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72% आरक्षण के खिलाफ सामान्य वर्ग हित सुरक्षा आंदोलन , रैली निकालकर दिखाया आक्रोश

डेस्क

छत्तीसगढ़ में 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के दिन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अनुसूचित जाति और ओबीसी के आरक्षण में बढ़ोतरी करते हुए प्रदेश में 72% आरक्षण का ऐलान क्या कर दिया पूरे प्रदेश में हंगामा ही मच गया। सुप्रीम कोर्ट के गाइडलाइन का उल्लंघन करते हुए 50% की निर्धारित आरक्षण सीमा को लांघने के खिलाफ लगातार आवाज बुलंद की जा रही है।

इसी कड़ी में रविवार को आरक्षण विरोधियो ने बिलासपुर विधायक शैलेश पांडे के निवास पर पहुंचकर नारेबाजी करते हुए उन्हें भी आंदोलन में शामिल होने का न्योता दिया था लेकिन उन्होंने अपनी सीमाओं का उल्लेख करते हुए उचित माध्यम से आंदोलनकारियों की मांग को मुख्यमंत्री तक पहुंचाने का भरोसा दिलाया था, लेकिन उस भरोसे पर यकीन न करने वालों ने अपने तय कार्यक्रम के तहत बुधवार को न्याय रैली निकाली। प्रदेश में इससे पहले अनुसूचित जाति को 12% आरक्षण हासिल था और अनुसूचित जनजाति को 32% ।ओबीसी को 14% आरक्षण दिया जा रहा था। नए घोषणा के तहत अनुसूचित जाति के आरक्षण में 1% का इजाफा करते हुए उसे 13% कर दिया गया है वहीं अन्य पिछड़ा वर्ग को 14 की जगह 27% आरक्षण देने का ऐलान किया गया है। इससे आरक्षण का प्रतिशत 72 हो चुका है जबकि सुप्रीम कोर्ट द्वारा 50% से अधिक आरक्षण न देने की बात कही गई है। आरक्षण की बैसाखी से प्रतिभाओं का गला घोटने की बात कहते हुए आंदोलनकारियों ने मुख्यमंत्री के खिलाफ नारेबाजी करते हुए तत्काल इस तुगलकी फरमान को वापस लेने की मांग की है।

उन्होंने इसे प्रतिभाओं का दमन बताया है। वैसे इससे पहले 18 जनवरी 2012 को भारतीय जनता पार्टी की तत्कालीन सरकार ने भी ऐसा ही प्रयास किया था। अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति के आरक्षण अधिनियम 1994 की धारा 4 में संशोधन करते हुए अनुसूचित जनजाति को 32% अनुसूचित जाति को 12 और अन्य पिछड़ा वर्ग को 14% आरक्षण देना तय किया गया था। जबकि सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित 50% की सीमा से अधिक होने पर साल 2012 में ही गुरु घासीदास साहित्य एवं संस्कृति अकादमी रायपुर, सतनाम सेवा संघ रायपुर, पी आर खुटे सहित कई ने याचिका लगाई गई थी जिसकी सुनवाई हाईकोर्ट में लंबित है। अब एक बार फिर छत्तीसगढ़ में आगामी चुनाव निकाय और पंचायत चुनाव के मद्देनजर यह लॉलीपॉप दिया गया है। विपक्ष का कहना है कि कांग्रेस सरकार केवल ओबीसी और अनुसूचित जाति के साथ छलावा कर रही है ।उसे भी पता है कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार 72% आरक्षण नहीं दे सकते। वहीं इसकी खिलाफत कर रहे आंदोलनकारी मुख्यमंत्री के इस फैसले से बेहद खफा नजर आ रहे हैं। 72% आरक्षण के खिलाफ महा आंदोलन के तौर पर न्याय रैली में बड़ी संख्या में युवा शामिल हुए जिसमें युवकों के साथ युवतियों ने भी बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई। सामान्य वर्ग हित सुरक्षा आंदोलन और अन्य बैनर तले इकट्ठा हुए युवाओं ने प्रदेश में किए गए इस घोषणा को सामान्य वर्ग के लिए कुठाराघात बताया है। पुलिस मैदान से निकल कर न्याय रैली कलेक्ट्रेट पहुंची इस बीच उन्हें कई वर्गों का समर्थन भी हासिल हुआ। सभी ने धीरे-धीरे आरक्षण को हटाने की मांग की। तो वहीं इसके स्थान पर आरक्षण का प्रतिशत और बढ़ाने के इस फैसले को देश के लिए अहितकारी बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे फैसलों से प्रतिभाओं का पलायन होगा और सामान्य वर्ग के युवाओं के लिए अवसर बिलकुल समाप्त हो जायेंगे।

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