
विधिवत रूप से यह मेला 7 दिनों के लिए आयोजित होता है लेकिन उसके पश्चात भी करीब पखवाड़े भर तक मेले की रौनक कायम रहती है

बिलासपुर प्रवीर भट्टाचार्य
धार्मिक नगरी रतनपुर में प्रसिद्ध माघी पूर्णिमा एवं आदिवासी विकास मेले का उद्घाटन मंगलवार शाम को तखतपुर की विधायक रश्मि सिंह ने फीता काटकर किया। भारतीय परंपराओं में मेले की विशेष पहचान रही है, मेले सिर्फ मनोरंजन के साधन भर नहीं है बल्कि लोगों को वर्षभर मेले की प्रतीक्षा हुआ करती थी क्योंकि मेले में ही उन्हें कुछ विशेष सामग्रियां प्राप्त होती थी, इसीलिए मेले के दौरान जमकर खरीदी बिक्री हुआ करती थी। आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में मेले को लेकर खासा उत्साह दिख जाता है। सदियों से माघी पूर्णिमा पर रतनपुर के प्रसिद्ध आठा बिसा तालाब तट पर यह मेला भरता है। इस बार भी इस सात दिवसीय मेले का आगाज हो चुका है। शासकीय विभागों द्वारा संचालित जन कल्याणकारी तथा रोजगार उन्मुखी योजनाओं को प्रदर्शित करते विभागीय स्टॉल लगाए गए हैं ,इनके अलावा मिठाई, खिलौने, कपड़े, श्रृंगार सामग्री आदि के करीब 400 स्टॉल यहां लगे हैं। उद्घाटन समारोह में भी पुलवामा घटना का साया छाया रहा।

सीआरपीएफ जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए सारे फूल मालाएं उन्हीं के नाम समर्पित किए गए ,वहीं पहले दिन मनोरंजन के कार्यक्रम यहां नहीं आयोजित हुए । पहले दिन शाम को यहां अंचल के प्रसिद्ध गायक जाकिर हुसैन ने देशभक्ति गीतों की प्रस्तुति दी, जिससे यहां देशभक्ति का जज्बा हिलोरे लेने लगा। बतौर मुख्य अतिथि पहुंची विधायक रश्मि सिंह ने भी यहां अलग-अलग विभागीय स्टॉल का निरीक्षण किया ।

यहां पशुपालन विभाग ,श्रम विभाग ,मछली पालन जैसे विभागों के स्टॉल आकर्षण के केंद्र है । मेले में पहुंची विधायक रश्मि सिंह ने बताया कि आगामी बजट में मेले के लिए अनुदान राशि 10 लाख से बरा बढ़ाकर 20 लाख की जाएगी, ताकि मेला और भव्य स्वरूप में आयोजित हो, क्योंकि रतनपुरा का यह माघी मेला सिर्फ दैनिक उपभोग की जरूरतों को ही पूरा नहीं करता बल्कि यह सामाजिक मेल मिलाप और मनोरंजन का भी बड़ा साधन है। यहां तरह तरह के मनोरंजन के साधन भी उपलब्ध है। मेले में कई तरह के झूले आकर्षण की वजह है। जिनमें हवाई झूला ,कोलंबस झूला और मौत के कुऐ का आनंद लेने लोग बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। मेले में तरह तरह की मिठाई की दुकानें भी सजी हुई है, लेकिन लोग उखरा जरूर खरीदते देखे जा रहे हैं ।विधिवत रूप से यह मेला 7 दिनों के लिए आयोजित होता है लेकिन उसके पश्चात भी करीब पखवाड़े भर तक मेले की रौनक कायम रहती है ।उद्घाटन के साथ ही यहां रोजाना सैकड़ों लोग मेले का आनंद लेने पहुंच रहे हैं।
