बिलासपुर

दिलहरण का ऑपरेशन कराएगा जिला प्रशासन, जिला कलेक्टर ने दिए निर्देश, गंभीर गले के ट्यूमर से परेशान होकर लगाई थी गुहार….

रमेश राजपूत

बिलासपुर- समय की मार से पीड़ित की रुदन पुकार सुनकर आपके आंखों में भी आंसू आ जाएंगे। जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे दिलहरण का उपचार नहीं हुआ तो वह ज्यादा दिन तक जिंदा नहीं रह पाएगा। उपचार में आर्थिक स्थिति आड़े आ रही है। पांच साल से जिंदगी और मौत से लड़ कर थक चुके दिलहरण ने आखिरकार जिला कलेक्टर डॉ संजय अलंग से मदद की गुहार लगाई है। उन्होंने मीडिया के माध्यम जिला कलेक्टर से अपने उपचार के लिए मदद की अपील की है। उन्होंने कहा है कि मैं मरना नहीं जीना चाहता हूं। मैंने सुना है कि आप सबकी मदद करते हैं। मेरी भी मदद कीजिए। मैं भी जीना चाहता हूं। दरसअल दिलहरण निर्मलकर ग्राम महमंद का रहने वाला है। 2014 में उनको गले मे ट्यूमर की शिकायत थी। लेकिन आर्थिक रूप से असक्षमता के कारण वह ट्यूमर का इलाज नही करा सका। क्योंकि खेती किसानी और मजदूरी कर दिलहरण को उतने पैसे नही मिल पाते थे। जिससे वह अपने चार बच्चों और अपनी पत्नी के पालनपोषण के साथ अपना इलाज करा सके। फिर भी दिलहरण अपना पेट काट कर अपने गले की समस्या का आयुर्वेद इलाज करा रहा था। जैसे जैसे समय होता गया वैसे वैसे ही दिलहरण शारारिक रूप से असक्षम होने लगा। उनके इस मुश्किल दिनों में उनकी पत्नी ने काम मे हाथ बटाया फिर भी दिलहरण के लिए ईलाज में भारी भरकम लगने वाली राशि इकट्ठी नही हो सकी है। जिससे निराश होकर दिलहरण निर्मलकर ने जिला कलेक्टर डॉ संजय अलंग से मदद करने गुहार लगाई है। जिससे प्रभावित होकर कलेक्टर ने अपॉलो हॉस्पिटल में इलाज कराने दिलहरण को आस्वस्त किया है।

जमीन विवाद के वजह से भी नही हो सका इलाज

दिलहरण निर्मलकर के तीन भाई दो बहन है। सभी को पुष्तैनी जमीन से डेढ़ डेढ़ एकड़ भूमि मिले थे। लेकिन पारिवारिक विवादों के कारण दिलहरण निर्मलकर अपने हिस्से के ज़मीन भी नही बेच सका। जिस वजह से उनके गले मे हुए ट्यूमर का इलाज नही हो सका।

अपने पिता के इलाज के लिए बेटे ने छोड़ी पढ़ाई

दिलहरण निर्मलकर की बीमारी से प्रभावित होकर उनके बड़े बेटे दीपेंद्र निर्मलकर ने पढ़ाई छोड़ दी, ताकि वह रोजी मजदूरी कर अपने पिताजी के ईलाज के लिए पैसे इकट्ठा कर सके।

दिलहरण के इलाज में लगेंगे चार लाख

दिलहरण निर्मलकर के गले मे हुए 32 सेंटीमीटर लंबा 23 सेंटीमीटर चौड़ाई के ट्यूमर के ऑपरेशन के लिए शहर के अधिक्तर हॉस्पिटल ने हाथ खड़े कर दिए है। लेकिन अपॉलो हॉस्पिटल के डॉक्टर अमित वर्मा द्वारा खरीब 4 लाख खर्च करने के बाद इस भारी भरकम ट्यूमर को ठीक करने की बात कही गई है।

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