छत्तीसगढ़मल्हार

पुलिस प्रशासन की उपेक्षा का शिकार मल्हार मेला, किसी भी दिन घट सकती है बड़ी घटना

चुनाव के इस मौसम में अपराधियों पर नकेल कसने के दावे के उलट, धार्मिक नगरी मल्हार में तो अपराधी बेखौफ होकर अपने मंसूबों को अंजाम दे रहे हैं

ठा.उदय सिंह

एक तरफ पुलिस प्रशासन चाक-चौबंद सुरक्षा के दावे करता है और आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर पुलिस किस कदर लापरवाह है इसका जीता जागता उदाहरण मल्हार मेला है। इन दिनों प्राचीन नगरी मल्हार में सदियों पुराना मेला चल रहा है। पातालेश्वर मंदिर परिसर में लगने वाले इस मेले की ख्याति दूर-दूर तक होने से सामान्य दिनों में ही 15 से 20 हजार लोग मेला देखने आते हैं तो वही खास दिनों में यानि बुधवार रविवार शुक्रवार को तो यह संख्या 50 हजार के पार चली जाती है। 15 दिवसीय मेले के दौरान यहां लाखों लोग दूर-दूर से पहुंचते हैं। यह मेला करीब 200 एकड़ क्षेत्रफल में फैला हुआ है। मेले में एक हजार के करीब तो दुकानें ही हैं। इसके अलावा दो टूरिंग टॉकीज, दो मीना बाजार ,मौत का कुआं, झूला , खाने पीने के होटल और बहुत कुछ इस मेले में होने से मेला का क्षेत्रफल फैला हुआ है। यहां पहुंचने वाले लोगों और दुकान लगाने वाले कारोबारियो की सुरक्षा के लिहाज से प्रशासन द्वारा मेले के दौरान 18 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। जिसकी निगरानी की जिम्मेदारी मस्तूरी और पचपेड़ी टी आई की है । मेले में महिला सुरक्षा के मद्देनजर 4 महिला आरक्षको की भी तैनाती है। लेकिन यह तैनाती पूरी तरह कागजों तक सीमित है । महिला पुलिसकर्मियों को तो आज तक यहां किसी ने देखा तक नहीं। जिन 18 पुलिसकर्मियों की तैनाती की बात की जाती है उनमें से दो या तीन पुलिस कर्मी ही मेले में आते हैं और उन्हें भी मेले की सुरक्षा से कोई सरोकार नहीं है।

उन्हें अक्सर किसी कोने में बैठ कर ड्यूटी की खानापूर्ति करते देखा जा सकता है। पुलिस की गैर जिम्मेदारी की ही वजह से ऐसा कोई दिन नहीं है जब यहां छिटपुट घटनाएं नहीं हो रही। मारपीट ,छेड़छाड़, गुंडागर्दी ,लूटपाट आम बात हो चुकी है । मेला देखने पहुंची महिलाओं के साथ अभद्रता रोज की बात हो चुकी है । कुछ शराबी और असामाजिक तत्व इसी ताक में रहते हैं । महिलाओं को देखते उनपर फिकरे कसना, उन्हें उन्हें बुरी नियत से छूना, जैसी घटनाएं लगातार घट रही है। मेले को पूरी तरह व्यवस्थापक के भरोसे छोड़ दिया गया है।

