
देखना होगा कि आला अधिकारी इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और कानून तोड़ने वाले आरपीएफ के ऐसे जवानों और अधिकारियों पर क्या कार्रवाई करते हैं
बिलासपुर प्रवीर भट्टाचार्य
रेलवे सुरक्षा की जिम्मेदारी आरपीएफ पर है। आरपीएफ यानी कि रेलवे प्रोटक्शन फोर्स। लेकिन यहां के अधिकारी खुद की सुरक्षा करने के भी काबिल नहीं है तो फिर भला वे रेल संपत्ति की क्या सुरक्षा करेंगे । ऐसा हम यूं ही नहीं कह रहे। शनिवार को बिलासपुर रेलवे स्टेशन स्थित आरपीएफ पोस्ट में जो कुछ दिखा, उससे उसे जिसने भी देखा, हैरानी से उसकी आंखें फटी की फटी रह गई। किस तरह कानून के रखवाले स्टेशन जैसे सार्वजनिक जगह पर कानून की धज्जियां उड़ाते हैं, यह सबने अपनी आंखों से देखा। यहां जो कुछ हुआ उसकी तह में जाने के लिए हमें 6 महीने पीछे जाना होगा। नैला निवासी कुमार सिंह लादेड़ आरपीएफ जवान है। जिसकी पोस्टिंग अनूपपुर में थी। करीब 6 महीने पहले उसकी ड्यूटी सारनाथ एक्सप्रेस में थी। लेकिन ड्यूटी के दौरान वह सोता हुआ पाया गया था, जिसकी शिकायत टीटीई ने विभाग से की थी और जांच के बाद इस शिकायत को सही पाया गया। लिहाजा कुमार सिंह लादेड़ को विभाग ने सस्पेंड कर दिया। पिछले 6 महीने से सस्पेंशन झेल रहे कुमार की मानसिक स्थिति शायद बिगड़ती चली गई, तभी तो वह शनिवार को बड़े ही हैरान करने वाले अंदाज में अपना सस्पेंशन समाप्त कर बहाल करने की मांग के लिए पहुंचा। कुमार सिंह ने इस दौरान मिलिट्री वाली ड्रेस पहन रखी थी। पीठ के पीछे उसने राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा बांध रखा था और हाथ में उसके एक तलवार थी। इसी अजीबोगरीब हुलिए के साथ वह आरपीएफ पोस्ट पहुंचा और यहां मौजूद पोस्ट प्रभारी दिलीप बस्तियां के साथ भिड़ गया।
कुमार सिंह लगातार यह तर्क दे रहा था कि उसकी गलती इतनी बड़ी भी नहीं है जिसके लिए उसे 6 महीने से निलंबित कर रखा गया है। इसलिए अगर उसका निलंबन वापस नहीं लिया जाता है तो वह कुछ भी कर सकता है। इसके लिए वह जान देने और लेने की बात करने लगा। रेलवे स्टेशन पर हथियार लेकर आना ही कानूनन जुर्म है। वैसे भी इन दिनों आचार संहिता लागू होने की वजह से सुरक्षा पर अधिक सतर्कता बरती जा रही है ।बावजूद इसके रेलवे आरपीएफ का एक निलंबित जवान तलवार लेकर ट्रेन में सवार होकर बिलासपुर स्टेशन पहुंचा और यहां पोस्ट में आकर अधिकारियों पर ही तलवार तान दी। बार-बार तलवार लहरा रहे कुमार सिंह लादेड से जब अधिकारियों ने तलवार लेना चाहा तो गुस्से में उसने दिलीप बस्तियां पर ही तलवार से हमला करने की कोशिश की, लेकिन वहां मौजूद जवानों के बीच बचाव से वह ऐसा नहीं कर पाया। अपने ऊपर हमला होने से दिलीप बस्तियां के भी तोते उड़ गए और वह दुम दबाकर खिसकते नजर आए। आरपीएफ पोस्ट में कानून की धज्जियां उड़ती रही और किसी ने भी कोई कार्यवाही नहीं की। कुमार सिंह घंटे भर यहां हंगामा करता रहा लेकिन किसी ने भी उसे रोकने की कोशिश तक नहीं की। बाद में उसे करीब घंटे भर बिठाए रखा गया और फिर मामले में लीपापोती करते हुए उसे गुपचुप तरीके से घर वापस भेज दिया गया। अधिकारियों ने यह भी नहीं सोचा कि निलंबित कुमार सिंह ने इस दौरान लगातार कानून का उल्लंघन किया है और इसलिए उस पर कानूनी कार्यवाही होनी चाहिए, लेकिन आरपीएफ के अधिकारी शायद खुद को कानून से भी ऊपर समझते हैं और उन्हें लगता है कि अदालत से भी अधिक अधिकार इनको हासिल है। और वे यह फैसला कर सकते हैं कि ऐसे कानून तोड़ने वालों के साथ क्या किया जाए । अगर यही सब कुछ कोई आम आदमी करता तो अब तक उस पर ना जाने कितनी धाराएं लगा दी जाती, लेकिन अपने ही विभाग के कर्मचारी को यह सब खुलेआम करने दिया गया और हैरानी की बात यह है कि उस पर किसी तरह की कोई कार्यवाही तक नहीं हुई ।कुमार सिंह लादेड़ को उसकी हरकतों की वजह से निलंबित किया गया है लेकिन सवाल यह है कि क्या शनिवार को उसने जो कुछ किया उससे उसकी मुसीबत और नहीं बढ़ जाएगी ? अब तक तो वह निलंबित था, मुमकिन है इस घटना के बाद उसे जेल की हवा खानी पड़े। लेकिन विभाग के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों ने मामले में जिस तरह से लीपा पोती की है उससे उन पर भी गाज गिरना चाहिए, इसलिए देखना होगा कि आला अधिकारी इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और कानून तोड़ने वाले आरपीएफ के ऐसे जवानों और अधिकारियों पर क्या कार्रवाई करते हैं।