बिलासपुर

खबर का असर:- शिक्षा विभाग के बाबू पर आखिर कार हुई कार्रवाई…वित्तीय अनियमितता के मामले में किया गया सस्पेंड

भूवनेश्वर बंजारे

बिलासपुर – कोटा विकासखंड शिक्षा कार्यालय में पदस्थ लेखपाल द्वारा अपनी मनमानी करते हुए वित्तीय अनियमितता की जा रही थी, जिसकी शिकायत भी विभाग से हुई थी लेकिन कोई जांच या कार्रवाई नही हो रही थी, मामले को सत्याग्रह न्यूज़ ने प्रमुखता से प्रकाशित कर मामले से उच्च अधिकारियों को अवगत कराया था, जिसमें आखिरकार जिला शिक्षा अधिकारी डीके कौशिक ने एक्शन लेते हुए लेखपाल राजेश कुमार प्रताप को निलंबित कर दिया है।

यह खबर प्रकाशित होने के बाद हुई कार्यवाही

बिलासपुर – कोटा ब्लॉक में 18 लाख रुपए की वित्तीय अनियमितता का मामला प्रकाश में आया है। जहाँ बीईओ की शिकायत के बाद भी कोई कार्यवाही आरोपित लेखापाल के ख़िलाफ़ नहीं हो पा रही है। ऐसे में सवाल यह है की शिक्षा विभाग के स्वयंभू बने लेखापाल को आखिर कब तक अभय दान मिलता रहेगा.? यह सवाल इस लिए भी उठ रहा है क्योंकि शासकीय योजनाओं की लाखो रुपयों का बंदरबांट करने वाले बाली बाबू के नाम से फेमस राजेश कुमार प्रताप के खिलाफ विभागीय जांच होने के बाद भी जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा अब तक कोई भी कार्यवाही नही की गई है। जबकि 20 जून को ही कोटा बीइओ ने लेखापाल राजेश कुमार प्रताप के द्वारा आर्थिक अनियमितता करने की जानकारी देते हुए उनसे उचित मार्गदर्शन मांगा था। लेकिन बीईओ के लेटर को लेकर अब तक कोई भी संजीदगी डीईओ डीके कौशिक द्वारा नही दिखाई गई है। या यूं कहे की बाली बाबू को डीईओ आफिस से अभय दान मिला है। तभी तो छोटी छोटी शिकायत में कार्यवाही करने वाले डीईओ डीके कौशिक भी इस गंभीर मसले में मुखदर्शक बने बैठे है। आपको बता दे कोटा ब्लॉक में पद्स्थ शिक्षक राजकुमार राठौर के सेवानिवृत्त होने के बाद लेखापाल राजेश कुमार प्रताप द्वारा दो दो बार एक ही मद से राशि का भुगतान कर दिया गया। इसके अलावा परिवार कल्याण निधि से 70 हज़ार और 66 हज़र, 904 सामूहिक बीमा योजना से एक लाख 91 हज़ार 224, अवकाश नगदीकरण से 6 लाख 75 हजार 392 और 6 लाख 75 हजार 392 , सामूहिक बीमा योजना से एक लाख 77 हज़ार 179 रुपए का नियम वृद्ध भुगतान करते हुए राजकीय कोष को आर्थिक क्षति पहुंचाई है। लाखों के बंदरबांट के बाद भी लेखापाल राजेश कुमार प्रताप ने इतनी सेटिंग कर रखी थी कि इस मामले की किसी को भनक तक नहीं लगी पर,, कहते हैं ना पाप का घड़ा एक न एक दिन भर ही जाता है.! उसी तर्ज पर 16 जून को लोक शिक्षण संचनालय से जब ऑडिट हुआ तो बाली बाबू के कारनामों का काला चिठ्ठा खुला। इधर 18 लाख 56 हजार 91 रुपए की आर्थिक अनियमितता प्रकाश में आने के बाद कोटा बीईओ ने 20 जून को आरोपित लेखापाल राजेश कुमार प्रताप उर्फ बाली बाबू के खिलाफ कार्यवाही के लिए जिला शिक्षा अधिकारी डीके कौशिक को पत्र लिखा है। ऐसे में जिला शिक्षा अधिकारी की इस गंभीर मामले में चुप्पी कई सवालों को जन्म दे रही है, जिससे कही ना कही शिक्षा विभाग की छवि धूमिल हो रही है।

कोषालय की भूमिका रहती है संदिग्ध,,77 लाख के गबन के मामले में रिकवरी के नाम पर केवल खानापूर्ति..

एक ओर सामान्य बिल को पास कराने कर्मचारियो के पसीने छूटे जाते है,तो वही दूसरी ओर जिला कोषालय से नियम विरुद्ध लाखों की राशि चुटकी बजाते ही निकल जा रही है। कोटा ब्लॉक या फिर जिले में आर्थिक अनियमितता का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी बेलतरा स्थित हायर सेकेंडरी स्कूल में साल 2018 से 2019 के बीच कैलाश चंद्र सूर्यवंशी, लिपिक निर्मला सिदार और व्याख्याता पुन्नीलाल कुर्रे ने अलग-अलग तारीख में एरियर्स के 22 बिल देयक के लिए कोषालय (ट्रेजरी) मे जमा कर 77 लाख रुपए की नियम विरुद्ध आहरण कराया था। जिसकी वसूली आज तक नही हो सकी है। जबकि दोषी कर्मचारी बड़े मजे से शासकीय सेवाओं का लुफ्त उठा रहे है। इसके अलावा एसपी ऑफिस में भी आर्थिक अनियमितता हुई थी। जहां शासन को लाखो का चूना लगाया गया था। इन सभी मामलों में एक चीज ही कॉमन है वो है कोषालय (ट्रेजरी) जहां से ही सभी राशि का आहरण हुआ है। ऐसे में इन मामलों को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि विभाग जांच की सुई केवल प्रारंभिक दोषियों पर शुरू होकर खत्म क्यो हो जाती है..? इन मामलों में कोषालय (ट्रेजरी) को अब तक अछूता रखना..? समझ से परे है.!

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