सत्याग्रह डेस्क
बिलासपुर नगर निगम की सीमा वृद्धि के लिए जनप्रतिनिधियों के सुझावों को शामिल करते हुए शासन को प्रस्ताव भेजा जायेगा। कलेक्टर डॉ. संजय अलंग की अध्यक्षता में सोमवार को आयोजित बैठक में यह निर्णय लिया गया।
बिलासपुर नगर निगम द्वारा नगर निगम सीमा में वृद्धि के प्रस्ताव पर जनप्रतिनिधियों की राय लेने के लिए आज मंथन सभा कक्ष में बैठक रखी गई थी। बैठक में बताया गया कि मेयर इन कौंसिल द्वारा बिलासपुर नगर निगम की सीमा में विस्तार करने का प्रस्ताव 9 अप्रैल 2012 को पारित किया गया था। नगर निगम सामान्य सभा में 30 अगस्त 2012 को यह प्रस्ताव स्वीकृत किया गया था।
बिलासपुर नगर निगम में नगरपालिका तिफरा, नगर पंचायत सिरगिट्टी तथा सकरी एवं 26 ग्राम पंचायत मंगला, उसलापुर, अमेरी, घुरु, तुरकाडीह, लोखंडी, परसदा, बन्नाक डीह, फदहाखार, कोरमी, महमंद, धूमा, मानिकपुर, ढेका, दोमुहानी, देवरीखुर्द, मोपका, चिल्हाटी, लिंगियाडीह, बिजौर, परसाही, बहतराई, खमतराई, कोनी, सेंदरी और बिरकोना को शामिल किया जाना प्रस्तावित है।
प्रस्तावित 29 ग्रामों की कुल जनसंख्या वर्ष 2011 की गणना के अनुसार 1,99970 और क्षेत्रफल 146.363 वर्ग किलोमीटर है। इन प्रस्तावित ग्रामों के नगर-निगम की सीमा में शामिल होने के पश्चात् नगर निगम की सीमा लगभग 176.80 वर्ग किलोमीटर तथा जनसंख्या 5 लाख से अधिक हो जायेगी।
कलेक्टर डॉ. अलंग ने कहा कि नगर निगम का यह प्रस्ताव शासन के पास भेजा जायेगा। शासन की अनुमति मिलने पर ही आगे की प्रक्रिया प्रारंभ की जायेगी। उन्होंने सभी सुझावों का स्वागत किया और कहा कि इस प्रस्ताव से आम जनता का हित संवर्धन होना चाहिए।
नगर निगम के आयुक्त प्रभाकर पांडेय ने कहा कि प्रस्तावित सीमा वृद्धि से बिलासपुर को बी ग्रेड शहर का दर्जा मिलेगा और इससे केन्द्र तथा राज्य शासन से अधिक अनुदान मिलेगा, जिससे शहर का अधिक तेजी से विकास होगा।
बैठक में जनप्रतिनिधियों ने विभिन्न सुझाव दिये। तखतपुर विधायक श्रीमती रश्मि सिंह ने कहा कि सम्बन्धित गांवों में जन सुनवाई रखकर उनकी राय ली जाये। बिलासपुर विधायक श्री शैलेष पांडेय ने कहा कि बिलासपुर के विकास के लिए सीमा में वृद्धि आवश्यक है। जनता चाहती है कि बिलासपुर महानगर बने, इसलिए सीमा का विस्तार किया जाना चाहिये। मस्तूरी के विधायक डॉ. कृष्ण मूर्ति बांधी ने कहा कि उनके क्षेत्र के 6 ग्रामों को शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया है। 2011 से लेकर अब तक इन गांवों की जनसंख्या बढ़ चुकी है। इस पर कलेक्टर ने उनके सुझाव के अनुसार आयुक्त को नये आंकड़े के लिए अलग कॉलम बनाकर उसे दर्ज करने का निर्देश दिया। बेलतरा के विधायक रजनीश सिंह ने कहा कि जिन गांवों को शामिल किये जाने का प्रस्ताव है उन गांवों में विकास कार्य प्राथमिकता से किया जाये। नगर निगम के महापौर किशोर राय ने सुझाव दिया कि एक कंसलटेंट नियुक्त किया जाये,जो अध्ययन करे कि नगर निगम सीमा में शामिल करने से इन गांवों पर क्या प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि बिलासपुर स्मार्ट सिटी पर इस प्रस्ताव के अमल से क्या प्रभाव पड़ेगा, इसका परीक्षण कराया जाना चाहिये। बिल्हा विधायक प्रतिनिधि भूपेन्द्र सिंह सवन्नी ने तिफरा एवं सिरगिट्टी को प्रस्तावित वृद्धि से अलग रखने का सुझाव दिया। इसके अलावा अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी अपने सुझाव दिये।
नगर निगम परिसीमन में जनप्रतिनिधि एक राय नजर नहीं आए ।एक तरफ जहां बिलासपुर विधायक शैलेश पांडे परिसीमन के हिमायती दिखे तो वहीं भाजपा विधायकों ने कई मुद्दों पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई । खासकर जनसंख्या को लेकर उन्होंने आपत्ति जताते हुए कहा कि दिए गए आंकड़े भ्रमित करने वाले हैं ।वास्तविक स्थिति कुछ और है ।कुछ नगर पालिका और नगर पंचायत की अपनी ही समस्या है ।बेजा कब्जा धारियों में यह भय है कि नगर निगम सीमा में आने के बाद उनके मकान तोड़ दिया जाएंगे। संपत्ति कर को लेकर भी भय की स्थिति है ।आबादी भूमि और पट्टा पर भी ग्रामीणों में आपत्ति है। जनप्रतिनिधि होने के नाते उन्होंने इस पर आपत्ति दर्ज कराते हुए जनता के बीच जाकर रायशुमारी की बात की है ।जाहिर है जनप्रतिनिधियों के साथ यह बैठक बेनतीजा रही है। और यहां भी राजनीतिक चश्मे से परिसीमन को देखे जाने से बिलासपुर का विकास और आने वाले भविष्य की परीकल्पना में रुकावट आएगी।