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मस्तूरी- राज्य सरकार एक ओर गौवंश संवर्धन और संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण योजना चलाकर हर संभव प्रयास कर रही है तो दूसरी ओर मस्तूरी क्षेत्र में मवेशियों की मौत इस योजना का मुंह चिढ़ा रही है। मस्तूरी क्षेत्र से एक बार फिर संवेदनशील खबर आई है जहाँ बाड़े में बंद 10 मवेशियों की मौत चारा पानी की कमी की वजह से हो गई है। मामले में जब सत्याग्रह ने सच्चाई की तलाश की तो बेहद ही शर्मनाक हरकत सामने आई।
दरअसल मस्तूरी जनपद पंचायत क्षेत्र के ग्राम पंचायत भुरकुंडा में गाँव के बाहर 10 मवेशियों के मृत शव पड़े हुए थे जिसकी सूचना मिलने पर जब जानकारी जुटाई गई तो पता चला कि गाँव के बाहर काँटेदार तार से एक बाड़े जैसा बनाकर इन मवेशियों को इसमें बंद कर दिया गया था, जहॉ चारा पानी की कमी और मौसम की मार सह रहे मवेशियों ने दम तोड़ दिया, जिसे कुछ लोगो ने गांव के बाहर निकाल दिया।
सरपंच की गैरजिम्मेदाराना हरकत
मामले में जब भुरकुंडा सरपंच से संपर्क कर जानकारी जुटाई गई तो उन्होंने अपना पलड़ा झाड़ते हुए सारी गलती ग्रामीणों की बता दी, उन्होंने बताया कि मवेशियों से फसल नुकसान होने की शिकायत पर ग्रामीणों ने मवेशियों को बाड़े में कैद किया था, इसमें उनकी क्या गलती।
गौठान में की गई पूजा
वही सोमवार को अन्नकूट और गोवर्धन पूजा के अवसर पर प्रदेश भर में सुराजी योजना नरवा, गरवा, घुरवा और बारी के तहत गौवंश की पूजा अर्चना कर विविध भोज्य पदार्थ खिलाएं गए, वही इसी सूबे में भूख प्यास से मवेशियों की मौत की ख़बर चिंता की स्थिति है।
दुर्भाग्यपूर्ण घटना
मस्तूरी क्षेत्र में ही कुछ दिनों पहले 22 मवेशियों की मौत हो गई थी, जिसमें जांच अब भी जारी है, वही यह फिर दूसरी घटना सामने आई है। इस घटना में भी मृत मवेशियों के शव को छिपाने पूरी कोशिश की गई, उन्हें चमड़ा निकालने वालो को बुलाकर जल्द नष्ट कराने का प्रयास किया गया।
कौन जिम्मेदार
मामले में यह तथ्य तो सामने आया है कि ग्राम पंचायत में फिलहाल गौठान नही बनाया गया है, जिसकी वजह से इस तरह बाड़े में मवेशियों को रखा गया था। अब सवाल यह उठना स्वाभाविक है कि आखिर अब इन 10 मवेशियों की मौत के लिए कौन जिम्मेदार है।