
पं गौतम ने सुदामा चरित्र सुनाकर श्रोताओं को किया भाव विभोर गुरु के साथ कपट और मित्र के संग चोरी करने वाला दरिद्र हो जाता है और उसे कुष्ठ रोग हो जाता है

बिलासपुर प्रवीर भट्टाचार्य
जब माता गर्भ धारण करे तब तक प्रसन्नचित रहना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार सुंदर वाक्य और निर्मल कथाओं का श्रवण करें । स्वादिष्ट पदार्थ का सेवन कर दुर्वचन ना कहें। मां द्वारा किया गया चिंतन गर्भ में पल रहे शिशु अवश्य पड़ता है ।
यह बातें पंडित मनोज गौतम ने पारिजात एक्सटेंशन नेहरू नगर में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में छठे दिवस की कथा बताते हुए कहा कि पृथ्वी जब गर्भ में थी सोच कुछ अलग थी जिसके कारण पुत्र भौमासुर असुर पैदा हुआ। श्री गौतम ने बताया कि भगवान कृष्ण ने भौमासुर का वध कर 16101 कन्याओं को कारागार से छुड़ाकर सभी के साथ विवाह किया । आठ पटरानी और 100 श्रुतियां , वेद के मंत्र 16000 हैं वह वही कन्याएं जो भौमासुर के कारागार में कैद थी । पंडित गौतम ने रुक्मणी के अहंकार पर बताया कि हृदय में सात प्रकार की अज्ञानता होती है। लोभ मोह, मद, मयत्सर ये सभी अज्ञान की ग्रंथिं है उसे तोडऩा अनिवार्य है । शरीर का लक्ष्य है जहां से शरीर चले हैं परमात्मा तक पहुंचाएं
पं. गौतम ने सुदामा चरित्र सुनाकर श्रोताओं को किया भाव विभोर
गुरु के साथ कपट और मित्र के संग चोरी करने वाला दरिद्र हो जाता है और उसे कुष्ठ रोग हो जाता है। आश्रम में शिक्षा ग्रहण करने के दौरान सुदामा ने अपने मित्र कृष्ण की नजर बचाकर गुरु के दिए चने अकेले ही खा लिए जिस कारण वह दरिद्रता को प्राप्त हुए। सुदामा ने एक दिन पत्नी को अपनी और भगवान कृष्ण की दोस्ती के बारे में बताया तो सुदामा की पत्नी ने उन्हें कृष्ण जी के पास जाकर जीवन निर्वाह के लिए कुछ धन लाने को कहा। द्वारिकापुरी में भगवान कृष्ण ने बचपन के मित्र सुदामा की खूब खातिरदारी की और सुदामा के प्रेम में मगन होकर आंसुओं से उनके पैर धो डाले। इसके बाद भगवान ने सुदामा को अलौकिक वरदान देकर घर भेजा।