
डेस्क
बुधवार को महात्मा गांधी की 150वीं और पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री की 116 वी जयंती मनाई गयी। इस मौके पर जिला कांग्रेस और शहर कांग्रेस कमेटी ने संयुक्त रूप से समारोह आयोजन कर दोनों महात्माओं की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर राष्ट्र के प्रति उनके योगदान का स्मरण किया। गांधी चौक से कांग्रेस जन स्कूली विद्यार्थियों के संग प्रिय भजन रघुपति राघव राजा राम गाते हुए जय स्तंभ चौक पहुंचे जहां पद यात्रा का समापन हुआ। इससे पहले बड़ी संख्या में पहुंचे कांग्रेसियों ने गांधी चौक में बापू की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते हुए उन्हें नमन किया। जय स्तंभ चौक पर एक औपचारिक सभा में कांग्रेसी नेताओं ने मोहनदास करमचंद गांधी पर अपने विचार रखें । गांधीजी को अमन और शांति का मसीहा बताया गया। इस दौरान इस बात पर भी चिंता जाहिर की गई कि गांधी के आदर्शों से मोहभंग होने के बाद बड़ी संख्या में गोडसे के उपासक देश में बढ़े हैं। राम के नाम पर कुछ लोगों को कोफ्त होती होगी लेकिन गांधीजी के साथ राम का नाम अभिन्न रूप से जुड़ चुका है। कांग्रेसी वक्ताओं ने कहा कि राम को पाने के लिए गांधी के पास भी जाना होगा। वही सादगी के प्रतीक ईमानदार प्रधानमंत्री स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री के योगदान को भी कांग्रेसियों ने याद किया।
आजादी की लड़ाई में गांधी और नेहरू की भूमिका पर हर तरफ बहस जारी है लेकिन कई दशकों तक देश यही मानकर चलता रहा कि आजादी गांधी के चरखे ने दिलाई। इसलिए एक बड़ा वर्ग आज भी गांधीवादी है जिनका मानना है कि भारत को आजादी गांधी के अहिंसक नीतियों से मिली। हालांकि इस विचार धारा के धुर विरोधी भी हैं जो गांधी को विभाजन के लिए जिम्मेदार मानते हैं। गांधी जयंती पर भी यह अनपेक्षित बहस भी सोशल मीडिया पर जरूर हावी रही । कांग्रेस के अलावा अन्य राजनीतिक दलों ने इस दिन गांधीजी से दूरी बनाए रखें । इसलिए यह चिंतन का विषय है कि क्या गांधी जी केवल कांग्रेस के तारणहार और आदर्श बनकर रह गए हैं या फिर आज भी वे देश के नायक हैं।