
डेस्क

बुधवार को भाटापारा रेलवे स्टेशन के सभी स्टॉल बंद रहे। 1 दिन पहले आरपीएफ एसआई द्वारा दो वेंडरों से मारपीट की गयी थी। दरअसल मंगलवार को आरपीएफ भाटापारा के सब इंस्पेक्टर बद्रीप्रसाद डड़सेना ने निरीक्षण के दौरान ट्रेन में अवैध रूप से सामान बेचते दुबे कैंटीन के राम दुबे और कुलदीप सिंह को पकड़ा। जिन्हें आरपीएफ थाने लाया गया और उनकी जमकर पिटाई की गई। बताया जा रहा है कि मंगलवार को दोपहर 1:00 बजे उन्हें आरपीएफ थाने ले जाया गया जहां नियमों को ताक में रखकर सब इंस्पेक्टर बद्री प्रसाद डड़सेना ने राम दुबे और कुलदीप सिंह की खूब पिटाई की। जिससे उन्हें गहरी चोटें आई।

वेंडर के साथ की गई मारपीट से स्टेशन परिसर में मौजूद सभी स्टॉल के वेंडर खासे नाराज हो गए और उन्होंने जीआरपी थाने में आरपीएफ एसआई बद्री प्रसाद डड़सेना के खिलाफ एफ आई आर दर्ज कराया है। इधर मामले में घायल दोनों अवैध वेंडर राम दुबे और कुलदीप सिंह का मुलाहिजा बुधवार को किया गया जिसमें चोट के निशान की पुष्टि हुई है। सब इंस्पेक्टर बद्री प्रसाद डड़सेना के खिलाफ शिकायत किए जाने से नाराज आरपीएफ के जवानों ने बुधवार को रेलवे स्टेशन में कहर बरपाया। सभी वेंडरों से मारपीट करते हुए जबरन उनके दुकान बंद कराया जाए। बुधवार को भाटापारा रेलवे स्टेशन पर जंगलराज नजर आया ।आरपीएफ के सर पर मानो खून सवार था। अपने एक मामूली सब इंस्पेक्टर के खिलाफ एफ आई आर दर्ज होने का बदला उन्होंने जिस बर्बरता पूर्ण ढंग से लिया उससे सभी हैरान रह गए। लगता है आरपीएफ पर रेल अधिकारियों की एक नहीं चल रही और वे किसी अपराधी गैंग की तरह रेलवे स्टेशन पर बर्ताव कर रहे हैं ।
इधर आरपीएफ सब इंस्पेक्टर बद्री प्रसाद डड़सेना खुद को निर्दोष बता रहे हैं और उनका दावा है कि ट्रेन में अवैध रूप से सामान बेचने पर उन्होंने कार्यवाही की है, लेकिन वे शायद यह भूल जाते हैं कि उनका काम अवैध काम करने वालों को पकड़ कर कोर्ट में पेश करना है, ना कि जल्लाद बनकर खुद ही सजा देने का उन्हें अख्तियार है। वैसे रेलवे अपने कर्मचारी को बचाने की कोशिश कर रही है। लेकिन लामबंद हो चुके स्टॉल संचालक और वेंडर इस मामले को आसानी से भूलने को तैयार नहीं।