
भुवनेश्वर बंजारे
रायगढ़ – पुलिस ने बाइक चोरी कर फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से बाजार में बिक्री करने वाले एक बड़े संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 25 चोरी की मोटरसाइकिलें, एक एप्पल लैपटॉप और एक कलर प्रिंटर जब्त किया है। जब्त सामग्री की कुल अनुमानित कीमत लगभग 16 लाख रुपये बताई जा रही है। इस प्रकरण में संगठित अपराध से जुड़ी धारा 112 सहित विभिन्न गंभीर धाराएं जोड़ी गई हैं। पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देश पर संपत्ति संबंधी अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए जिले के सभी थाना प्रभारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए थे।

इसी क्रम में थाना पूंजीपथरा एवं साइबर थाना की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए दो चोरी की मोटरसाइकिल के साथ संदिग्ध मुकेश प्रधान निवासी ग्राम रूडुकेला को पकड़ा। पूछताछ में उसने बताया कि उक्त बाइक उसने ऑटो डीलर में कार्यरत पुरूषोत्तम प्रधान से खरीदी थी। आगे की जांच में खुलासा हुआ कि पुरूषोत्तम प्रधान, श्याम ऑटो डीलर लैलूंगा के मैनेजर चंद्र कुमार यादव के साथ मिलकर बाइक चोर मुकेश चौहान से चोरी की मोटरसाइकिलें खरीदता था। इसके बाद आरटीओ में पूर्व में कंप्यूटर ऑपरेटर रह चुके अजय पटेल और संजय अगरिया के माध्यम से लोक सेवा केंद्र से फर्जी आरसी एवं अन्य दस्तावेज तैयार कर चोरी की बाइकों को वैध बताकर बाजार में बेच दिया जाता था। मुख्य आरोपी मुकेश चौहान ने पुलिस पूछताछ में स्वीकार किया कि उसने अपने साथी विकेश दास महंत (जो वर्तमान में जेल में निरुद्ध है) के साथ पूंजीपथरा, तमनार, घरघोड़ा और रायगढ़ क्षेत्र से करीब 25 मोटरसाइकिलें चोरी की हैं। चोरी की गई बाइकों में अधिकांश एचएफ डीलक्स मॉडल की हैं।

विकेश दास महंत पूर्व में भी बाइक चोरी के मामलों में गिरफ्तार हो चुका है। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि अजय पटेल चोरी की बाइक के चेचिस नंबर के आधार पर असली मालिक की जानकारी निकालता था और अमेजॉन से आरसी कार्ड (पीबीसी कार्ड) मंगवाकर उसमें कंप्यूटर के जरिए हेरफेर कर हूबहू फर्जी आरसी तैयार करता था। ट्रांसफर कार्ड पर फर्जी हस्ताक्षर कर डीलरों और आम लोगों को यह विश्वास दिलाया जाता था कि वाहन चोरी का नहीं है। पुलिस ने अजय पटेल के कब्जे से लैपटॉप, प्रिंटर और पीबीसी कार्ड जब्त किए हैं। इस मामले में बरामद तीन बाइक थाना पूंजीपथरा के अपराध क्रमांक 05/2026, 09/2026 एवं 10/2026 धारा 303(2) बीएनएस से संबंधित हैं, जबकि शेष वाहनों के वास्तविक मालिकों की पहचान कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। संगठित रूप से अपराध किए जाने पर प्रकरण में धारा 112(2), 317(2) और 336(3) बीएनएस जोड़ी गई है। सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा जा रहा है। पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे सेकेंड हैंड वाहन खरीदते समय आरसी, बीमा और अन्य दस्तावेजों की भली-भांति जांच करें तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को दें।