
रमेश राजपूत
रायपुर – महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार ने बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला लिया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में पंजीयन मंत्री ओपी चौधरी की पहल पर महिलाओं के नाम होने वाली भूमि एवं अचल संपत्ति की रजिस्ट्री पर पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट लागू कर दी गई है। मंत्रिपरिषद से मंजूरी मिलने के बाद अधिसूचना जारी होते ही यह व्यवस्था प्रभावशील हो गई है। नई व्यवस्था के तहत अब महिलाओं के पक्ष में होने वाले अचल संपत्ति अंतरण दस्तावेजों पर पंजीयन शुल्क केवल 2 प्रतिशत लगेगा, जबकि पहले यह शुल्क 4 प्रतिशत था। सरकार का मानना है कि इस फैसले से महिलाओं के नाम संपत्ति खरीदने और पंजीयन कराने को बढ़ावा मिलेगा, जिससे समाज में उनकी आर्थिक भागीदारी मजबूत होगी। सरकार द्वारा जारी जानकारी के अनुसार वर्ष 2024-25 में महिलाओं के नाम पर 82 हजार 755 दस्तावेजों का पंजीयन हुआ था। नए प्रावधान के लागू होने के बाद इस संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना जताई जा रही है। हालांकि इस निर्णय से राज्य सरकार को करीब 200 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का अनुमान है, लेकिन सरकार ने इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक दूरदर्शी और सकारात्मक कदम बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन बढ़ने से उन्हें आर्थिक सुरक्षा मिलेगी और परिवार तथा समाज में उनकी स्थिति और अधिक मजबूत होगी। यह निर्णय राज्य में महिला अधिकारों और आर्थिक स्वतंत्रता को नई मजबूती देने वाला साबित हो सकता है।