बिलासपुर

रात की रिपोर्टिंग होने पर सुबह भर्ती किये जाएंगे पॉजिटिव मरीज….शिफ्टिंग सहित सेम्पलिंग में होती है परेशानी….व्यवस्था बनाने नई गाइडलाइन जारी

भुवनेश्वर बंजारे

बिलासपुर – विगत तीन महीनों से 24 घंटे कोरोना संक्रमण को हराने जुटे, कोरोना वॉरियर्स की स्वास्थ्य महकमे ने आंशिक राहत देने का निर्णय लिया है। आपको बता दे प्रदेश में कोरोना वायरस ने मार्च में दस्तक दी और तब से पूरा स्वास्थ्य महकमा दिन – रात से सक्रिय है। बगैर थके, बगैर रूके, घर-परिवार से दूर और अपनी जान जोखिम में डालकर ये वायरस के नियंत्रण में जुटे हुए हैं। भले ही संक्रमित मरीजों के आंकड़े 2000 पार हो चुके हों, मगर स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टर्स, नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ, अस्पताल स्टाफ की बदौलत इनमें 1400 से अधिक मरीज ठीक भी हो चुके हैं। अब 24 घंटे आपातकालीन सेवा देने वाले स्वास्थ्यकर्मी को भी आराम की जरुरत महसूस हो रही है। यही वजह है कि स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना संक्रमित मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने की गाइडलाइन में बड़ा बदलाव किया है। जिन मरीजों की रिपोर्ट शाम 6 बजे के बाद आएगी, उनमें गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को छोड़कर शेष सभी को अगले दिन अस्पताल में भर्ती किया जाएगा। इस निर्णय से जिले के सैकड़ों मेडिकल स्टाफ को राहत मिल सकेगी।

मरीज की पॉजिटिव रिपोर्टिंग आने के बाद अब यह होगी व्यवस्था..

मेडिकल डिपार्टमेंट द्वारा जारी किए गए नई गाइड लाइन में स्वास्थ्य विभाग की तरफ से कहा गया है कि मरीजों को उनके पॉजिटिव आने की जानकारी दे दी जाएगी। यह कहा जाएगा कि वे खुद को परिजनों से दूर करके, कमरे में आइसोलेट कर लें। सुबह स्वास्थ्य टीम उन्हें लेने पहुंचेगी। वही क्वारंटीन सेंटर में मौजूद किसी श्रमिक की रिपोर्ट पॉजिटिव आएगी तो उन्हें अन्य श्रमिको से अलग रखने की कार्यवाही तत्काल की जाएगी। जिसे क्वारंटीन सेंटर प्रभारी सुनिश्चित करेंगे। ऐसा इसलिए भी क्योंकि स्वास्थ्य अमला दिनभर काम करता है। रात को पॉजिटिव मरीज मिलने के बाद अफरा-तफरी मचती है। इन्हीं सब कारणों के मद्देनजर यह गाइडलाइन बनी जिसे मंजूरी दे दी गई है।

पॉजिटिव मरीज के सूचना मात्र से ऐसे हरक़त में आती स्वास्थ्य विभाग की टीम..

रायपुर स्थित लैब से पॉजिटिव मरीज के मिलने की सूचना जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तक पहुंचती हैं। वहां से 108 एंबुलेंस को कॉल किया जाता है। जिला की टीम एंबुलेंस में बैठकर मरीज के घर तक पहुंचती है वहां उसकी जांच करती है। उनके साथ जिला स्वास्थ्य मकहमा और राज्य की संयुक्त कांटेक्ट ट्रेसिंग टीम भी सक्रिय हो जाती है। जो संक्रमित मरीज से पूछते हैं कि उनसे बीते दिनों में कौन-कौन संपर्क में आया था। मरीज को आधी रात भी क्यों न हो अस्पताल ले जाया जाता है और वहां अस्पताल प्रबंधन को रात में ही मरीज को भर्ती करने की व्यवस्था करनी होती है। इसमें अधिकारी-कर्मचारियों को रतजगा करना पड़ता है।

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