
रमेश राजपूत
बिलासपुर – कोटा क्षेत्र स्थित डॉ. सीवी रमन यूनिवर्सिटी से बी-फार्मा के छात्र रोहित कुमार के लापता होने के 12 दिन बीत जाने के बावजूद कोई ठोस सुराग नहीं मिल सका है। इस घटना ने विश्वविद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था और प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजन जहां गहरे सदमे और चिंता में हैं, वहीं पुलिस जांच अब तक दिशा विहीन नजर आ रही है। सोमवार को एनएसयूआई के छात्र नेता विश्वविद्यालय पहुंचे और प्रबंधन के साथ बैठक की। इस दौरान छात्र नेताओं ने सुरक्षा इंतजामों की पोल खोलते हुए कई चौंकाने वाले तथ्य सामने रखे। उन्होंने बताया कि इतने बड़े कैंपस में न तो पर्याप्त सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और न ही प्रवेश-निकास की कोई सख्त निगरानी व्यवस्था है। विजिटर रजिस्टर जैसी बुनियादी व्यवस्था भी प्रभावी रूप से संचालित नहीं हो रही है, जिससे कोई भी व्यक्ति आसानी से परिसर में प्रवेश कर सकता है।

सबसे चिंताजनक बात यह सामने आई कि पूरे कैंपस की सुरक्षा महज करीब आठ गार्डों के भरोसे चल रही है। ऐसे में हजारों छात्रों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जा रही है, यह बड़ा सवाल बन गया है। छात्र नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रबंधन ने सुरक्षा को कभी प्राथमिकता ही नहीं दी, जिसका परिणाम आज एक छात्र के लापता होने के रूप में सामने आया है।बैठक के दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन छात्र नेताओं और परिजनों के सवालों का संतोषजनक जवाब देने में पूरी तरह विफल रहा। इससे आक्रोशित एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने जमकर हंगामा किया और मामले में तत्काल ठोस कार्रवाई की मांग की। रोहित कुमार, जो बिहार के गया जिले का निवासी है, संदिग्ध परिस्थितियों में गायब हुआ है।

परिजनों का आरोप है कि यदि समय रहते उचित सुरक्षा इंतजाम किए गए होते, तो यह घटना टाली जा सकती थी या कम से कम अब तक कोई सुराग मिल जाता। 12 दिन बीत जाने के बाद भी छात्र का कोई पता नहीं चलना न सिर्फ पुलिस जांच पर सवाल उठाता है, बल्कि विश्वविद्यालय प्रशासन की घोर लापरवाही को भी उजागर करता है। परिजन बेटे की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं, जबकि प्रबंधन अब भी जिम्मेदारी से बचता नजर आ रहा है। यह घटना पूरे शिक्षा तंत्र के लिए एक गंभीर चेतावनी बनकर उभरी है।