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गोगिया सरकार का जादू बिलासपुर के सर चढ़कर बोलेगा ,विधायक शैलेश पांडे ने भी माना ऐसे जीवंत शो को बचाने की है जरूरत

हालांकि परीक्षा के समय में बेमौसम शो कर गोगिया सरकार ने जोखिम मोल लिया है लेकिन वह जादूगर ही क्या जो नामुमकिन को मुमकिन ना बना दे

बिलासपुर प्रवीर भट्टाचार्य

स्मार्टफोन ने हमें बहुत कुछ दिया है, तो हमारा बहुत कुछ छीना भी है। मनोरंजन की दुनिया में स्मार्टफोन ने क्रांतिकारी बदलाव लाए हैं। स्मार्टफोन ने असंभव को संभव बना दिया है। बच्चे एक-दो साल की उम्र से ही स्मार्टफोन की मायावी दुनिया में इस कदर रम जाते हैं कि उसके बाहर की दुनिया उनके लिए कोई मायने नहीं रखती। इसकी पहली पीढ़ी जानती है कि सर्कस, जादू गम्मत, ऑर्केस्ट्रा नाटक ,जात्रा के क्या मायने हुआ करते थे लेकिन नई पीढ़ी सब कुछ मोबाइल पर ही देखने की आदी। हो चुकी है। जिस जमाने में डायनेमो और क्रिस एंजल का जादू युवा पीढ़ी को चमत्कार करता है उस दौर में ठेठ भारतीय जादू और जादूगर पहचान के लिए संघर्ष कर रहे हैं। आज की पीढ़ी में ऐसे जीवंत प्रदर्शन के प्रति खास आकर्षण नहीं है और यही चिंता का विषय है। लेकिन अब भी कुछ जुनूनी लोग ऐसे हैं, जो विलुप्त होती परंपराओं को बचाने की मुहिम का मशाल थामे हुए हैं।

काफी अरसे बाद एक बार फिर बिलासपुर में कोई जादूगर अपना शो लेकर पहुंचा है। भारतीय जादूगर पीसी सरकार की तूती दुनिया भर में बोलती थी ।गोगिया सरकार भी उसी परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हैं। शुक्रवार शाम को जादूगर गोगिया सरकार के इंद्रजाल जादूगरी शो की शुरुआत बिलासपुर के शिव टॉकीज में हुई। इसका विधिवत शुभारंभ विधायक शैलेश पांडे ने किया। उन्होंने भी माना कि जादू जैसे शो हमारे धरोहर है और उनका संरक्षण और संवर्धन बेहद जरूरी है और यह तभी संभव है जब नई पीढ़ी मैं इनके प्रति आकर्षण पैदा किया जाए। इसके लिए ऐसे शो निरंतर होने चाहिए। वहीं संचार माध्यमों को भी यह कोशिश करना चाहिए कि नई पीढ़ी ऐसे जीवंत शो से जुड़ाव कायम कर सके। उन्होंने एक तरफ जहां शो देखने पहुंचे दशकों का आभार व्यक्त किया तो वहीं जादूगर को भी धन्यवाद और शुभकामनाएं दी। बिलासपुर में जादूगर गोगिया सरकार रोजाना तीन सो पेश करेंगे, जिसमें पारंपरिक भारतीय जादू के साथ कई रोचक प्रस्तुति दी जाएगी।

हवा में लड़की को टांग देना, गले के आर पार तलवार निकाल देना, घोड़े को मंच से गायब कर देना, लड़की के तीन टुकड़े कर देना जैसी रोचक प्रस्तुतियां इसमें शामिल है। उद्घाटन कार्यक्रम में गोगिया सरकार ने अंचल के कुछ वरिष्ठ जादूगरो को भी बुला कर मंच पर उनका सम्मान किया और उन्हें भी अपना आइटम पेश करने का अवसर प्रदान किया ।ऐसा इससे पहले शायद ही किसी जादूगर ने किया हो, लेकिन अफसोस का विषय यह है कि इन दिनों जादू के खेल के प्रति खास आकर्षण नहीं रह गया है। लोग महंगे टिकट लेकर मल्टीप्लेक्स में सिनेमा देखने जा सकते हैं लेकिन इस विलुप्त होती कला को बचाने के लिए जादू का शो देखने लोग नहीं जाते, जबकि आज भी बच्चों को जादू का शो सबसे अधिक रोमांचित करता है ।वे हैरान रह जाते हैं कि किस तरह जादूगर असंभव को संभव बना देता है। हालांकि परीक्षा के समय में बेमौसम शो कर गोगिया सरकार ने जोखिम मोल लिया है लेकिन वह जादूगर ही क्या जो नामुमकिन को मुमकिन ना बना दे।

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