
कलेक्टर डाॅ.अलंग ने जिला कोषालय का किया वार्षिक निरीक्षण

बिलासपुर प्रवीर भट्टाचार्य
छत्तीसगढ़ के इतिहास और संस्कृति में गहन रूचि रखने वाले और इससे संबंधित किताबें लिख चुके कलेक्टर डाॅ.संजय अलंग ने कोषालय में उपस्थित अधिकारियों, कर्मचारियों को उनके दफ्तर का इतिहास बताकर हैरान कर दिया।
कलेक्टर डाॅ.अलंग आज सुबह 10.30 बजे कलेक्टोरेट भवन में ही स्थित जिला कोषालय का वार्षिक निरीक्षण करने पहुंचे। निरीक्षण के दौरान वे कोषालय में उपस्थित अधिकारियों, कर्मचारियों के साथ स्ट्रांग रूम पहुंचे। 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में निर्मित इस भवन के फर्श पर लोहे का चादर ढंका हुआ था, जिसके नीचे तहखाना है। अब इसका इस्तेमाल नहीं होता लेकिन अंग्रेजों के जमाने में इसका उपयोग किया जाता था। उन्होंने यह भी दिलचस्प जानकारी दी कि जब शुरूआत में अंग्रेजों ने कलेक्टरों की नियुक्ति की तो उन्हें राजस्व वसूली के लिये रखा जाता है। कलेक्टर नाम इसी से आया। हालांकि बाद में कलेक्टर को अनेक न्यायिक और दांडिक अधिकार अंग्रेजों ने दे दिये, जिसमें अब तक काफी बदलाव आ चुके हैं।
डाॅ.अलंग ने यहां मौजूद अलमारियों, तालों और चाबियों के बारे में भी बताया कि यह मेड इन इंग्लैण्ड हैं। यहां के अलमारियों, दरवाजों और खिड़कियों की डिजाईन की ओर भी उन्होंने ध्यान दिलाया और बताया कि कोषागार की सुरक्षा के हिसाब से इन्हें विशेष स्वरूप दिया गया था।
कोषालय संहिता के सहायक नियम 39 के तहत हर छह माह में कोषालय का निरीक्षण कलेक्टर को किया जाना है। इसी परिप्रेक्ष्य में आज यह निरीक्षण किया गया। कलेक्टर ने देयक, शाखा, भुगतान शाखा, पेंशन एवं चेक शाखाओं का निरीक्षण किया। उन्होंन कर्मचारियो की उपस्थिति पंजी का अवलोकन किया। डबल लाक, सिंगल लाक खजाने का निरीक्षण किया। उन्होंने पेंशन एवं देयकों का भुगतान समय पर करने के निर्देश जिला कोषालय अधिकारी को दिये।