
आकाश दत्त मिश्रा

मुंगेली जिला अस्पताल और विवादों का गहरा नाता रहा है। यहां उपचार कराने आने वाले मरीजो को हमेशा परेशानियों का सामना करना पड़ता है । जिस तरफ अस्पताल प्रबंधन के जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान ही नही जाता। आज जिला अस्पताल में फिर ऐसा ही वाकया देखने को मिला जिसके कारण गर्भवती महिलाएं जिला अस्पताल के मेन गेट पर तालाबंदी करने को मजबूर हो गयी। आपको बतां दें कि जिले के प्रभारी मंत्री ही स्वास्थ्य मंत्री भी है। उन्ही के प्रभार वाले जिले के अस्पतालों का ये हाल है जहाँ गर्भवती महिलाएं अस्पताल का मुख्यद्वार बन्द करने को मजबूर हो रही है,

छत्तीसगढ़ राज्य शासन द्वारा गर्भवती महिलाओं के लिए चलाई जाने वाली जच्चा बच्चा योजना मुंगेली जिले में दम तोड़ती नजर आ रही है जिसका ताजा मामला मुंगेली जिला अस्पताल में देखने को मिला । यहां सोनोग्राफी कराने आयी महिलाओं ने जिला अस्पताल के मुख्य द्वार पर तालाबंदी कर दी और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करने लगी। दरअसल गर्भवती महिलाएं जिला अस्पताल में सोनोग्राफी कराने पहुँची थी जहाँ उन्हें जानकारी मिली कि अस्पताल में सोनोग्राफी करने की सुविधा उपलब्ध नही है। उससे नाराज गर्भवती महिलाओं ने जिला अस्पताल के बाहर मेन गेट में तालाबंदी कर जिला अस्पताल मुरदबाद के नारे लगाने लगी और इलाज के लिए आये मरीजो को अस्पताल के अंदर नही जाने दिया। महिलाओ का आरोप है कि जिला अस्पताल में सोनोग्राफी के लिए उन्हें कई बार चक्कर लगवाए है जिससे परेशान गर्भवती महिलाओं ने अस्पताल प्रबंधक के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और मुख्य द्वार में बैठकर प्रदर्शन करने लगी।

सिविल सर्जन तालाबंदी की जानकारी होने के बाद भी प्रदर्शन कर रही महिलाओं की समस्या सुनने नही पहुँचे। घटना की जानकारी पुलिस को लगते ही वह मौके पर पहुची और महिलाओं को समझाइश देकर बन्द रास्ते को खुलवाया गया। जिसके बाद इलाज कराने पहुचे मरीजो को अंदर जाने मिला। वहीं इस मामले में जिला अस्पताल सिविल सर्जन भुआर्य का कहना है कि अस्पताल में सोनोग्राफी करने की सुविधा नही है यहाँ कोई रेडियोलॉजिस्ट नही है जिसके कारण यहाँ सोनोग्राफी नही हो पाती।

मुंगेली जिले का इतना बड़ा अस्पताल जहाँ रोजाना सैकड़ो मरीज अपना उपचार कराने पहुँचते है वहां मरीजो को उपचार कराने के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध नही हो पाते और यहाँ के जिम्मेदार अधिकारी खुशनुमा चेहरा लेकर बड़े गर्व से अपने अस्पताल में संसाधनों की कमियां गिनाते दिखते है। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री के प्रभारी जिले में के अस्पताल का ये हाल है तो प्रदेश के बाकी अस्पतालों के क्या हाल होगा ये सोचने वाली बात है। वैसे इस अस्पताल में सोनोग्राफी ही एकमात्र समस्या नहीं है। यहां ऑपरेशन थिएटर भी लंबे वक्त से बंद है । बताया जा रहा है कि ऑपरेशन थिएटर के ठीक ऊपर शौचालय बना दिया गया है, जिस कारण से ऑपरेशन थिएटर की दीवारें सीपेज ग्रस्त हो चुकी है और इस कारण से इस संक्रमित ऑपरेशन थिएटर में किसी का ऑपरेशन करना जानलेवा साबित हो सकता है। कलेक्टर ने भी निरीक्षण में इस शिकायत को सही पाया। जिसके बाद नए सिरे से यहां निर्माण जारी है ।जब अस्पताल खुद बीमार हो तो फिर उससे इलाज की उम्मीद कैसे की जाए।
