मुंगेली

ठीक नहीं हो रही मुंगेली जिला अस्पताल की बीमारी, फिर कैसे हो मरीजों का इलाज, 10 दिनों से बंद ऑपरेशन थिएटर

आकाश दत्त मिश्रा

दिया तले अंधेरा शायद इसी को कहते हैं । मुंगेली जिले का प्रभार स्वयं स्वास्थ्य मंत्री के पास है और जिले में स्वास्थ्य व्यवस्थाएं दम तोड़ रही है। लोगों की उम्मीदें जिला अस्पताल पर टिकी है लेकिन जिला अस्पताल लोगों का इलाज तब कर पाएगा जब उसकी खुद की सेहत सुधरी हो। यहां शासन बदलने के बाद भी जिला अस्पताल का मर्ज ठीक होता नहीं दिख रहा ।खामियां कहां से गिनाए और कहां अंत करें यह ओर – छोर किसी की पकड़ में ही नहीं आ रहा। यहां व्यवस्थाएं इस कदर अस्त-व्यस्त है कि दोनों सिरों को जोड़ना तक मुमकिन नहीं हो पा रहा। यहां का ऑपरेशन थिएटर पिछले 10 दिनों से बंद पड़ा है ।जिले का प्रमुख अस्पताल होने की वजह से रोजाना बड़ी संख्या में ऐसे मरीज भी अस्पताल में पहुंच रहे हैं जिन्हें सर्जरी की आवश्यकता है, लेकिन ऑपरेशन थिएटर के बंद होने से उन्हें या तो बिलासपुर भेजना पड़ रहा है या फिर ऐसी मरीजों को निजी चिकित्सकों के पास महंगा इलाज कराने को विवश किया जा रहा है।

कुल मिलाकर मुंगेली का जिला अस्पताल रिफर हॉस्पिटल बनकर रह गया है, जहां से मरीजों को बिलासपुर और अन्य बड़े शहरों के लिए रिफर करने का काम डॉक्टर कर रहे हैं। हर रोज यहां मुंगेली के अलावा ग्रामीण अंचलों से बड़ी संख्या में मरीज और उनके परिजन इलाज की आस लिए पहुंचते हैं लेकिन उन्हें निराश होना पड़ रहा है। खासकर इन दिनों उन मरीजों को अधिक दिक्कत हो रही है जिन्हें ऑपरेशन की आवश्यकता है। उनके पास बिलासपुर जाने या फिर निजी अस्पताल में इलाज कराने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। किसी भी मरीज की आपात स्थिति में परिजन घर-बार बेच कर भी उसके इलाज को प्राथमिकता देते हैं और ऐसा ही करना पड़ रहा है क्योंकि अधिकांश गरीब तबके के मरीज स्मार्ट कार्ड और आयुष्मान कार्ड के भरोसे अपना उपचार कराने जिला अस्पताल पहुंचते हैं लेकिन यहां ऑपरेशन थिएटर बंद होने की वजह से उन्हें निजी अस्पताल जाने को मजबूर किया जाता है। यहां व्यवस्थाएं इस कदर चरमराई हुई है कि लोगों का इस अस्पताल पर भरोसा डिगने लगा है।

पिछले दिनों मुंगेली के जिला अस्पताल की छवि उस वक्त भी दागदार हो गई थी जब स्ट्रेचर ना मिलने की स्थिति में मरीज को कंधे पर लादकर इधर से उधर ले जाने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी। बताया जा रहा है कि यहां केवल कैजुअल्टी में ही स्ट्रेचर उपलब्ध कराया जाता है। अन्य वार्डों में मरीज को परिजन इसी तरह ले जाने को विवश है । इस मामले में जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉक्टर आरके भूआर्य अव्यवस्था और खामियों से साफ इंकार कर रहे हैं लेकिन उन्होंने यह स्वीकार जरूर किया कि पिछले 10 दिनों से ऑपरेशन थिएटर खराब है और इसकी जानकारी कलेक्टर सर्वेश्वर भूरे को दिए जाने का हवाला भी उन्होंने दिया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में यहां मरम्मत कार्य जारी है। बताया जा रहा है कि फिलहाल जिला अस्पताल में 18 डॉक्टर तैनात है। हैरानी इस बात की है कि फिर भी क्यों मरीजों को ढंग का इलाज हासिल नहीं हो पाता। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री जब मुंगेली आए थे तो उन्हें जनसभा में लोगों ने जिला अस्पताल की खामियां गिनाई थी और उन्होंने इसे दुरुस्त करने का वायदा भी किया था, लेकिन हालात जस के तस हैं। व्यवस्थाएं कब पटरी पर लौटेगी लोग इसी आस में बैठे हैं लेकिन मौजूदा भर्राशाही से लगता नहीं कि जल्द ही यहां हालात बेहतर हो पाएंगे।

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