क्राईममुंगेली

आखिर क्या था उस वीडियो में जिसने बढ़ा दी रविंद्र भारती स्कूल की मुसीबत, फिर क्यों बुलानी पड़ी पुलिस

आकाश दत्त मिश्रा

इन दिनों मुंगेली क्षेत्र में एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। सबसे पहले बाहुबली व्हाट्सएप ग्रुप में इस वीडियो को पोस्ट किया गया और देखते ही देखते वीडियो पूरे इलाक़े में वायरल हो गया। मुंगेली क्षेत्र में इस वीडियो के वायरल होने के पीछे की कहानी भी बड़ी ही दिलचस्प है। दरअसल वीडियो में किसी स्कूल के स्टाफ रूम के सीसीटीवी फुटेज नजर आ रहे हैं, जिसमें संभवतः स्कूल का एक शिक्षक एक छात्रा के साथ अश्लील हरकत करते नजर आ रहा है। वीडियो में छात्रा भी उसे सहयोग करते दिख रही है ।वीडियो में जो छात्रा नजर आ रही है उसकी स्कूल यूनिफॉर्म ठीक मदनपुर के रविंद्र भारती स्कूल के यूनिफॉर्म से मेल खाती है, इसलिए वायरल वीडियो के साथ यह खबर भी आग की तरह फैल गई कि वीडियो मदनपुर के रविंद्र भारती स्कूल की है। उड़ते उड़ते यह खबर रविंद्र भारती स्कूल के संचालक आकाश परिहार और प्राचार्य मनोहर यादव तक भी जा पहुंची ।

उन्होंने जब वीडियो देखा तो उन्हें पता चला कि यह वीडियो उनके स्कूल की तो नहीं है, लेकिन जिस तरह अफवाहों का बाजार गर्म हो रहा था, उससे स्कूल की छवि धूमिल होती नजर आयी, इसलिए खुद, दूध का दूध और पानी का पानी करने के इरादे से विद्यालय संचालक आकाश परिहार ने फास्टर पुर थाने में एक आवेदन कर जांच की गुहार लगायी। जिसके बाद फास्टरपुर थाना प्रभारी आशीष अरोड़ा खुद मौके पर पहुंचे और बारीकी से वीडियो और स्कूल का मिलान किया। पूरे स्कूल की जांच के बाद यह स्पष्ट हो गया कि भले ही स्कूल यूनिफॉर्म रविंद्र भारती स्कूल से मेल खाती हो लेकिन उसके अलावा वीडियो और रविंद्र भारती स्कूल में कोई भी मेल नजर नहीं आ रहा था। आजकल सभी स्कूलों के यूनिफॉर्म अलग-अलग होते हैं, इसलिए देशभर के अलग-अलग स्कूलों के यूनिफॉर्म का आपस में मेल खाना कोई हैरानी वाली बात नहीं है। लेकिन वीडियो में जो कमरा नजर आ रहा था वैसा कोई भी कमरा रविंद्र भारती स्कूल में नहीं पाया गया। यहां तक कि दोनों कमरों में लगे सीसीटीवी कैमरे भी अलग अलग एंगल पर पाए गए । रविंद्र भारती स्कूल में मौजूद सभी पुरुष शिक्षकों की जांच की गई तो वीडियो में दिख रहा शिक्षक कहीं नजर नहीं आया। ना ही वो छात्रा इस स्कूल की पायी गयी, जो वीडियो में टीचर के साथ अंतरंग होती नजर आ रही है।

