
भुवनेश्वर बंजारे

बिलासपुर- पेंशन सत्याग्रह की चिंगारी अब न्यायधानी में सुलगने लगी है। देशव्यापी विरोध के बाद अब एक बड़े वर्ग ने नई पेंशन नीति को बदलने लामबंद हो रहे है। इसको लेकर छत्तीसगढ़ अंशदायी पेंशन कर्मचारी कल्याण संघ ने अपनी पहली प्रतिक्रिया दिखाई है। बुधवार को संघ के पदाधिकारियों के उपस्थित में चकरभाठा के सूरज सोनी ने दिल्ली में पेंशन नीति में संशोधन के लिए बाईक यात्रा शुरू की है। चकरभाठा से शरू हुए इस यात्रा के आगाज करने संघ के साथ प्रथामिक शाला चकरभाठा के शिक्षक भी पहुँचे थे।

जिन्होंने शिक्षक सूरज सोनी के सफलता की कामना की। सभी ने सूरज सोनी को नयापारा चौक से आगे के लिए रवाना किया। आगे मुंगेली जिले में उनका स्वागत हुआ। मालूम हो मुख्य मार्ग की इस सफ़र में शिक्षक सूरज सोनी को करीब 3000 किलोमीटर बाईक चलाना होगा। इस दौरान वह आने वाले हर राज्यो में सभी कर्मचारियों से पुरानी पेंशन बहाली के लिए स्वप्रेरित होकर आगे आने को कहा साथ ही पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए प्लास्टिक मुक्त भारत बनाने की अपील करंगे। इस दौरान उपस्थित कर्मचारियों में संघ जिला अध्यक्ष रोहित बंजारे जिलापदधिकारियों में राजेश टंडन,महामंत्री विद्याभूषण शर्मा,प्रवक्ता महेंद्र उपाध्याय,चंद्रकांत सौलखे,मीडिया प्रभारी ज्योति कुर्रे, कोषाध्यक्ष कृष्णकुमार सन्नाड,बिल्हा ब्लॉक अध्यक्ष इन्द्रकांत सौलखे,ब्लॉक सचिव डिलेश्वर कंगण, पदाधिकारी परमेश्वर यादव,पंकज शुक्ला, आलोक त्रिपाठी,पुष्पेंद्र दीक्षित,भारती रगिनवार,भारती तम्बोली,जयप्रकाश तम्बोली,भारती तिवारी,रामकिशोर पांडेय,डॉ जगदीश कुलदीप,दयादास मानिकपुरी,मधु वर्मा,शिवशंकर कौशिक,विनोद सोनवन, कलेश्वर साहू,बशीर खान,अजय कौशिक,जयप्रकाश द्विवेदी, हेशराम कर्ष,रोशनी सिनही, देवचरण डहरिया, धीरज सोनी,सन्तु वर्मा आदि उपस्थित रहे।
इस नीति को लेकर विरोध चल रहा है..

देश मे 01 जनवरी, 2004 से केंद्र सरकार और उसके बाद अन्य राज्यों (पश्चिम बंगाल को छोड़कर) ने सरकारी कर्मचारियों के लिये पुरानी गारंटीड पेंशन व्यवस्था को खत्म कर शेयर बाजार पर आधारित न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस) की शुरुआत की थी। नई पेंशन व्यवस्था का विरोध करने वाले कर्मचारियों का कहना है कि आज 15 साल बीत जाने के बावजूद एनपीएस कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति होने पर न तो सामाजिक सुरक्षा की गारन्टी तय हो पायी है जबकि प्रत्येक कर्मचारी के वेतन का 24 प्रतिशत (10%कर्मचारी+14%सरकार) हर महीने पेंशन के नाम पर कंपनियों मे निवेशित किया जा रहा है और न ही सेवाकाल के दौरान कर्मचारी की मृत्यु हो जाने पर पारिवारिक पेंशन की उपयुक्त व्यवस्था ही की गयी है।
यह भी अहम..

उक्त पेंशन योजना में सरकार ने कर्मचारियों को धन म्यूचल फंड में लगाया है। जो पूरी तरह से बाजार के अधीन है। इस पर भी उन्हें टैक्स देना पड़ रहा है। इस योजना से कर्मचारी को मिलने वाली पेंशन की रकम बेहद कम होगी। जिससे कई सालों की सेवा के बाद बुढ़ापे में उन्हें गुजर बसर के लिए जूझना पड़ेगा। कर्मचारियों ने कहा नई पेंशन स्कीम के विरोध में वृहद स्तर पर सत्याग्रह के लिए नौ नवंबर को दिल्ली कूच का कार्यक्रम रखा गया है। जिसके लिए पूरे जिले के 2005 से भर्ती कर्मचारियों को एकजुट किया जा रहा है। सभी विभागों के कर्मचारियों से सत्याग्रह में शामिल होने का आह्वान किया जा रहा है। कहा दिल्ली में कर्मचारी नई पेंशन स्कीम को हटाने और पुरानी को लागू करने के लिए व्यापक संघर्ष करेंगे। जब तक सरकार कर्मचारी हित में निर्णय नहीं लेगी तब तक सभी प्रभावित कर्मचारियों द्वारा संघर्ष जारी रहने की बात कही जा रही है।
