
हर स्वस्थ व्यक्ति को रक्तदान शिविर में अवश्य आना चाहिए और नियमित रूप से रक्त दान करना चाहिए, क्योंकि आपके रक्तदान से किसी की सांसे चल सकती है

सत्याग्रह डेस्क
हर वर्ष 8 मई को वर्ल्ड थैलीसीमिया डे मनाया जाता है। आम आदमी थैलेसीमिया को लेकर खास जानकारी नहीं रखता। इसीलिए इस दिवस पर जहां थैलेसीमिया मेजर पेशेंट की जरूरतों पर चर्चा होती है वही आम आदमी को भी जागरूक किया जाता है कि वह थैलेसीमिया मेजर बच्चों के अभिभावक ना बने। इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखा जाना बेहद जरूरी है। विश्व थैलेसीमिया दिवस पर यह जानना जरूरी है कि आखिर थैलेसीमिया क्या मर्ज है।
थैलासीमिया एक अनुवांशिक रोग है, जो माता पिता की एक चूक की वजह से संतान को विरासत में मिलती है !
थैलासीमिया 2 तरह कि होती है
1. थैलासीमिया माइनर
2. थैलासीमिया मेजर
थैलासीमिया माइनर बीमारी नही केवल एक अवस्था है , इसमें ना किसी तरह की तकलीफ होती है ,ना ब्लड की कमी , ना किसी तरह की दवाइयां लेनी पड़ती हैं
इसमें इंसान सामान्य जीवन जीता है
उदाहरण के तौर पर सदी के महानायक अमिताभ बच्चन भी थैलासीमिया माइनर हैं और एक सामान्य जीवन जी रहे हैं !
थैलासीमिया मेजर.. ये एक भयानक रोग है , इसमें मरीज़ के शरीर मे खून नहीं बनता है , इन्हें जन्म से ही हर महीने बाहर से खून चढ़ाते हुये ज़िन्दा रखना पड़ता है , हर महीने हज़ारो रुपये की महंगी दवाइयो की आवश्यकता पड़ती है जो इनके शरीर में जमा होने वाले लौहत्तत्व आयरन को कंट्रोल करने में सहायता करती हैं , ये व्यक्ति अल्पायु होते हैं !

थैलासीमिया मेजर होने की वजह
वैसे तो थैलासीमिया माइनर कोई बीमारी नहीं होती , लेकिन अगर 2 थैलासीमिया माइनर लड़का लड़की विवाह के बाद संतान पैदा करते हैं तो 50% तक उनकी होने वाली संतान के थैलासीमिया मेजर होने की संभावना रहती है , 25% सम्भावना थैलासीमिया माइनर और 25% सामान्य संतान पैदा होने की संभावना होती है !
अकेले भारत देश मे हर महीने 10 हज़ार से ज़्यादा बच्चे थैलासीमिया मेजर बीमारी से ग्रस्त पैदा हो रहे हैं जो काफी खतरनाक है !
इसके लक्षण :–
बच्चे में जन्म से पीलिया , बुखार , कमजोरी की शिकायत होना
शुरुवात में ये बीमारी सामान्य पीलिया की तरह लगती है
जब ब्लड टेस्ट होते हैं तब इस बीमारी को पकड़ा जा सकता है , इसके लिए जन्म से ही बच्चे को किसी अनुभवी शिशु रोग विशेषज्ञ के पास ले जाना उचित है !

इस बीमारी से बचने का तरीका:-
इस बीमारी से बचने का केवल एक तरीका है इसकी जानकारी
यानी शादी से पहले या बच्चे की प्लानिंग के पहले अपना और अपने जीवनसाथी का थैलासीमिया माइनर टेस्ट HBA2 जो बिल्कुल आसान और बेहद ज़रूरी टेस्ट है , करा लेना चाहिए।
यदि शादी के पहले दोनों लड़का लड़की थैलासीमिया माइनर हैं तो शादी रोक देनी चाहिए !
यदि शादी हो चुकी है तो बच्चे की प्लानिंग के पहले स्त्री रोग विशेषज्ञ की इस विषय पर पता लगाया जा सकता है…. ये बीमारी यदि बच्चे में पाई जाती है तो उसका अबॉर्शन कानूनी है और करवाना ही उचित निर्णय भी !
पर इन सभी तकलीफों से गुजरने से बेहतर की शादी के पहले सभी अपना अपना थैलासीमिया माइनर टेस्ट करवाना और एक स्वस्थ परिवार की नींव रखना !
बिलासपुर में थैलेसीमिया के खिलाफ जज्बा एजुकेशन एंड वेलफेयर सोसायटी अघोषित लड़ाई लड़ रही है। बिलासपुर शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में मिलाकर करीब 200 से ज्यादा थैलेसीमिया मेजर बच्चे हैं, जिन्हें ही प्रति माह 200 से ढाई सौ यूनिट रक्त की आवश्यकता पड़ती है। इस ज़रूरत को जज्बा हर महीने रक्तदान शिविर आयोजित कर पूरा करती है ।इसी क्रम में आगामी 12 मई को भी संस्था द्वारा रक्तदान शिविर का आयोजन किया जा रहा है । रक्तदान के साथ यातायात सुरक्षा के प्रति जन जागरूकता लाने इस आयोजन के दौरान जज्बा की ओर से हेलमेट का वितरण भी किया जाएगा । जज्बा एजुकेशन एंड वेलफेयर सोसायटी के संजय मतलानी ने जानकारी देते हुए बताया कि 1 साल पहले उनकी संस्था ने 16 अत्यंत गरीब थैलेसीमिया मेजर बच्चों को गोद लिया था। जिन्हें सिर्फ निशुल्क रक्त ही प्रदान नहीं किया जा रहा, बल्कि उनकी दवाई से लेकर खाने पीने और इलाज तक के हर खर्च को संस्था उठा रही है। संजय मतलानी आम लोगों से अपील भी कर रहे हैं कि रक्त की पूर्ति केवल दानदाताओं के माध्यम से ही संभव है, इसलिए सभी भ्रम को मन से निकाल कर हर स्वस्थ व्यक्ति को रक्तदान शिविर में अवश्य आना चाहिए और नियमित रूप से रक्त दान करना चाहिए, क्योंकि आपके रक्तदान से किसी की सांसे चल सकती है।