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लोकसभा चुनाव में राफेल ही होगा कांग्रेस का मुद्दा, राफेल फाइल चोरी मामले में एफ आई आर दर्ज कराने पहुंचे कांग्रेस नेता

एयर स्ट्राइक के बाद उम्मीद कम है कि राफेल और उससे संबंधित फाइलों की चोरी का मुद्दा आम मतदाताओं में खास प्रभाव उत्पन्न करेगा। इसलिए कांग्रेस को अपनी रणनीति में बदलाव करने की जरूरत है

बिलासपुर प्रवीर भट्टाचार्य

इतना तो तय है, राफेल विमान की खरीदी से जुड़े फाइलो के चोरी होने के मामले को इस लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रमुख हथियार के तौर पर इस्तेमाल करेगी। पिछले कुछ महीनों से लगातार राहुल गांधी राफेल विमान खरीदी को मुद्दा बनाए हुए हैं, वहीं मामले के सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान राफेल से संबंधित फाइलों की चोरी होने की जानकारी से कांग्रेस को बड़ा मुद्दा मिल गया ।लगातार कांग्रेस इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठा रही है तो वही बिलासपुर में भी राफेल संबंधी शिकायत दर्ज कराने कांग्रेसी मंगलवार को सिविल लाइन थाने पहुंच गए। राफेल चोरी मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ एफ आई आर दर्ज करने की मांग लेकर एनएसयूआई और कांग्रेस के नेता मंगलवार को सिविल लाइन थाने पहुंचे । एनएसयूआई प्रदेश उपाध्यक्ष आदिल आलम, विकास सिंह वसीम खान जैसे कांग्रेसी नेताओं ने इसे मुद्दा बनाते हुए अपना आवेदन दिया और एफ आई आर दर्ज करने की मांग की। असल में 16 मार्च की परिवर्तन रैली में भी सभी कांग्रेसी नेताओं ने एक सुर में राफेल विमान सौदा को अगले चुनाव में मुद्दा बनाने पर सहमति दी थी। मंगलवार की कार्यवाही को उसी से जोड़कर देखा जा रहा है । राफेल विमान फाइल चोरी मामले को जनता के बीच लाकर केंद्र के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश कांग्रेसी कर रहे हैं ,जबकि सरकार साफ कर चुकी है कि राफेल के दस्तावेज चोरी नहीं हुए हैं। अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने अदालत में साफ किया है कि राफेल की सीक्रेट फाइल चोरी नहीं हुई है बल्कि उसकी फोटो कॉपी की गई है। उन्होंने बताया कि राफेल दस्तावेज रक्षा मंत्रालय से नहीं चुराई गए है। उनकी बात का मतलब यह था कि याचिकाकर्ताओं ने आवेदन में उन मूल दस्तावेजो की फोटो कॉपीओ का इस्तेमाल किया है जिसे सरकार ने गोपनीय माना है। सुप्रीम कोर्ट में के के गोपाल की इस टिप्पणी ने राजनीतिक भूचाल ला दिया था। राहुल गांधी, संवेदनशील कागजात के चोरी होने पर सरकार पर निशाना साधने लगे। जबकि सवाल यह उठने चाहिए कि सरकार के सीक्रेट फाइल की फोटोकॉपी द हिंदू अखबार को कैसे मिल गए, जिसने इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर आलेख प्रकाशित किया। द हिंदू प्रकाशन समूह के चेयरमैन एन राम ने तो यहां तक कह दिया कि राफेल सौदे से जुड़े दस्तावेज उन्हें किसने मुहैया कराए हैं, उन गुप्त सूत्रों के बारे में कोई भी जानकारी नहीं देंगे। अदालत में पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिंहा, अरुण शौरी और अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने संयुक्त रूप से याचिका दायर की थी । सवाल उन पर भी उठने चाहिए, कि उन्हें यह गोपनीय दस्तावेज कैसे मिले। यानी अगर कांग्रेसी राफेल से संबंधित फाइलों के चोरी होने का मुद्दा उठाएंगे तो कहीं ना कहीं सवाल उनके करीबियों पर भी उठेगा और भारतीय जनता पार्टी को भी उन पर हमला करने का अवसर मिलेगा। एयर स्ट्राइक के बाद उम्मीद कम है कि राफेल और उससे संबंधित फाइलों की चोरी का मुद्दा आम मतदाताओं में खास प्रभाव उत्पन्न करेगा। इसलिए कांग्रेस को अपनी रणनीति में बदलाव करने की जरूरत है।

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