वायरल वीडियो में जो कमरा नजर आ रहा है, वह काफी बड़ा है जबकि रविंद्र भारती स्कूल का स्टाफ रूम अपेक्षाकृत छोटा है। वीडियो में दिख रहे दरवाजे और स्कूल में मौजूद दरवाजों में भी भिन्नता पाई गई। यहां तक कि कमरे का फर्श भी बिल्कुल अलग है। वायरल वीडियो में कमरे में लाल रंग के दानेदार टाइल्स लगे हुए हैं जबकि रविंद्र भारती स्कूल में सभी कमरों में सफेद टाइल्स लगे मिले। बिजली की फिटिंग के लिए पाइप भी दोनों स्कूलों में बिल्कुल जुदा पाए गए हैं। वीडियो में प्रधान पाठक की कुर्सी स्टाफ रूम में ही नजर आ रही है जबकि रविंद्र भारती स्कूल में ऐसा नहीं है। जांच के बाद खुद फास्टर पुर थाना प्रभारी आशीष अरोड़ा ने यह बयान दिया कि वायरल हो रहा वीडियो मदनपुर के रविंद्र भारती स्कूल का तो नहीं है , बल्कि कहीं और का है, लेकिन यह वीडियो सोशल मीडिया पर किस तरह वायरल हुआ इसकी जांच की जा रही है। वीडियो को शेयर करने वाले आठ-दस लोगों के नंबर भी पुलिस ने हासिल कर लिए हैं ।वही साइबर एक्सपर्ट की टीम तकनीक का सहारा लेकर वहां तक पहुंचने की कोशिश कर रही है जहां से सबसे पहले यह वीडियो पोस्ट किया गया था। सोशल मीडिया के इस जमाने में कोई भी वीडियो किसी भी अफवाह का जनक बन इसी तरह वायरल होने लगता है। हर जगह तीसरी आंख होने की वजह से हर अच्छी बुरी गतिविधि कैमरों में कैद हो जाती है और फिर वीडियो वायरल होने में वक्त नहीं लगता। मुंगेली क्षेत्र में भी जो वीडियो वायरल हुआ वह बेहद आपत्तिजनक तो है लेकिन इस वीडियो ने बेवजह ही मदनपुर के रविंद्र भारती स्कूल की मुसीबत बढ़ा दी है। पूरे इलाके में यह बात फैल गई कि रविंद्र भारती स्कूल में ऐसी घटना हो रही है जबकि ऐसी कोई भी बात जांच में निकल कर नहीं आई। जाहिर है सोशल मीडिया जितना उपयोगी साबित हो रहा है उतना ही उसका स्याह पक्ष भी है । अब रविंद्र भारती स्कूल के संचालक आकाश परिहार लोगों को यह समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि वीडियो उनके स्कूल का नहीं है। केवल स्कूल यूनिफॉर्म के एक जैसा होने मात्र के संजोग ने यह भ्रम पैदा कर दिया । लोगों ने भी बिना समझे बुझे सिर्फ स्कूल यूनिफार्म के आधार पर एक झूठे वीडियो की वजह से इस तरह दुष्प्रचार किया और सोचा भी नहीं कि इससे स्कूल की किस तरह बदनामी हो सकती है और इसमें पढ़ने वाले वाली छात्राओं का भविष्य भी प्रभावित हो सकता है ऐसे अनर्गल बातों से अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल में भेजने से परहेज कर सकते हैं , इसलिए सोशल मीडिया पर कोई भी वीडियो या खबर वायरल करने से पहले यह तसल्ली करना जरूरी है कि उसकी सच्चाई क्या है। बिना सोचे समझे ऐसा करना कई बार मुसीबत का सबब भी बन सकता है। समस्या केवल रविंद्र भारती स्कूल के संचालक की भर नहीं है, अभी तो वे लोग भी नपने वाले हैं जिन्होंने बिना सोचे समझे सोशल मीडिया पर यह आपत्तिजनक वीडियो वायरल किया है। वैसे जांच के बाद यह भी स्पष्ट हो जाएगा कि असल में यह वीडियो कहां का है उसके बाद तो उस शिक्षक की भी समस्या बढ़ने वाली है जिसने गुरु और शिष्य के पवित्र रिश्ते को कलंकित किया है । फिलहाल स्कूल संचालक आकाश परिहार के आगे समस्या यह है कि वे कैसे उन लोगों को समझाएं कि यह वीडियो फेक है, जिन्होंने कहीं ना कहीं इस वीडियो को देखकर इस पर यकीन कर लिया है। सोशल मीडिया भी मयान से छूटने वाली वह वह तीर है जिसके छूटने के बाद, वापसी की गुंजाइश ना के बराबर रहती है।

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