पेण्ड्रा

बेखौफ हो रही जंगल की कटाई, वन विभाग मौन….आखिर कौन जिम्मेदार, किसकी है सरकार

उदय सिंह

पेंड्रा-पेंड्रा वन मंडल के वनपरिक्षेत्र अंतर्गत तौली पिपरिया गाँव के समीप स्थित जंगल में इमारती पेड़ो को तस्कर बेख़ौफ़ हो कर दिन दहाड़े काट रहे हैं और विभाग को इसकी शायद भनक तक नहीं है या फिर यूँ कहें सब कुछ जानते हुए विभाग चुप्पी साधी हुई है नतीजन तस्करों के हौसले इतने बुलंद है की सड़क के किनारे पेड़ो की कटाई करने में गुरेज नहीं कर रहे हैं। खास बात तो यह है कि यह पूरा खेल क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों के इशारे मे खुलेआम अंजाम दिया जा रहा हैं। ग्रामीणों की माने तो पिपरिया के जंगल में हरे पेड़ों की कटाई इन दिनों तेजी से चल रही है। कहीं-कहीं तो पुलिस व वन विभाग के लोगों सुविधा शुल्क लेने के लिए जिस स्थान पर पेड़ काटा जा रहा है वहां पहुंच जाते हैं। फिर क्या वन माफियाओं के आदमी उनकी सेवा कर देते हैं और वह भी चुप्पी साधे वाहनों में सवार होकर निकल पड़ते हैं। अवैध कमायी के चक्कर में पुलिस एवं वन विभाग के अधिकारी इन व्यापारियों को खुली छूट दे रखे हैं। आम, महुआ, जामुन व साज, सरई के हरे वृक्ष धड़ल्ले से काटकर दूसरे जिले में भी भेजा जा रहा है। हरा पेड़ कटता देख ग्रामीण अपने स्तर पर इसकी शिकायत विभाग से करते रहते हैं लेकिन सुनवाई एक नहीं होती। हरा पेड़ कटता देख ग्रामीण में रोष बढ़ता जा रहा है लेकिन विडंबना ही है वन विभाग का लकड़ी तस्करों पर इस तरह का नज़रे करम साफतौर पे कहीं न कहीं तस्कर और विभाग की मिलीभगत को साबित करता है। ऐसे में सवाल यह है कि वन रक्षक ही जब भक्षक बन जाए तो फिर वनो की रक्षा आखिर करेगा कौन ? वनो की सुरक्षा की उम्मीद किस्से करें ,ऐसे में कैसे होगी वनो की रक्षा ,ये बहुत दयनीय और गंभीर चिंता का विषय है!

जनप्रतिनिधि के इशारों पर चल रहा सारा खेल..
अपनी पहचान नही उजागर होने के शर्त में ग्राम तौली पिपरिया के ग्रामीण ने जनकारी देते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ शिव सेना के नवनिर्वाचित जिला अध्यक्ष उमेंद्र सिंह जो गांव का पंच भी है। उनके द्वारा ही गांव के समीप स्थित जंगल के अवैध कटाई का सारा खेल संचालित किया जा रहा है।

फलदार पेड़ो को काट खेती से मोटी रकम कमाई करने की है रणनीति..

ग्राम तौली पिपरिया के जंगलों को काट वन माफिया और जनप्रतिनिधियों द्वारा अपनी जेब तो गर्म की जा ही रही है। इन भक्षको की प्यास पेड़ो तक यही नही रुकी, वह पेड़ों को काटने के बाद जमीन के उपजाऊ मिट्टी पर भी अपने फायदे की नीयत टिकाए हुए हैं वह उक्त जमीन पर खेती कर पैसे कमाने की तैयारी में है। जिसे रोकने के बजाय सभी जिम्मेदार मुखदर्शक बने हुए है।

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