नगर पंचायत मल्हार द्वारा मेले की व्यवस्था की जा रही है । कभी किसी दुकानदार से कोई गुंडा भीड़ जाता है तो कभी किसी महिला के साथ कोई छेड़खानी हो जाती है। कभी किसी का पर्स या मोबाइल पार हो जाता है तो कभी दो दुकानदार ही आपस में किसी बात पर उलझ पड़ते हैं। इन सब से निपटना व्यवस्थापको के बस की बात नहीं है , लेकिन मौके पर पुलिस के मौजूद ना होने से उन्हें ही अतिरिक्त जिम्मेदारी संभालने पड़ रही है । जिन पुलिसकर्मियों की तैनाती मल्हार मेले में की गई है, उनके घर आसपास ही होने से ड्यूटी को छुट्टी मानकर वे घर चले जाते हैं । कुछ पुलिसकर्मियों को मेले में अपने परिवार के साथ घूमते भी देखा जा सकता है। यानि सुरक्षा नाम की कोई चीज यहाँ नहीं है ।खासकर पुलिस की ओर से तो बिल्कुल नहीं। मेले की सुरक्षा को लेकर अधिकारी कितने संवेदनशील है इसे इस बात से भी समझा जा सकता है कि

मेले को आरंभ हुए 10 दिन से अधिक का वक्त हो चुका और आज तक मस्तूरी या पचपेड़ी थाना प्रभारी मेले में झांकने तक नहीं आए।

उन्हें यह तक पता नहीं कि मेले में तैनात पुलिसकर्मी अपनी जिम्मेदारी निभा भी रहे हैं या नहीं। मेले में अपराधी, असामाजिक तत्व ,शराबी जेब कतरे और दबंगों की भरमार है ,लेकिन प्राचीन मेला होने की वजह से लोग श्रद्धा भक्ति लिए यहां खिंचे चले आते हैं और असामाजिक तत्वों को उनका शिकार उपलब्ध होता रहता है। पुलिस व्यवस्था ना होने से मेले में हर वक्त किसी घटना के घटने की आशंका बनी रहती है ।

इसका सबसे अच्छा उदाहरण महाशिवरात्रि को देखा गया। जब मंदिर के गर्भगृह तक एक युवक किसी युवती का पीछा करते हुए पहुंच गया और उसने युवती को प्रेम प्रस्ताव देते हुए , उसे डराने खुद को चाकू मारकर घायल कर दिया। रक्त रंजित युवक भक्तों के बीच बेखौफ घूमता रहा और आतंक से महिलाएं इधर उधर भागती रही। उस वक्त भी एक भी पुलिसकर्मी मौके पर नहीं पहुंचा। अगर मल्हार मेले में पुलिस सुरक्षा की यही व्यवस्था रही तो केवल इसी वजह से लोग मेला आने से पहले 10 बार सोचेंगे । भारतीय संस्कृति की पहचान मेले का अस्तित्व अगर पुलिस प्रशासन की नाकामी की वजह से खतरे में पड़ता है तो फिर इसकी जिम्मेदारी तय करनी होगी।। पुलिस के स्थानीय अधिकारियों से तो कोई उम्मीद नहीं है। अब बस आला अधिकारी मामले को संज्ञान में लें और मल्हार मेले की सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद करें , तभी बात बने।चुनाव के इस मौसम में अपराधियों पर नकेल कसने के दावे के उलट, धार्मिक नगरी मल्हार में तो अपराधी बेखौफ होकर अपने मंसूबों को अंजाम दे रहे हैं।

मेला उनके लिए चारागाह बन चुका है, जहां वे बेखटके आकर जो चाहे कर सकते हैं। दर्जनों की संख्या में पहुंचने वाले चोर उचक्के और असामाजिक तत्वों से निपटना अकेले व्यवस्थापको की क्षमता से बाहर की बात है, इसलिए कम से कम उन 18 पुलिसकर्मियों को तो मौके पर होना ही चाहिए ,जिनकी यहां ड्यूटी लगाई गई है। साथ ही उन्हें मुस्तैदी से अपनी जिम्मेदारियों का भी पालन करना होगा। जरूरी है कि पुलिस विभाग यहां रक्षा टीम के सदस्यों को भी भेजें ताकि महिलाएं खुद को असुरक्षित महसूस ना करें । यह मेला आगामी रविवार तक है ,इसलिए अगले तीन-चार दिनों के लिए सुरक्षा व्यवस्थाओं को सख्त करने की जरूरत है।

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