अवर्गीकृत

अगर आप भी मुंह में तंबाकू या गुटखा दबाए रखते हैं तो फिर यह खबर आपके ही लिए है

डेस्क

करीब 11 साल पहले पथरिया क्षेत्र के सोढ़ी मराठी निवासी मन्नूलाल कोसले एक सड़क हादसे में घायल हो गये। जिनसे उनके जबड़े में गहरी चोट आई। इसका इलाज कराते वे कई अस्पतालों से गुजरते हुए रायपुर पहुंचे जहां एक डॉक्टर के सहायक ने वायर से उनके जबड़े को फिक्स कर दिया । जब तय वक्त पर वायर निकाला गया तो यह पाया गया कि उनके दोनों जबड़े फिक्स हो चुके हैं और उसके बाद से उनका मुंह खोलना लगभग बंद हो गया । इसके बाद 11 सालों तक मन्नूलाल लिक्विड डायट पर निर्भर रहे। सामान्य भोजन करने लायक भी मुंह नहीं खुलता था। वो कुछ भी खा पी नहीं पाते थे। जिंदगी की सारी उम्मीदें खत्म हो चुकी थी कि तभी संजोग से वे बिलासपुर अपोलो पहुंचे और यहां उनकी इस जटिल अवस्था को देखकर डॉक्टर विनय खरसन और डॉक्टर प्रबुद्ध सेन की टीम ने एक बेहद कठिन और जटिल ऑपरेशन को अंजाम देने का निर्णय लिया।

चूँकि मन्नूलाल के दोनों जबड़े जकड़ चुके थे इसलिए जरूरी था कि एक साथ ही दोनों जबड़े का ऑपरेशन किया जाए। जबड़े का ऑपरेशन सामने और कान के पीछे करने की जरूरत होती है और इस दौरान फेशियल नर्व के डैमेज होने की भी पूरी आशंका रहती है। जटिलता यह भी है कि मरीज को बेहोश कर अपरेशन करने के दौरान यह पता भी नहीं चल पाता कि मरीज का कोई नर्व डैमेज हुआ है या नहीं। यह मरीज के होश में आने के बाद ही पता चल पाता है लेकिन फिर भी अपोलो बिलासपुर के दोनों चिकित्सकों ने अपनी काबिलियत दर्शाते हुए मन्नूलाल का सफल ऑपरेशन किया और 11 वर्ष बाद मन्नूलाल ने लिक्विड डायट छोड़कर सामान्य भोजन किया। एक सामान्य भोजन आम आदमी के लिए बेहद साधारण सी बात होगी लेकिन 11 साल तक इससे वंचित रहने वाले मन्नूलाल कोसले ही जानते हैं कि इसके क्या मायने होते हैं । सोमवार को बिलासपुर अपोलो में मन्नूलाल कोसले के असाधारण केस स्टडी के लिए बिलासपुर अपोलो में पत्रकारों को आमंत्रित किया गया। जिनके सामने सीईओ डॉक्टर सजल सेन ने अपोलो की प्रतिबद्धता और इस बीमारी की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मुंह का पूरा ना खुलना ट्रीसमस कहलाती है और भारत में लाखों की संख्या में इससे पीड़ित मरीज है। हैरान करने वाली बात यह है कि तंबाकू और गुटखा सेवन की वजह से इस बीमारी की शिकार महिलाओं की तादाद तेजी से बढ़ती जा रही है। पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं की संख्या तंबाकू और गुटखा सेवन की वजह से बड़ी है। वैसे तंबाकू और गुटखा सेवन के अलावा जबड़े के फैक्चर, अकल दाढ़ निकलने के दौरान और कैंसर से भी यह बीमारी मुमकिन है। डॉक्टर सजल सेन ने बताया कि तंबाकू ,गुटखा या पान खाना उतना खतरनाक नहीं है जितना कि उसे मुंह में दबाए रखना है। उन्होंने कहा कि गुटका या पान ही क्यों , कोई भी गुणकारी चीज भी अगर कोई अपने मुंह में लंबे वक्त तक दबाए रखें तो इससे म्यूकोसा के सख्त होने की पूरी संभावना होती है और यह अल्सर आगे चलकर ट्रीसमस में बदल सकता है। खासकर इसके शिकार वे लोग होते हैं जो सोते समय मुंह में कुछ दबा कर सोते हैं । अधिकांश तंबाकू और गुटखा का सेवन करने वाले लोग रात में भी मुंह में तंबाकू व गुटखा दबा कर सो जाते हैं और यही सबसे खतरनाक होता है। सुपारी, कत्था ,पान के घातक होने की पुख्ता जानकारी तो मेडिकल साइंस के पास भी नहीं है, लेकिन इतना तो पक्का है कि अगर लंबे वक्त तक इन्हें मुंह में दबाए रखा जाएगा, खासकर रात में सोते वक्त, तो फिर ट्रीसमस और म्युकोसा के साथ ओरल अल्सर होने की पूरी आशंका बनी रहेगी। बिलासपुर अपोलो के डेंटल एंड फेशियल सर्जन डॉक्टर विनय खरसन ने कहा कि भारत में तो हजारों साल से पान का सेवन किया जा रहा है लेकिन इसके साथ तंबाकू और सुपारी का इस्तेमाल खतरनाक होता है। साथ ही इन्हें लंबे वक्त तक मुंह में दबाए रखने से भी बचने की आवश्यकता है

लेकिन फिर भी अगर किसी को मुंह खोलने में परेशानी हो रही है तो वह बिलासपुर अपोलो में अपना इलाज करा सकते हैं। बिलासपुर अपोलो में भी हर महीने इसके लिए एक खास व्यवस्था की गयी है। जब ट्रीसमस के शिकार मरीजों की जांच और इलाज बेहद वाजिब फीस में की जाती है । सीईओ अपोलो डॉक्टर सजल सेन ने बताया कि एक सामान्य मनुष्य का मुंह 30 मिलीमीटर खुलना चाहिए यानी आसानी से तीन उंगलियां मुंह में प्रवेश कर जानी चाहिए। अगर ऐसा नहीं है तो फिर मरीज को किसी अच्छे डेंटिस्ट को दिखाने की आवश्यकता है। इस दौरान मौजूद मन्नूलाल कोसले ने बताया कि वे पिछले 11 सालो से बेहद कष्टकारी जिंदगी जी रहे थे लेकिन 3 महीने पहले वे अपोलो बिलासपुर पहुंचे और उनकी जिंदगी ही बदल गई। एक अनाड़ी मेडिकल स्टाफ की एक गलती ने उनकी जिंदगी तबाह कर दी थी लेकिन बिलासपुर अपोलो के दंत चिकित्सक डॉ विनय खरसन और डॉक्टर प्रबुद्ध सेन ने उन्हें नई जिंदगी दी है। इसी के साथ उन सभी मरीजों के लिए भी उम्मीद की एक किरण नजर आने लगी है जो ट्रीसमस के शिकार हैं। उनका भी इलाज अब बिलासपुर अपोलो में मुमकिन है। डॉ विनय खरसन और डॉक्टर प्रबुद्ध सेन ने मन्नू लाल का जो ऑपरेशन किया वैसे ऑपरेशन अब तक देशभर में गिनती के ही हुए हैं इस लिहाज से यह बिलासपुर अपोलो के लिए बड़ी उपलब्धि है।

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