
डेस्क
नाम का प्रभाव आचरण पर भी हो ऐसा हमेशा जरूरी नहीं । जरूरी नहीं कि नाम अगर गोवर्धन हो तो वह गाय का संवर्धन करें ही।जरूरी यह भी नहीं कि अगर नाम बुधराम हो तो उसकी बुद्धि प्रखर हो। ऐसे ही बुधराम और गोवर्धन ने रतनपुर जैसी धार्मिक नगरी में जो अधार्मिक कुकृत्य किया। उसकी हर तरफ निंदा हो रही है। पेशे से किसान गोवर्धन पाटले और बुधराम पाटले को शिकायत थी कि उनके खेत में मवेशी घुसकर फसलों को बर्बाद कर देते हैं लेकिन मवेशियों को रोकने के लिए उन्होंने जो पैंतरे आजमाएं उससे कोई भी हैरान रह जाए। हिंदू मान्यताओं में गाय को पूजनीय और मां का दर्जा दिया जाता है , लेकिन इसी गौ माता के साथ जिस तरह का बर्बर और क्रूर कृत इन दोनों ने किया है उससे पूरे रतनपुर में आक्रोश देखा जा रहा है। रतनपुर के भैरव बाबा मंदिर के पास तीन गायों की मौत हो गयी। वहीं छह गाय गंभीर रूप से घायल मिले।
जिसकी सूचना वार्ड नंबर 3 के पार्षद को दी गई थी। जब घटनास्थल पर पहुंचे तो पता चला कि वहां इन दो जालिम लोगों के द्वारा गाय के पैर में रस्सी और तार बांध दिया गया था जिसके कारण गाय बेबस होकर एक ही स्थान पर भूखी प्यासी पड़ी रही और उनके पैर जगह-जगह से कट गए। भूखे प्यासे गायों की मौत हो गई। वहीं कई गाय मरणासन्न स्थिति में जा पहुंची है। 62 वर्षीय बुजुर्ग गोवर्धन पाटले और 60 वर्षीय बुधराम पाटले की बुद्धि शायद घास चरने गई थी जो उन्होंने अपने खेत की फसल बचाने के लिए गायों की क्रूर तरीके से हत्या कर दी। अगर गाय उनकी फसलों को बर्बाद कर भी रही थी तो फिर उन्हें इसकी शिकायत प्रशासन से करनी चाहिए थी। अगर गायों को बांधना ही था तो उनके गले में रस्सी बांधकर उन्हें खूटे से बांधा जा सकता था और उन्हें चारा पानी नियमित देते तो उनकी मौत भी नहीं होती। इन दोनों की वजह से तीन गायों की मौत हो चुकी है और छह की हालत गंभीर है जिनकी मौत भी तय है ।पुलिस में जब इन दोनों जालिम किसानों की रिपोर्ट दर्ज कराई गई तो पुलिस ने भी पशुओं के प्रति क्रूरता अधिनियम की धारा 11 आईपीसी 429 के तहत कार्यवाही कर दोनों बुजुर्गों को गिरफ्तार कर लिया । इनकी उम्र इतनी है कि उनसे बुद्धिमानी की उम्मीद की जा सकती है लेकिन लालच और बर्बरता से प्रभावित होकर इन दोनों ने जो कुछ किया उससे पूरा रतनपुर उद्वेलित है।