अर्पित कर दिव्य आरती की गई। साथ ही जंवारा बुआई एवं दुर्गासप्तशती का नित्य पाठ भी प्रारंभ हुआ, जो पूरे नौ दिनों तक निरंतर चलेगा। संध्या मंगल आरती में सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए, जिनमें महिलाओं और युवतियों की संख्या अधिक रही।
मनोकामना पूर्ण होने की है मान्यता

माँ डिडनेश्वरी मंदिर को लेकर भक्तों में गहरी आस्था है। मान्यता है कि नवरात्र के दौरान माता स्वयं साक्षात विराजमान रहती हैं। श्रद्धालु पूरी श्रद्धा और पवित्रता के साथ यहां आकर अपनी मनोकामनाएं व्यक्त करते हैं, जो पूर्ण होती हैं। नवरात्र के दोनों पर्वों में यहां बड़ी संख्या में भक्त पहुंचकर माता के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। भक्तों का यह भी मानना है कि तपोमुद्रा में विराजित माँ डिडनेश्वरी का स्वरूप प्रतिदिन परिवर्तित होता है, जो इस मंदिर की विशेष आस्था का केंद्र है।