
डेस्क
अटल विश्वविद्यालय का नया कारनामा उभर कर सामने आया है। 14 सितंबर को दीक्षांत समारोह होना है और अभी भी साल 2015- 16 के कॉमर्स की मेरिट लिस्ट फाइनल नहीं हो पाई है। 4 बरस तक ताई शगुफ्ता को टॉपर बताने के बाद अचानक यूनिवर्सिटी ने मोना पेशवानी को नए टॉपर की तरह से पेश कर दिया है। इससे नया विवाद उभर कर सामने आया है।

अटल विश्वविद्यालय की एक ऐसी कारगुजारी सामने आई है जिससे एक टॉपर छात्रा के सपने चकनाचूर हो गए हैं ।आप खुद सोचिए कि अगर आप को यह पता हो कि आपने किसी परीक्षा में अव्वल स्थान हासिल किया है और आप गोल्ड मेडल के हकदार है लेकिन फिर एक दिन अचानक आपको यह बता दिया जाए कि आपका यह हक किसी और को दे दिया गया है तो आप पर क्या बीतेगी। ऐसा ही कुछ बीत रहा है तायी शगुफ्ता पर। साल 2015 16 में सीएमडी से परीक्षा देने वाली कॉमर्स की मेरिट लिस्ट में शगुफ्ता को टॉपर घोषित किया गया था
साल 2015 -16 कि प्राविण्य सूची में सीएमडी कॉलेज की छात्रा ताई शगुफ्ता 1393 अंकों के साथ टॉपर थी और इन्हें सभी दस्तावेजों में टॉपर ही दर्शाया गया था लेकिन अचानक इन्हें इसी साल 2 फरवरी को पता चला किया वह टॉपर नहीं रही है उनके स्थान पर मोना पेशवानी को नया टॉपर घोषित कर दिया गया है ।अचानक ही मेरिट सूची में यह परिवर्तन किसी साजिश की ओर इशारा कर रही है।

ताई शगुफ्ता 77.3% अंक के साथ करीब 4 साल तक टॉपर रही लेकिन अचानक उनके स्थान पर 78.5% अंकों के साथ मोना पेशवानी को नया टॉपर घोषित कर दिया गया है। अटल यूनिवर्सिटी का द्वितीय दीक्षांत समारोह 14 सितंबर को होना है लेकिन अभी तक साल 2015 16 कॉमर्स टॉपर को लेकर यह फैसला नहीं हो पाया कि टॉपर कौन है। इसमें कई अनियमितता बरते जाने की बात कही जा रही है। नियम के अनुसार जिन छात्रों को सप्लीमेंट्री या एटीकेटी आता है उनका बाद में अगर नंबर बढ़ता भी है तो उन्हें टॉपर की मेरिट लिस्ट में शामिल नहीं किया जाता, लेकिन मोना पेशवानी के मामले में तो पुनर मूल्यांकन और पुनर गणना के बावजूद नंबर नहीं बड़े थे। जिसके बाद विशेष अधिकार के तहत उनके नंबर बढ़ाए गए हैं । ऐसी छात्रा को तायी शगुफ्ता से ऊपर रखना छात्रा के साथ अन्याय माना जा रहा है। हालांकि अटल यूनिवर्सिटी के परीक्षा नियंत्रक यह दावा करते हैं कि टॉपर मामले में सभी प्रक्रिया नियम अनुसार पूरी की गई है लेकिन ऐसे कई सवाल हैं जिनके जवाब विश्वविद्यालय नहीं दे पा रहा है। यही कारण है कि उन्होंने मंगलवार तक का वक्त दिया है जिसमें यह फैसला लिया जाएगा कि कॉमर्स की टॉपर कौन है और गोल्ड मेडल का हकदार कौन ?

इस मामले में पीड़ित छात्रा का दावा है कि सीएमडी कॉलेज की पूर्व प्राध्यापक की करीबी होने की वजह से मोना पेशवानी के नंबर षड्यंत्र पूर्वक बढ़ाए गए हैं क्योंकि ताई शगुफ्ता से उस प्राध्यापक के संबंध अच्छे नहीं थे। हैरानी इस बात की है कि नियमानुसार मोना पेशवानी द्वारा पुनर गणना और पुनर मूल्यांकन में नंबर नहीं बढे थे। जिसके बाद यूनिवर्सिटी ने विशेष अनुमति देकर उसके उत्तर पुस्तिकाओं की जांच करवाई और अचानक से नंबर काफी अधिक बढ़ गए। ऐसे में किसी षड्यंत्र से इनकार नहीं किया जा सकता ।यूनिवर्सिटी की हरकतों से छात्रा निराश है और इस मामले को कोर्ट तक ले जाने की बात कह रही है।

इस मामले में एनएसयूआई ने यूनिवर्सिटी का घेराव भी किया। इसके बाद विश्वविद्यालय द्वारा अगले दो दिनों में किसी फैसले पर पहुंचने का दावा किया गया है लेकिन जिन्होंने मोना पेशवानी को षड्यंत्र पूर्वक टॉपर घोषित किया है वे अपनी इस कार्यवाही को सही साबित करने के रास्ते भी तलाश ही लेंगे यानी सभी प्रयासों से ताई शगुफ्ता के साथ नाइंसाफी की जाएगी। हैरानी इस बात की है कि विश्वविद्यालय प्रबंधन उत्तर पुस्तिकाओं का गलत चेक करने वालों पर कोई कार्यवाही नहीं कर रही जिनके फैसलों की वजह से यह विवाद उपजा है । फिलहाल विश्वविद्यालय मोना पेशवानी को टॉपर मान रही है और झुकने को तैयार नहीं । ऐसे में अगर फैसला ताई शगुफ्ता के पक्ष में नहीं आता है तो वह भी कोर्ट जा सकती है और मामला इतनी जल्दी सुलझता दिख नहीं रहा।