बिलासपुर

टोनही होने का आरोप लगाए जाने से प्रताड़ित महिला ने खुद को किया आग के हवाले….बेटे ने जान पर खेल बचाई जान….कुप्रथा आज भी समाज पर हावी

भुवनेश्वर बंजारे

बिलासपुर – छत्तीसगढ़ की सामाजिक बुराइयों में, सबसे बड़ी चुनौती यहां की टोनही प्रथा है, प्रदेश के गांवों में आज भी अक्सर किसी भी महिला को टोनही कह कर अपमानित करना, सामूहिक रूप से मार डालना, आम बात है। छत्तीसगढ़ में टोनही डायन को लेकर अंधविश्वास का एक ऐसा ही मामला न्यायधानी में भी सामने आया है। जिसमे समाज के दुश्मन बने लोगो के प्रताड़ना से तंग आकर एक महिला ने मौत को गले लगाने का निर्णय ले लिया। दरसअल यह पूरा मामला कोनी थाना क्षेत्र के ग्राम पौसरा का है। जहाँ किसान रघुवीर सिंह की 36 वर्षीय पत्नी राशि ठाकुर को गांव के ही कुछ लोग टोनही होने का दावा करते हुए उसे रोजाना प्रताड़ित करते थे। जिससे तंग आकर महिला ने बुधवार सुबह करीब 5 बजे अपने घर के छत में अपने ऊपर मिट्टी तेल डालकर आग लगा लिया। इस बीच घर मे अपनी माँ को नही देख राशि ठाकुर का 17 वर्षीय बेटा विनय उन्हें खोजने लगा। जैसे ही वह छत में पहुँचा। उसकी आँखें फटी की फटी रह गई। उसने तुरंत ही कंबल लेकर आग में जलती हुई अपनी माँ को लपेट लिया। जैसे तैसे घर वालो ने मौके पर पहुँच आग पर काबू पाया। लेकिन तब तक महिला काफी जल चुकि थी। जिसे 112 की मदद से सिम्स हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। इस दौरान मीडिया से रूबरू होकर परिजनों ने बताया कि गांव के ही राजू ठाकुर,करतार ठाकुर,भारत ठाकुर सहित जगवेश ठाकुर द्वारा महिला के सुहाग भंडार की दुकान में रोजाना पहुँच गाली गलौज करते थे। जिससे तंग आकर महिला ने यह कदम उठाया है। इधर मामले में स्थानीय पुलिस ने घटना के सूचना के बाद तत्काल आरोपियों को अपने हिरासत में ले लिया है।

वही मामले में तहसीलदार ने हॉस्पिटल पहुँच महिला की बयान दर्ज कर उचित कार्यवाही का आश्वासन दिया है।

इस बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि आज जब दुनिया विज्ञान और विकास के पथ पर बड़ी तेजी से आगे बढ़ रही है ऐसे में छत्तीसगढ़ की यह वीभत्स सामाजिक बुराई खत्म होने का नाम नहीं ले रही है और ना ही इसके लिए जमीनी स्तर पर प्रयास किया जा रहा है। यही कारण है कि आए दिन महिलाओं के साथ अत्याचार शोषण का यह टोनही प्रथा का खेल  बदस्तूर चल रहा है। इस संदर्भ में जहां सरकार ने एक छोटा सा कानून बना करके अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली है। वही सामाजिक चेतना प्रसारित करने वाले किसी व्यक्ति और संस्था का नाम भी सुनाई नहीं देता है। लिहाजा परिणाम यह है कि छत्तीसगढ़ में आए दिन महिलाओं को तंत्र मंत्र करने वाली कह कर प्रताड़ना का दौर बदस्तूर जारी है।

देश का वह पहला राज्य जहाँ पहले बना टोनही प्रताड़ना अधिनियम..

छत्तीसगढ़ ही देश में पहला ऐसा राज्य है। जहां इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कानून बना है। छत्तीसगढ़ में टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम 2005 के तहत किसी को भी टोनही कहने पर 3 साल का कठोर कारावास, जुर्माने का प्रावधान है। शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने या नुकसान पहुंचाने पर 5 साल के कठोर कारावास और जुर्माने का प्रावधान है। 

कुप्रथा को समाप्त करने आम लोगो और दूसरे समाजसेवीयो को सामने आने की जरूरत…

21वीं सदी में एक ओर जहां पूरे देश में सामाजिक और हाईटेक क्रांति हो रही है तो वहीं दूसरी ओर टोनही प्रताड़ना के चलते महिलाओं के साथ बर्बरता की घटना सामने आ रही हैं। ऐसे में आम लोगों और समाजसेवियों को इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए आगे आने की जरूरत है। क्योंकि इस तरह से परंपरा और रूढ़िवादी सोच से किसी महिला के साथ सार्वजनिक रूप से किया जा रहा अत्याचार क्षमा की श्रेणी में नहीं आता है। 

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