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सरकारी नौकरी ,खासकर रेलवे की नौकरी के प्रति बेरोजगारों में इस हद तक जुनून है कि वे रेलवे की नौकरी हासिल करने के लिए किसी भी हद तक गुजर सकते हैं। ऐसा ही कर दो युवकों ने अपना कैरियर बर्बाद कर लिया। इटावा उत्तर प्रदेश में रहने वाले सन्नी यादव ने साल 2018 में आरपीएफ हेड कांस्टेबल पद के लिए आवेदन जमा किया था। अलग-अलग समय में बिलासपुर में आयोजित लिखित परीक्षा और फिजिकल टेस्ट में वह पास हो चुका था। सन्नी यादव की आंख में कुछ समस्या थी इसलिए उसे पता था कि वह मेडिकल में अनफिट करार दिया जा सकता है। लेकिन रेलवे की नौकरी के प्रति उसकी चाहत इस कदर थी उसने नौकरी हासिल करने के लिए फर्जीवाड़े का सहारा लेने का फैसला लिया। इसमें उसने अपने ही दोस्त विनय यादव को शामिल कर लिया। फर्जी तरीके से अपने सभी दस्तावेज विनय यादव के नाम से स्कैन कर तैयार किए और विनय यादव मेडिकल टेस्ट के लिए बिलासपुर पहुंचा। हैरानी इस बात की है कि फर्जी दस्तावेजों के सहारे सन्नी यादव के नाम से विनय यादव ने मेडिकल टेस्ट पास भी कर लिया और आखरी बार दस्तावेजों की जांच के लिए जब वह एक दिन पहले आरआरबी बिलासपुर के कार्यालय पहुंचा तो जांच के दौरान अधिकारियों को उस पर संदेह हुआ। संदेह निराकरण के लिए उसने विनय की हैंडराइटिंग, फोटो और सिग्नेचर का मिलान किया तो सभी कुछ फर्जी पाए गए ।

बावजूद इसके फिर भी विनय यादव खुद को सन्नी यादव बताता रहा। हार कर रेलवे अधिकारियों ने उसे आरपीएफ के हवाले कर दिया आरपीएफ के आगे भी विनय खुद को सन्नी यादव बताने की रट लगाए रहा। जब उस पर दबाव बनाने की कोशिश की गई तो उसने खुदकुशी करने की धमकी दी जिससे आरपीएफ के अधिकारी भी डर गए और उसे तोरवा पुलिस के हवाले कर दिया गया। पुलिस के आगे दोनों की एक न चली और पुलिस पूछताछ में विनय यादव के साथ सन्नी यादव भी टूट गया और उन्होंने पूरी कहानी पुलिस के आगे उगल दी। पुलिस ने दोनों युवकों के खिलाफ धारा 419, 420 के साथ अन्य धाराओं के तहत फर्जीवाड़ा का गंभीर मामला पंजीबद्ध किया है। पुलिस का भी मानना है कि रेलवे की नौकरी की लालच में सन्नी यादव और विनय यादव ने अपना अच्छा भला कैरियर बर्बाद कर लिया। उनके साथ एक और युवक मौजूद था लेकिन मामले में उसकी संलिप्तता नहीं पाई गई इसलिए उसे छोड़ दिया गया।
