बिलासपुर

VIDEO: कैदी मौत:- सेंट्रल जेल में कैदी की बिगड़ी हालत सिम्स में हुई मौत, परिजनों ने प्रताड़ना का लगाया आरोप, जेल प्रबंधन और पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल

भुवनेश्वर बंजारे

बिलासपुर – न्यायिक हिरासत में सेंट्रल जेल भेजे गए एक कैदी की सोमवार सुबह सिम्स हॉस्पिटल में इलाज के दौरान मौत हो गई। जिसको लेकर मृतक के परिजनों ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए है। मिली जानकारी के अनुसार यह पूरा मामला सीपत थाना क्षेत्र का है। जहा 18 जनवरी 2023 को सीपत पुलिस ने मोहरा निवासी श्रवण सूर्यवंशी उर्फ श्रवण को 6 लीटर महुआ शराब के साथ पकड़ा था और आबकारी एक्ट के तहत कार्यवाही करते हुए उसे न्यायिक हिरासत में सेंट्रल जेल भेज दिया गया था। जहां रविवार को आरोपी की तबीयत बिगड़ने के बाद जेल से उसे सिम्स हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया था। जहा सोमवार सुबह इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इधर मामले की सूचना मिलते ही मृतक श्रवण सूर्यवंशी उर्फ श्रवण के परिजन सोमवार को सिम्स पहुंचे। जहां उन्होंने सीपत पुलिस की इस कार्यवाही के साथ सेंट्रल जेल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाया है।

उन्होंने कहा कि सीपत पुलिस ने कार्यवाही नही करने के नाम पर और पैसों की मांग को लेकर मृतक श्रवण सूर्यवंशी उर्फ श्रवण की कस्टडी में रखकर बहुत पिटाई की। जिसके बाद उसे जेल दाखिल कर दिया गया। जहां जेल में भी उसे को टॉर्चर किया गया इसके बाद उसकी तबीयत और खराब हो गई जब बात हाथ से निकलने लगी तब जेल प्रबंधन द्वारा मरीज को अस्पताल में लाकर एडमिट कराया गया। इस पूरे प्रकरण में मृतक के परिजनों ने उनके दो बच्चो के भरण पोषण के साथ दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की मांग की है। वही इस पूरे आरोप प्रत्यारोप की वास्तविक स्थिति पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही सामने आने की बात कही जा रही है।

36 घंटे पुलिस कस्टडी में पिटाई का आरोप..

परिजनों की माने तो सीपत पुलिस ने श्रवण सूर्यवंशी उर्फ श्रवण को सुनियोजित तरीके से पकड़ा और उसके बाद श्रवण के परिजनों से पैसे ऐंठने के लिए श्रवण की जमकर धुनाई कर दी। परिजनों का आरोप है की यह सिलसिला 36 घंटो तक चल। जिसके बाद जब परिजनों ने पुलिस को पैसे नहीं दिए तो उसे न्यायिक हिरासत में सेंट्रल जेल भेज दिया।

सिम्स हॉस्पिटल में मौत के घंटो बाद भी आरोपी के हाथो से नही उतरी हथकड़ी…

सोमवार को सिम्स हॉस्पिटल में अमानवीय नजारा देख श्रवण के परिजन स्तब्ध रहे। जहा श्रवण के मौत होने के बाद भी उसके हाथो में घंटो हथकड़ी लगी रही। जिसकी सुध लेने वाला कोई भी जिम्मेदार हॉस्पिटल में नही था। पहले थाने में पिटाई फिर जेल में अनदेखी और हॉस्पिटल में अमानवीय दृश्य देखने के बाद से ही सूर्यवंशी परिवार में काफी निराशा और आक्रोश है। गरीबी में बड़ी मुश्किल से जीवन यापन करने वाले श्रवण के परिवार के सामने अब विडंबना यह है! की उन्होंने अपने परिवार के भरण पोषण करने वाले पुत्र को खो दिया है। तो वही उनके पीछे उनके दो छोटे बच्चे और पूरे परिवार के सामने जीविका चलाने की समस्या आ गई है। ऐसे में वह चाहकर भी अपने आरोपों को सिद्ध करने और श्रवण को न्याय दिलाने कि लड़ाई लड़ने के लिए सामर्थ्य नहीं जुटा सकेंगे। फिर भी वह न्यायिक जांच की उम्मीद जिला प्रशासन से लगा रहे है।

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