छत्तीसगढ़बिलासपुर

सैनिक से जाना पुलवामा हमले की हकीकत, श्रीराधा फाउंडेशन का अनूठा आयोजन

राजनीतिक नफे नुकसान से परे हटकर सभी दलों के लिए राष्ट्रहित सर्वोपरि होना चाहिए, तभी देश और दुनिया में शांति कायम हो सकेगी

बिलासपुर प्रवीर भट्टाचार्य

बिलासपुर की सामाजिक संस्था श्री राधा फाउंडेशन द्वारा पुलवामा के शहीदों को श्रद्धांजलि देने हेतु आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे मुख्य अतिथि भी खास थे ।कमांडो पुरुषोत्तम चंद्रा का इस कार्यक्रम में शामिल होना गौरव का विषय भी था और उनके अनुभवों ने सब को रोमांचित करते हुए देश प्रेम का जज्बा भी जगा दिया ।पैरा कमांडो पुरुषोत्तम कुमार चंद्रा जैजैपुर के पास के एक छोटे से गांव भरतीयाजटा के रहने वाले हैं ,जिनका बचपन से ही सपना था कि वह सैनिक बनकर देश की सेवा करेंगे। पढ़ाई खत्म करने के बाद साल 1990 में उनका चयन जबलपुर सैनिक संस्थान में हुआ। अपने सेवाकाल में वे आगरा, दिल्ली, जम्मू कश्मीर और लेह लद्दाख में तैनात रहे। 0 डिग्री के तापमान पर भी उन्होंने काम किया, फिर भी उनका जज्बा ऐसा है कि उन्हें लगता है कि देश सेवा के लिए सैनिक बनने से बेहतर कुछ भी नहीं है ।अपना अनुभव बताते हुए उन्होंने वह किस्सा भी सुनाया जब 26 जनवरी 2000 को सूरनकोट सेना मुख्यालय में आतंकियों ने आक्रमण किया था। तब वे उस हमले को नाकाम करने मुख्यालय से 45 किलोमीटर दूर पाकिस्तान स्थित ग्राम सावला तक चले गए थे।

इस ऑपरेशन के दौरान उनके दोनों पैरों में गोलियां लगी थी ,लेकिन फिर भी अद्भुत हौसले का परिचय देते हुए वे मोर्चे पर डटे रहे ।अपना अनुभव बताते हुए उन्होंने कहा कि हवाई जहाज के हाईजैक रोकने में भी पैरा कमांडो की अहम भूमिका होती है ।यहां उपस्थित क्लब के सदस्यों ने पुलवामा की घटना की जानकारी चाही तो उन्होंने विस्तार से पूरे घटना को समझाया ।उन्होंने बताया कि किस तरह फिदायीन चेक पोस्ट पर महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार होने का अफवाह उड़ा कर 350 किलो आरडीएक्स से भरे वाहन को ले जाने में कामयाब हुआ था ।उसका इरादा तो एक साथ कई बसों से टकराने का था लेकिन वह केवल एक बस से टकराने में ही कामयाब हो पाया । श्री चंद्रा ने बताया कि आतंकवादियों की कार्यशैली अलग अलग होती है और इसमें से आत्मघाती दस्ते का मुकाबला करना सबसे कठिन होता है, क्योंकि वे जान देने के इरादे से हमला करते हैं और जिंदा भी नहीं पकड़े जाते ।सीरिया और अफगानिस्तान के बाद अब भारत में भी आतंकवादियों द्वारा आत्मघाती दस्ते में शामिल होना भारत के लिए चिंता का विषय है ।करीब 1 घंटे तक उन्होंने अपनी बातें रखी। उनके अनुभवों को सुनकर मौजूद श्रोताओं के रोंगटे खड़े हो गए। कार्यक्रम की शुरुआत में मुख्य अतिथि कमांडो पुरुषोत्तम कुमार चंद्रा का पुष्प हार ,श्रीफल और शॉल से स्वागत किया गया तो वही पवित्र कुंभ स्नान से लौटे क्लब के उपाध्यक्ष शशि प्रकाश मिश्रा का भी स्वागत क्लब ने किया। इस दौरान सह सचिव प्रेम पटेल ने देश भक्ति पर मार्मिक कविता पेश कर सबकी आंखें नम कर दी। मुख्य अतिथि कमांडो चंद्रा से क्लब के सदस्यों ने कई प्रश्न भी पूछे। एक प्रश्न का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि राजनीतिक नफे नुकसान से परे हटकर सभी दलों के लिए राष्ट्रहित सर्वोपरि होना चाहिए, तभी देश और दुनिया में शांति कायम हो सकेगी। कभी कभी शांति के लिए भी हिंसा की जरूरत पड़ती है ,इसलिए अगर ताकत से पाकिस्तान जैसे आतंकवादी देश को जवाब देना पड़े तो उसमें देश में दो राय नहीं होनी चाहिए।

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