बिलासपुर

कोरोना रैपिड टेस्ट किट को लेकर असमंजस की स्थिति, चाइना किट की जिले में हुई सप्लाई….टेस्ट रिपोर्ट को लेकर संशय

भुवनेश्वर बंजारे

बिलासपुर – जिस चाइनीज रैपिड टेस्ट किट पर कोरोना सैंपल की जांच के लिए रोक लगाई गई है। ऐसे में इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च के पाबंदी के बाद भी जिले में चाइनीज़ किट से ही कोरोना टेस्ट का दौर शुरू कर दिया गया है। शनिवार से अब तक जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन के उच्च अधिकारियों के साथ शहर के संदेहियों की जांच इस किट से की गई है। जबकि ऐसे ही किट से प्रदेश के हॉट स्पॉट कटघोरा के एक हजार से अधिक लोगो के सैम्पल की जांच की जा चुकी है। जिसके बाद इसका परिमाण संदेह के घेरे में था। चाइनीज़ किट को लेकर इसी बीच अन्य प्रदेशों के भी चिकित्सा विशेषज्ञों ने पूरी तरह विश्वसनीय नहीं माना था। जिसकी वजह से इससे जांच के लिए रोक लगा दिया गया था। इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने राजस्थान सरकार की आपत्ति के बाद छत्तीसगढ़ समेत देशभर में चीन से भेजी गई रैपिट किट पर रोक लगा रखी है।

इसके बावजूद छत्तीसगढ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन द्वारा जिले में भेजे गए 100 नग चाइनीज रैपिड किट से ही स्वास्थ्य विभाग के आला अफसरो के निर्देश पर शहर विधायक, जिला प्रशासन के आला अधिकारी सहित कांग्रेस के बड़े नेताओ की जांच भी इस प्रतिबंधित किट से की है। जिसमे सभी की रिपोर्ट निगेटिव आई है। या यूं कहें के की वास्तविक स्थिति से धोखे में रख कोरोना जांच की संदेहास्पद रिपोर्ट साझा की गई है। वही इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के सीएमएचओ से बात की गई तो उन्होंने बताया कि यही किट शासन स्तर से यहाँ उपलब्ध कराई गई है, जिससे जांच की जा रही है। लेकिन सीजीएमएससी के सहायक प्रबंधन से जब इस संबंध में जानकारी ली गई,,तो उन्होने बताया कि स्वास्थ्य विभाग को दो तरह कि किट भेजी गई थी जिसमें से चीन के किट से जांच के लिए मना किया गया था। क्योकि उससे जांच के लिए इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च ने कुछ दिनो के लिए प्रतिबंध लगा दिया है। जिसके बाद मामले में बिलासपुर स्वास्थ्य विभाग अब सवालो के कटघरे में आ खड़ा हुआ है, जिसका फिलहाल उनके पास कोई माकूल जवाब नही है।

आरटीपीसीआर टेस्ट से 71 प्रतिशत तक रिपोर्ट में अंतर…

बताया जा रहा है कि चीन के रैपिड जांच किट द्बारा किए जा रहे परीक्षणों में 6-71 फीसदी का तक अंतर है। यह अंतर बहुत ज्यादा है। रैपिड किट आरटीपीसीआर टेस्ट की तरह पूरी तरह से सही नतीजे नहीं देती हैं लेकिन जितना फर्क आ रहा है, वह बहुत ज्यादा है। इसी वजह से केंद्र सरकार ने राज्यों को कहा है कि वे कुछ दिन किट का इस्तेमाल नहीं करें। बावजूद इसके जिले में इसी किट से सेम्पल परीक्षण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जिसमें सभी रिपोर्ट निगेटिव आये है।

गलती के बाद मामले को दबाने में जुटे अधिकारी…

स्वास्थ्य विभाग के द्वारा जिले में कोरोना संक्रमण के जांच हेतु जो लिवेज़ों कंपनी के रैपिड किट का उपयोग किया जा रहा था। उसपर सत्याग्रह की टीम को संदेह हुआ। जब इसकी पड़ताल की गई तो Zhuhai livzon diagnostics inc नाम की कंपनी की यह रैपिड किट चाइना कंपनी की निकली। जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारीयों से मामले के संबंध में जानकारी ली गई तो वो वास्तविकता को छूपाते हुए मामले को दबाने में जुट गए और किट को चाइना कंपनी का मानने से इंकार कर दिया।

फ़िलहाल इस मामले को गंभीरता से लेते हुए निश्चित ही जांच की प्रक्रिया शुरू की जाने की आवश्यकता है ताकि समय से पहले स्थिति पर नियंत्रण किया जा सके और सटीक रिपोर्ट सामने आए।

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