
गौरेला सुहैल आलम
गौरेला- छत्तीसगढ़ के नवोदित जिला गौरेला पेण्ड्रा मारवाही के छोटे से गांव तरईगांव के रहने वाले कृषक पुत्र छात्र दीपक राठौर पिता पंचराम राठौर ने आल इंडिया ग्रैजुएट फार्मक्यूटिकल् एप्टीट्यूड टेस्ट में छोटे से गांव से निकल कर 50,000 से भी ज्यादा अभ्यर्थियों के बीच पूरे भारत में 90 रैंक हासिल किया है, जो इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विवि से बी फार्मा के छात्र है उनकी यह उपलब्धि न केवल गांव का मान बढ़ाती है बल्कि ये पूरे यूनिवर्सिटी के लिये भी बड़ी उपलब्धि है जो की विवि का शिक्षा स्तर प्रदर्शित करता है दीपक ने पूरे भारत में 90 रैंक तथा छत्तीसगढ़ में प्रथम रैंक हासिल किया है जिसके वजह से वो एशिया के सर्वश्रेष्ठ फार्मक्यूटिकल् संस्था में पढ़ सकते है जिसके लिये सरकार की तरफ से उन्हें 12,500, रु प्रति माह फेलोशिप प्रदान किया जायेगा दीपक ने अपनी सफलता का राज बताते हुये कड़ी मेहनत और लगन की बात कही है और साथ ही अपनी सफलता का श्रेय igntu के प्राध्यापक डॉ कुंजबिहारी सुलखिया, डॉ सी.के. कार्तिकेय अन्य प्राध्यापकों को भी दिया और स्टडी सर्कल का महत्त्व बताते हुये विवि के कलाम स्टडी सर्कल के प्रभारी योगेन्द्र मणि वर्मा से भी विशेष सहयोग मिलने की बात कही है। दीपक आगे आल इंडिया फार्मक्यूटिकल संस्था मोहाली से एम. फार्मा करना चाहते है तथा विभिन्न प्रकार के दवाईयों के बारे में शोध करना चाहते है जिसमे कैंसर की दवा को मुख्य रूप से प्राथमिकता देने की बात उसने कही है, इसके अलावा वो न्यूरोफार्माकॉलोजिस्ट बनकर मनोरोग संबंधी दवाइयों का अविष्कार करना चाहते है इसके साथ ही उन्होंने फार्मेसी के विद्यार्थियों को सन्देश देते हुये कहा कि छात्र कड़ी मेहनत करे और दवा बनाने के विविध आयाम सीख ले उन्होंने बताया कि यूरोपीय देशों में दवा लिखने का काम फार्मासिस्टों का होता है जहाँ डॉक्टर केवल बीमारी संबंधी जानकारियां बस देते है। दीपक ने नये फ़ार्मासिस्टो को विश्वशनीय एवं काबिल बनने की बात कही ताकि यहाँ भी पर्ची पर दवाई फ़ार्मासिस्ट लिख सके।