बिलासपुर

निजी स्कूलों पर रहेगा नियंत्रण, छत्तीसगढ़ अशासकीय विद्यालय फीस विनियमन अधिनियम आया अस्तित्व में…जानिए कैसे होगी मॉनिटरिंग

भुवनेश्वर बंजारे

बिलासपुर – प्रदेश में फीस वसूली के मसले पर शासन के निर्णय के बाद अब निजी स्कूलो पर शिकंजा कसा सकेगा। क्योंकि छत्तीसगढ़ में अशासकीय विद्यालयों की फीस तय करने के लिए प्रदेश में छत्तीसगढ़ अशासकीय विद्यालय फीस विनियमन अधिनियम लागू हो गया है। जिसको लेकर न्यायधानी में भी सुगबुगाहट शुरू हो गई है। इसी कड़ी में गुरुवार को एमएलबी और कन्या सरकण्डा शासकीय स्कूल में जिला शिक्षा अधिकारी ए के भार्गव ने बैठक बुलाई थी। जिसमे जिले के सभी नोडल अधिकारियों के साथ निजी स्कूलों के प्राचार्य उपस्थित हुए,,जहाँ उन्होंने सभी को जिले में लागू होने वाले अशासकीय विद्यालय फीस विनियमन अधिनियम के बारे में जानकारी साझा की।

वही वर्तमान के शिक्षा सत्र में ही विद्यालय फीस समिति के साथ ही जिला फीस समिति के गठन को लेकर आवश्यक जानकारी दी है। जिनके गठन के बाद अभिभावकों को फीस नियंत्रण का अधिकार मिल सकेगा। वही जल्द ही अभिभावकों और निजी स्कूल संचालकों को राज्य फीस कमेटी के दिशा-निर्देश मिलने की बात कही जा रही है। डीईओ ने जानकारी देते हुुुए बताया कि जिला फीस समिति मे अभिभावकों को भी जगह दी जाएगी। इसके अलावा राज्य फीस समिति के अध्यक्ष स्कूल शिक्षा मंत्री और सचिव विभागीय सचिव को बनाया गया है। साथ ही आयुक्त लोक शिक्षण संचालनालय और वित्त नियंत्रक या संयुक्त संचालक वित्त संचालनालय लोक शिक्षण इसके सदस्य होंगे। जो प्रदेशभर के निजी स्कूलों पर नजर रखेंगे। साथ ही हर वर्ष प्रवेश शुल्क, बिल्डिंग फंड शुल्क, ड्रेस, जूता-मोजा की तय दुकानों से खरीदी,एक-दो साल में स्कूल यूनिफार्म में बदलाव,अन्य गतिविधियों के नाम पर सभी विद्यार्थियों से शुल्क पर विशेष ध्यान देने की भी बात कही जा रही है।

आठ फीसदी से ज्यादा नही कर सकेंगे फीस में वृद्धि..

छत्तीसगढ़ अशासकीय विद्यालय फीस विनियमन अधिनियम के अस्तित्व आने के बाद कोई भी निजी स्कूल संचालक आठ फीसदी से ज्यादा फीस नहीं बढ़ा सकेंगे। फीस तय करने में विद्यालय फीस समिति का दायित्व सबसे अहम होगा। इस समिति में आठ अभिभावकों को स्थान दिया जाएगा। इसमें चार कलेक्टर की ओर से और चार विद्यालय की ओर से नामांकित अभिभावक होंगे। समिति द्वारा तय फीस की सूचना निर्धारित सूचना पटल पर चस्पा की जाएगी।

गठित समितियों को मिलेंगी न्यायालयीन शक्तियां..

जानकारो की माने तो निजी स्कूलों के मॉनिटरिंग करने के लिए बनाए जाने वाले समितियों को विशेष अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त होगा। जिसके पास सिविल न्यायालय की शक्तियां होंगी। समितियों को लेखा और अभिलेख मांगने और सुनवाई के लिए व्यक्ति की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए सिविल न्यायालय की शक्तियां प्राप्त होंगी। यह समितियां फीस निर्धारण के लिए विद्यालय प्रबंधन और अभिभावकों की भी सुनवाई कर सकेंगी।

लापरवाही करने वालो पर निजी स्कूलों पर लगेगा जुर्माना..

जिला शिक्षा अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि उक्त अधिनियम के तहत निजी स्कूलों पर लगाम कसने की भी कवायद की गई है। इसके लिए जुर्माने का प्रावधान भी किया गया है। नियमों का पालन नहीं करने पर विद्यालय प्रबंधन समिति को प्रथम उल्लंघन के लिए 50 हजार रुपए या इस अधिनियम के अधीन सक्षम समिति द्वारा निर्धारित फीस के आधिक्य रकम को दोगुना, जो भी अधिक हो वह जुर्माना लिया जाएगा। इसके बाद एक लाख रुपए या चार गुना तक जुर्माना का प्रावधान किया गया है।

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