
अब गेंद अजीत जोगी के पाले में है। उनके प्रत्याशी घोषित करने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ हो जायेगी

बिलासपुर प्रवीर भट्टाचार्य
राजनीति की बिसात बिछ चुकी है। मुकाबले में बिल्कुल दो नए खिलाड़ी है। इसलिए पलड़ा किसका भारी है यह कहना बड़ा ही मुश्किल है। बिलासपुर लोकसभा सीट, राजधानी रायपुर के बाद सबसे महत्वपूर्ण सीट है। इसलिए इस महत्वपूर्ण सीट के कई दिग्गज दावेदारों के नाम उभरकर आ रहे थे। कभी चर्चा थी कि पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल बिलासपुर प्रत्याशी होंगे
तो वहीं इस महत्वपूर्ण सीट से कभी चर्चा जू देव परिवार की तो कभी पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के नाम की भी रही, लेकिन यहां पल पल परिस्थितियां बदलती चली गई। पार्टी ने निर्णय लिया की पुराने सभी सांसदों का टिकट काटा जाएगा तो वही यह भी निर्णय लिया गया कि पिछले विधानसभा चुनाव में हारे हुए प्रत्याशियों पर दांव नहीं लगाया जाएगा। इस फैसले से कई प्रत्याशियों के सपने चकनाचूर हो गए, इनमें पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल का भी नाम लिया जा सकता है ।भीतर सूत्रों के अनुसार इसके बाद ही पुराने प्रतिद्वंदी पूर्व अध्यक्ष और पूर्व मंत्री के बीच गुप्त समझौता हुआ। जिसमें यह फैसला लिया गया कि अगर आर एस एस के किसी प्रत्याशी को टिकट मिलता है तो क्षेत्र में एक नया कोण तैयार हो जाएगा। इसलिए ऐसे किसी नाम को आगे बढ़ाया जाए जो उनके साथ तालमेल बना कर चले और खुद की अपनी अलग लाइन ना तैयार करें । ऐसे में पुराने संगठन के कार्यकर्ता और वर्तमान में बिल्कुल लूप लाइन में चल रहे अरुण साव् के नाम पर फैसला हुआ। अरुण साव् आज भले ही चर्चित चेहरा ना हो लेकिन एक समय वे सक्रिय रूप से राजनीति का हिस्सा थे। 1996 से लेकर 2005 तक भारतीय जनता युवा मोर्चा में मंडल अध्यक्ष, जिला महामंत्री ,जिला उपाध्यक्ष, प्रदेश महामंत्री और प्रदेश उपाध्यक्ष तक की जिम्मेदारी वे संभाल चुके हैं।

लेकिन साल 2006 से बिलासपुर की राजनीति पूरी तरह अमर अग्रवाल के इर्द-गिर्द घूमने लगी और उसी दौर में अरुण साव राजनीति से दूर वकालत में व्यस्त हो गए। 2006 से वे अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के विभिन्न पदों पर भी रहे हैं। वर्तमान में बापजी पार्क रिंग रोड 2 में निवास करने वाले अरुण स्व वकालत के पेशे में है और साहू समाज के लिए समर्पित है। बिलासपुर लोकसभा सीट में साहू समाज के वोटर की संख्या निर्णायक है, इसलिए इस वोट बैंक के ध्रुवीकरण के मकसद से अरुण साव् पर दांव खेला गया। इसे मात्र संजोग नहीं कह सकते की बिलासपुर क्षेत्र में भाजपा ने लगातार लोकसभा प्रत्याशी मुंगेली से ही दिया है। लंबे समय तक पुन्नूलाल मोहले लोकसभा चुनाव लड़ते रहे। फिर यह मौका लखनलाल साहू को मिला और अब मुंगेली क्षेत्र के ही अरुण साव्को यह अवसर मिला है। भीतर खाने से यह खबर आ रही है कि अरुण साव् के पीछे असली चेहरा अब भी पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल का ही होगा ।उन्हें अमर अग्रवाल के साथ धरमलाल कौशिक का भी समर्थन हासिल है। एक तरफ जहां कांग्रेस प्रत्याशी अटल श्रीवास्तव के लिए यह माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अपनी पूरी ताकत झोंकेंगे तो वही अरुण साव के लिए भी कहा जा सकता है कि उनके लिए अमर अग्रवाल और धरम लाल कौशिक दमखम लगाएंगे ।यानी मुकाबला बेहद दिलचस्प होने वाला है। इस बात की पुष्टि उस वक्त भी हो गई जब प्रत्याशियों के नाम के ऐलान के बाद अरुण साव् पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल से मिलने उनके बंगले पहुंच गए। अमर अग्रवाल ने उन्हें बधाई देते हुए जीत का आशीर्वाद भी दिया। फिलहाल जो स्थिति बन रही है उसमें मुकाबला कांग्रेस के अटल श्रीवास्तव के साथ भाजपा के अरुण साव् का है । लेकिन तस्वीर का अभी तीसरा कौण बाकी है। सबको प्रतीक्षा छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस के प्रत्याशी की है। अगर वह ठाकुर धर्मजीत सिंह हुए तो फिर मुकाबला कांटे का बन सकता है। बिलासपुर लोकसभा सीट कई दिग्गजों के लिए नाक की लड़ाई बन चुकी है। अटल श्रीवास्तव के पीछे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल है तो वहीं अरुण साव् के पीछे अमर अग्रवाल और धर्म लाल कौशिक । इसी तरह अगर ठाकुर धर्मजीत सिंह मैदान में होते हैं तो फिर उनके पीछे अजीत जोगी की साख होगी। इस घोषणा के साथ ही तरह तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। एक वर्ग का मानना है कि अनजान से अरुण साव् के भाजपा प्रत्याशी बनने से अटल श्रीवास्तव की लड़ाई आसान हो गई है तो वहीं दूसरे वर्ग का मानना है कि अरुण साव कम से कम एक लाख वोट से जीत दर्ज करेंगे। वहीं जानकार बताते हैं कि अगर मैदान में धर्मजीत सिंह उतरते हैं तो फिर दोनों दलों को नुकसान होगा। कोटा लोरमी और मुंगेली क्षेत्र में दोनों पार्टियों के वोट धर्मजीत सिंह को जा सकते हैं। मस्तूरी क्षेत्र में भी जोगी कांग्रेस का दबदबा है। अब गेंद अजीत जोगी के पाले में है। उनके प्रत्याशी घोषित करने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ हो जायेगी।
