छत्तीसगढ़बिलासपुर

डीएवी स्कूल में बेतहाशा फीस वृद्धि, हंगामे के बाद लिया फैसला वापस

शिक्षा सत्र के मध्य में फैसला सरासर अनुचित है क्योंकि अधिकांश छात्र छात्राओं के अभिभावकों ने पूर्व में ही वर्ष भर की फीस जमा कर दी है

बिलासपुर प्रवीर भट्टाचार्य

जब से शिक्षा के केंद्रों का बाजारीकरण हुआ है तब से स्टूडेंट और पैरंट्स ग्राहक बन गए हैं। जिनसे एन केन प्रकारेण मुनाफा कमाने की होड़ स्कूलों के बीच लगी हुई है ।स्कूल कभी भी कोई भी तुगलकी फरमान जारी कर देते हैं। इससे छात्रों के भविष्य पर क्या विपरीत असर पड़ता है इसका भी ख्याल नहीं रखा जाता। हैरानी इस बात की है कि इस भेड़ चाल में वो स्कूल भी शामिल हो चुके हैं जिन पर लोगों का भरोसा हुआ करता था। ऐसा ही कुछ राजकिशोर नगर के पास स्थित डीएवी पब्लिक स्कूल में भी हुआ ,जहां शाला प्रबंधन ने कक्षा वार छात्रों की फीस में ढाई हजार रुपए से लेकर 4000 रुपए की वृद्धि का फैसला लिया। शिक्षा सत्र के मध्य में फैसला सरासर अनुचित है क्योंकि अधिकांश छात्र छात्राओं के अभिभावकों ने पूर्व में ही वर्ष भर की फीस जमा कर दी है। ऐसे में नए सिरे से फीस के आकलन से उनकी समस्या बढ़नी लाजमी है। शाला प्रबंधन यह तर्क दे रहा है की फीस वृद्धि का फैसला दिल्ली से आया है। इस तुगलकी फरमान के बाद बुधवार को छात्र संगठन एनएसयूआई के प्रतिनिधियों ने स्कूल पहुंचकर अपना विरोध दर्ज कराया ।छात्रों का दावा था कि जब प्रशासन से फीस वृद्धि को लेकर कोई आदेश ही नहीं आया है तो फिर स्कूल प्रबंधन किसके इशारे पर जबरिया फीस में बढ़ोतरी कर रहा है। एनएसयूआई के हंगामे के बाद स्कूल के प्राचार्य ने अपने कदम खींच लिए। बैकफुट पर नजर आ रहे प्राचार्य ने एनएसयूआई के छात्र नेताओं के दबाव में फीस बढ़ोतरी का तुगलकी फैसला वापस ले लिया लेकिन अभिभावक और एनएसयूआई के सदस्य इस मामले की उच्चस्तरीय जांच पड़ताल की मांग कर रहे हैं ताकि यह पता चले कि इस फैसले के पीछे किसका दिमाग काम कर रहा है । यह जांच इसलिए भी जरूरी है ताकि शहर के अन्य स्कूल इसकी आड़ लेकर अपने स्कूल में फीस बढ़ोतरी ना कर दे। बुधवार को यह स्पष्ट हो गया कि जिस आदेश का हवाला देकर प्राचार्य भारी भरकम फीस बढ़ोतरी कर रहे थे उसकी हैसियत क्या थी। जिसे कुछ छात्र नेताओं के दबाव में वापस लिया जा सकता है उस फीस बढ़ोतरी के फैसले की सत्यता पर किसी को भी भरोसा नहीं होगा । शायद स्थानीय प्रबंधन का शातिर दिमाग इसके पीछे काम कर रहा है क्योंकि अगर दिल्ली से ऐसा कोई फैसला आता तो उसे इतनी सहजता के साथ बदलना प्राचार्य के क्षमता से भी बाहर का अधिकार था। खैर इसी वजह से बुधवार को डीएवी स्कूल में खूब हंगामा हुआ लेकिन सुकून इस बात का है की फौरी तौर पर स्कूल प्रबंधन ने इस फैसले को वापस लिया है और फिलहाल छात्रों को फीस के रूप में कोई अतिरिक्त राशि जमा नहीं करनी पड़ेगी।

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