मल्हार

धान की फसल में बीमारियों का प्रकोप… चिंतित किसान जुटे बचाव में, कैसे करें फसलों की सुरक्षा विशेषज्ञ दे रहे सुझाव,

हरिशंकर पांडेय

मल्हार – इस वर्ष धान की फसल मे बहुत ही ज्यादा कीट तथा बीमारीयो का प्रकोप होने से पूरे क्षेत्र के किसान परेशान है, शुरुवाती दौर में सबसे पहले शिथ ब्लाइट तथा तनाछेदक का हमला हुआ था। उससे किसान उबर ही नही पाए थे कि इस वर्ष समय से पहले माहो का अटैक भी हो गया है। साथ ही तनाछेदक और शिथ ब्लाइट रिपीट हो गया है। धान फसल को हो रहे कीटो से नुकसान को लेकर कृषि विज्ञान केंद्र बिलासपुर के वैज्ञानिकों को एडवाइजरी जारी करना पड़ गया जिसमें किसानो को सजग रहने व सही दवा छिड़काव करने की सलाह दी गई है। इस बार बीएलबी भी आया है जो कि लेट से आया है। बहुत से किसान समझ नही पा रहें है कि कौन सी दवा का छिड़काव करें जिससे फसल सुरक्षित रहे और अब पेकनिकल माईट का प्रकोप बहुत तेजी से बढ रहा है। किसान बार बार दवाई छिड़काव कर रहे हैं और परेशान है।

इस साल लिमिट से ज्यादा दवाई के प्रयोग होने के कारण दवाओ का स्टॉक भी खत्म होने से कारगर दवाई भी नही मिल रहा है। किसान अपने समझ तथा कीटनाशक व्यापारी के अनुसार दवाओ का प्रयोग करने के कारण जरूरत अनुरूप दवाई नही डाल पा रहा है। किसानो को चाहिए कि कृषि विस्तार अधिकारी , कृषि विज्ञान केंद्र, कृषि महाविद्यालय सहित अन्य संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर अपने फसलों के समस्याओ का निदान का सलाह ले। किसान रामकुमार यादव का कहना है कि कृषि विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों को गाव में जाकर किसानों को कीटो के दुष्प्रभाव को रोकने कारगर उपाय बताना चाहिए। अन्यथा ऐसी ही स्थिति कुछ दिन और रही तो धान फसल को भयंकर नुकसान होगा व किसान परेशान हो जाएंगे। वर्तमान में लगभग सभी खेतो के धान फसल निकल गए है और इस स्थिति में फसल को बेहतर अनुकूल मौसम की आवश्यकता होती है।

प्राकृतिक खेती अपनाना होगा….

इस भयावह स्थिति की चिंता करते हुए मल्हार के प्रगतिशील किसान जदुनंदन प्रसाद वर्मा ने बताया कि इन सबका सबसे बड़ा कारण है धरती का प्रदूषित होना तथा मौसम का बार बार परिवर्तन होना, फसलो को मुख्य रूप से सोलह से अठारह पोषक तत्वो कि आवश्यकता होती है जो किसानो को फसल लगाने से पहले जानना चाहिए कि हमारे मृदा के कौन कौन से पोष्क तत्व कितने मात्रा मे है और हम जो फसल लगा रहें हैं उन्हे कौन कौन पोष्क तत्व कितने मात्रा मे चाहिए उस हिसाब से फसल लगाकर संतुलित मात्रा मे खाद का प्रयोग करना चाहिए। अलग अलग पोष्क तत्व के कमी मे अलग अलग कीट तथा बीमारियो का अटेक होता है। वैसे तो मिट्टी के स्वस्थ्य अच्छे होने से ही फसल अच्छे होते है और मिट्टी के अच्छे स्वास्थ्य के लिए मिट्टी मे कार्बनिक पदार्थो को बढ़ाना बहुत जरूरी होता है। कार्बनिक पदार्थ बढ़ाने के लिए गौ आधारित प्राकृतिक खेती करना चाहिए। पशुओ तथा पक्षीयो के विष्ठा फसलो के अवशेषो के अच्छादन से मिट्टी की स्वास्थ्य मे सुधार होता है। तथा इसी से कार्बनिक पदार्थ बढतें है और हमारे फसलों को जरूरत अनुरुप पोष्क तत्व मिलने से विषम परिस्थित से लड़ने की ताकत मीलती है। और इससे उत्पादीत स्वास्थ्य आहार लेकर सभी प्राणी भी स्वस्थ्य रहते है, इसलिए सभी किसानो से अपील है कि अंधाधुंध रसायनिक खाद तथा दवाई का उपयोग बंद करें।

“किसानों के लिए कृषि विज्ञान केंद्र बिलासपुर द्वारा एडवाइजरी जारी की गई है जिसमे किसानों को सही दवा का छिड़काव करने की सलाह दी गई है। साथ ही कृषि विभाग के अधिकारी व कृषि वैज्ञानिकों के सलाह से ही उपयुक्त दवा फसल में सींचने कहा गया है, फसलो को दवा की जरूरत के अनुसार ही देना चाहिए क्योंकि बिना सलाह के दवा छिड़काव फसल को भारी नुकसान पहुचाने के साथ ही अन्य कीटो का प्रभाव बढ़ जाता है इसके अलावा पौधों की प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होता है।….अरुण त्रिपाठी, वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केंद्र बिलासपुर।

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