बिलासपुर

हैरान करने वाला खुलासा , विषहीन सांपों के काटने से होती है अधिकांश मौतें , सर्पदंश के बढ़ते मामलों को देख कर प्रशासन ने जारी किए दिशा-निर्देश

डेस्क

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा सर्पदंश से बचाव के लिये दिशा-निर्देश जारी किये गये हैं। जिसका पालन सुनिश्चित करने सभी तहसीलदारों को निर्देशित किया गया है।

विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देश के अनुसार सर्पदंश के प्रबंधन हेतु जानकारी ही बचाव है। अतः इसका व्यापक प्रचार-प्रसार आम जनता के बीच किया जाये। सर्प काटने की दशा में काटे हुए जगह को साबुन-पानी से धोयें। दांत के निशान की जांच करें, कहीं जहरीले सर्प के काटने का दो दांत का निशान तो नहीं? काटे हुए अंग को हृदय के स्तर से नीचे रखें। सर्पदंश वाले अंग को हिलाये-डुलायें नहीं और उसे स्थित रखें। घाव के ऊपर बैन्डेज लगायें। घायल व्यक्ति को सांत्वना दें, घबराहट के कारण हृदय गति तेज चलने से रक्त का संचार तेज हो जाने की दशा में जहर सारे शरीर में फैलने की आशंका बनी रहती है। तुरंत नजदीक के अस्पताल में ले जायें। यदि जहरीले सर्प ने काटा है तो सर्प निरोधक वैक्सीन लगवाएं।
बर्फ अथवा अन्य गर्म पदार्थ का इस्तेमाल काटे हुए स्थान पर न करें। अप्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा रक्त स्त्राव को रोकने, रक्तबंध की पट्टी न बंधवाएं, इससे संबंधित अंग में रक्त का संचारण पूरी तरह से रूक सकता है। इस स्थिति में संबंधित अंग की क्षति हो सकती है। काटे गये स्थानपर चीरा न लगायें। प्रभावित व्यक्ति को चलने से रोकेें। शराब एवं नींद आने की कोई दवा न दें। तांत्रिक आदि के झांसे में न आयें।

सर्प काटने पर भय एवं चिंता न करें। सभी जहरीले सांपों के पास हर समय पूरा जहर नहीं होता है। अगर पेरा जहर हो तो भी इसकी लीथल डोज हमेशा प्रवेश नहीं करा पाते हैं। सांप के काटने के उपरांत उसके काटने के निशान की जांच करें। विषहीन सर्प के काटने से भी घाव के आस-पास सूजन और खुजलाहट होती है। सांप के विष के अनुसार ए.वी.एस.का इंजेक्शन लगावाया जाये। अधिकांश लोग विषहीन सर्प के काटने से मरते हैं। सांप के बिल में कार्बोलिक एसिड डालने से एसिड के गंधमात्र से सर्प दूर हो जाते हैं। मुर्गी के चूजे, चूहे एवं मेढक इत्यादि सर्पों का प्रिय भोजन है, अतः इन्हें घर के पास न रहने दें।
तहसीलदार को निर्देशित किया गया है कि राजस्व पुस्तक परिपत्र 6-4 में निहित प्रावधान अनुसार सर्पदंश से प्रभावित हितग्राहियों को तत्काल अनुदान सहायता प्रदान की जाये और उनको समुचित उपचार एवं सुविधा उपलब्ध कराने की कार्यवाही की जाये। सर्पदंश से होने वाले क्षति की जानकारी निर्धारित प्रपत्र में प्रतिदिन राहत आयुक्त कार्यालय को भी फैक्स एवं ईमेल से भेजने का निर्देश दिया गया है।

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