
उदय सिंह
बिलासपुर – जिले के मस्तूरी जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत भटचौरा में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मजदूरी भुगतान में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आने से हड़कंप मच गया है। हितग्राहियों ने आरोप लगाया है कि शासन द्वारा उनके आवास निर्माण के लिए जारी की गई मजदूरी राशि उनके खातों में पहुंचने के बजाय दूसरे लोगों के खातों में ट्रांसफर कर दी गई। मामले ने अब जनपद पंचायत से लेकर ग्रामीण क्षेत्र तक गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों ने जनपद पंचायत मस्तूरी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को लिखित शिकायत सौंपते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और मजदूरी की राशि वापस दिलाने की मांग की है। शिकायतकर्ता पिंकी लहरे पति ओमप्रकाश लहरे निवासी ग्राम भटचौरा ने आवेदन में स्पष्ट आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत मिलने वाली मजदूरी राशि उनके खाते में जमा नहीं हुई, बल्कि किसी अन्य खाते में भेज दी गई।शिकायत में रोजगार सहायक समेलाल पुरेना की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं।

आरोप है कि केवल एक-दो नहीं बल्कि कई हितग्राहियों की मजदूरी राशि गलत खातों में भेजी गई है। शिकायत में पिंकी लहरे के अलावा मंगलीन बाई कोसले, धनेश्वरी बाई, राही बाई कोसले और सुरेश कोसले सहित अन्य ग्रामीणों के नाम भी शामिल हैं, जिन्होंने भुगतान में गड़बड़ी की शिकायत की है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना गरीब परिवारों के लिए सबसे महत्वपूर्ण योजना है, लेकिन पंचायत स्तर पर लापरवाही और कथित भ्रष्टाचार के कारण पात्र हितग्राही आर्थिक संकट में फंस गए हैं। मजदूरी की राशि समय पर नहीं मिलने से कई परिवारों का मकान निर्माण कार्य भी प्रभावित हुआ है। ग्रामीणों ने संबंधित बैंक खातों, भुगतान रिकॉर्ड और पंचायत स्तर पर किए गए ऑनलाइन एंट्री की जांच की मांग की है। मामले में एक और चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब भारत जांगड़े, हरलाल, राजकुमार और परसू राम जांगड़े ने बताया कि वर्ष 2023 में उनके प्रधानमंत्री आवास के मकान पूरी तरह बन चुके हैं, लेकिन जब उन्होंने आवास शाखा में जानकारी ली तो पता चला कि अब तक उनके नाम से वर्क ऑर्डर ही जारी नहीं हुआ है। इस खुलासे ने योजना के क्रियान्वयन और दस्तावेजी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
उपसरपंच रंजीत कुर्रे ने भी मामले की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि शिकायत सही पाई जाती है तो यह सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि गरीबों के हक पर डाका डालने जैसा मामला होगा। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाता है और प्रधानमंत्री आवास योजना में कथित भ्रष्टाचार के इस खेल पर कब तक कार्रवाई होती है।