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महाप्रभु की घर वापसी, बाहुड़ा यात्रा कर जगन्नाथ लौटे श्री मंदिर

डेस्क

8 दिनों तक मौसी मां गुंडिचा देवी का आथित्य स्वीकार करने के बाद जगन्नाथ महाप्रभु अपनी बहन सुभद्रा और अग्रज बलभद्र के साथ वापस श्रीमंदिर लौट आए है। 4 अप्रैल को गुंडीचा रथ यात्रा कर जगन्नाथ महाप्रभु अपनी मौसी मां गुंडिचा के मंदिर पहुंचे थे। जहां विगत 8 दिनों से उन्हें विभिन्न भोग, मिष्ठान, फल आदि अर्पित कर उनका सत्कार किया गया ।

स्नान पूर्णिमा पर अधिक स्नान के कारण बीमार पड़ने के बाद कमजोर हो चुके महाप्रभु मौसी गुंडेचा के अतिथि सत्कार से पूरी तरह स्वस्थ हो गए तो फिर एक बार वापस श्री मंदिर की ओर भक्तों ने उनका रथ पहुंचाया। शुक्रवार को बहुडा यात्रा कर जगन्नाथ महाप्रभु वापस श्री मंदिर पहुंचे। दोपहर बाद यहां बहुरा यात्रा की शुरुआत हुई।

इससे पहले गुंडिचा मंदिर में सूर्य और नवग्रह पूजा के बाद हवन किया गया। महाप्रभु को खिचड़ी का विशेष भोग लगाया गया। रथ यात्रा के लिए एक बार फिर से रथ को फूल तोरण आदि से खूब सजाया गया। गाजे-बाजे और कीर्तन मंडली के साथ रथ यात्रा से पहले छेरा पहरा की रस्म अदा की गई। छेरा पहरा की रस्म उड़िया समाज के अध्यक्ष पी के सामंत राय ने पूरी की। उन्होंने प्रतीक स्वरूप सोने के झाड़ू से रास्ते को बुहारा और जल का छिड़काव किया। फिर तीनों देवी विग्रहो को रथ पर सवार कराया गया। एक बार फिर भगवान जगन्नाथ के रथ के रस्सी खींचने की भक्तों में होड़ लग गई । जिस मार्ग से होकर प्रभु मौसी मां के घर पहुंचे थे उसी मार्ग से उनकी वापसी हुई ।

रथ यात्रा समिति द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार किसी भी राजनीतिक व्यक्ति द्वारा छेरा पहरा की रस्म अदा करने से बचा गया। इसलिए शुक्रवार को समाज के वरिष्ठ पी के सामंत राय ने इस परंपरा का निर्वहन किया।

विगत कई वर्षों से हर रथयात्रा में शामिल होने वाले और छेरा पहरा की रस्म को पूरा करने वाले पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल बहुरडा यात्रा में भी शामिल होने मंदिर पहुंचे थे और उन्होंने भगवान जगन्नाथ महाप्रभु बलभद्र और देवी सुभद्रा की पूजा अर्चना कर प्रदेश की खुशहाली की कामना की। उन्होंने अपने पिछले अनुभवों का भी यहां जिक्र किया।

महाप्रभु का रथ श्री मंदिर की ओर रवाना हुआ तो फिर भक्तों का उत्साह आसमान पर नजर आया। पूरे उत्साह उमंग के साथ रथ का रस्सा खींचते हुए भक्तों ने इस यात्रा को पूरा कराया। रथ यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं की सेवा के लिए जगह-जगह स्टॉल लगाए गए थे जहां उन्हें जल, शरबत, फल, मिष्ठान आदि का वितरण किया गया। तोरवा थाना ,जगमाल चौक, गांधी चौक, तार बाहर, स्टेशन चौक होते हुए शाम को भगवान जगन्नाथ का रथ श्री मंदिर पहुंचा। यहां कई धार्मिक अनुष्ठान इस मौके पर संपन्न कराए गए।

मान्यता अनुसार बिना बताए 1 सप्ताह तक अपने भाई बहन के साथ मौसी मां के मंदिर जाने से रूठी लक्ष्मी देवी ने भगवान को मंदिर में प्रवेश करने से रोका। जिसके बाद महाप्रभु ने उन्हें कई प्रयत्न कर और स्वादिष्ट रसगुल्ला खिला कर मनाया। जिसके बाद उन्हें श्री मंदिर में प्रवेश का अवसर मिला। एक बार फिर से वैदिक मंत्रोच्चार के साथ जगन्नाथ महाप्रभु, बलभद्र और देवी सुभद्रा के विग्रहों को श्री मंदिर में प्रतिस्थापित किया गया। इस अवसर के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर में मौजूद रहे ।अब वर्षभर महाप्रभु श्री मंदिर से ही अपने भक्तों को दर्शन देंगे ।

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