
रमेश राजपूत
बिलासपुर – प्रदेश में बिजली के स्मार्ट मीटरों को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। शुरुआती दौर में इसे बिजली व्यवस्था को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम बताया गया था, लेकिन अब कई स्थानों पर उपभोक्ताओं का विरोध तेज होता दिखाई दे रहा है। लोगों का आरोप है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली बिल पहले की तुलना में अधिक आ रहा है। इस मुद्दे को लेकर कई जगह प्रदर्शन भी हो चुके हैं। हाल ही में कबीरधाम जिले के पांडातराई में ग्रामीणों ने विरोध का अनोखा तरीका अपनाते हुए अपने घरों से स्मार्ट मीटर उखाड़कर बिजली विभाग के कार्यालय में फेंक दिए। इस घटना के बाद यह सवाल और गंभीर हो गया है कि आखिर क्या स्मार्ट मीटर वास्तव में अधिक बिजली खपत दर्ज कर रहे हैं या फिर यह केवल भ्रम और गलतफहमी है? इसी मुद्दे पर बिलासपुर बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता सुरेश कुमार जांगड़े से चर्चा की गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब तक ऐसा कोई तकनीकी प्रमाण सामने नहीं आया है जिससे यह साबित हो कि स्मार्ट मीटर अधिक बिलिंग कर रहे हैं। उनके अनुसार स्मार्ट मीटर पुराने इलेक्ट्रॉनिक मीटर का उन्नत संस्करण है, जिसकी निगरानी विभाग सीधे करता है।
एस के जांगड़े, अधीक्षण अभियंता, सीएसपीडीसीएल
साथ ही उपभोक्ता ‘मोर बिजली’ ऐप के माध्यम से प्रतिदिन अपनी बिजली खपत और मीटर की रीडिंग स्वयं भी देख सकते हैं। उन्होंने बताया कि यदि किसी उपभोक्ता को मीटर की कार्यप्रणाली पर संदेह है तो वह विभागीय प्रयोगशाला में उसकी जांच करा सकता है। आवश्यकता पड़ने पर कुछ उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट मीटर के साथ पुराने इलेक्ट्रॉनिक मीटर लगाकर दोनों की रीडिंग की तुलना भी की जा सकती है। उनका दावा है कि बिलासपुर जिले के कुल 3 लाख 75 हजार बिजली उपभोक्ताओं में से लगभग 2 लाख 42 हजार स्थलों में स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं और अब तक किसी तकनीकी खराबी की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि विभाग के दावों के बावजूद आम उपभोक्ताओं की शंकाएं खत्म नहीं हुई हैं। यही कारण है कि विरोध प्रदर्शन लगातार सामने आ रहे हैं। ऐसे में केवल विभागीय स्पष्टीकरण पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि पारदर्शी जांच, स्वतंत्र परीक्षण, शिकायतों का त्वरित निराकरण और उपभोक्ताओं को तकनीकी जानकारी देकर विश्वास बहाल करना भी जरूरी होगा। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या स्मार्ट मीटर वास्तव में सही रीडिंग दे रहे हैं, या उपभोक्ताओं की आशंकाओं के पीछे कोई वास्तविक समस्या छिपी है? इसका जवाब केवल निष्पक्ष जांच और पारदर्शी व्यवस्था ही दे सकती है। फिलहाल बिजली विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती उपभोक्ताओं का भरोसा जीतने और स्मार्ट मीटर को लेकर फैले भ्रम को दूर करने की है।