प्रकृति

दो दिन के अभियान में कितनी साफ हुई अरपा, अभियान खत्म ,मगर रखनी होगी कोशिशें जारी

बिलासपुर की धरोहर अरपा नदी को बचाने हजारों लोग छठ घाट पर जुटे तो वही बिलासा कला मंच के सदस्य पूर्व में तय कार्यक्रम के तहत ऐतिहासिक मोहल्ला जूना बिलासपुर स्थित पचरी घाट पहुंचे। यहां बिलासा कला मंच के अलावा एनएसएस के सदस्यों ने श्रमदान कर अरपा को संवारने की कोशिश की।

सत्याग्रह डेस्क

मंगलवार से अरपा उत्थान जन अभियान की शुरुआत हुई। जिला प्रशासन ,नगर निगम बिलासपुर और स्मार्ट सिटी बिलासपुर के इस आयोजन को लेकर पिछले कुछ समय से मंथन किया जा रहा था। पहले अरपा को संवारने के इस अभियान के लिए 3 दिन तय किए गए थे, लेकिन बाद में इसे 2 दिनों में समेट दिया गया। वही बिलासपुर में सरकंडा शिव घाट से देवरीखुर्द चेक डैम तक 9 स्थानों पर अभियान चलाने की बात हुई थी लेकिन फिर इसे केवल छठ घाट तक सीमित कर दिया गया। इसे लेकर भी तरह तरह के बाती हो रही है । बिलासपुर में पिछले 13 सालों से अरपा को लेकर संजीदगी दिखाने वाली संस्था बिलासा कला मंच ने भी इस अभियान को अपना समर्थन दिया। पूर्व में तय कार्यक्रम के अनुसार बिलासा कला मंच के सदस्य मंगलवार सुबह सबसे पुराने पचरी घाट में इकट्ठा हुए, लेकिन वे यह देखकर हैरान रह गए कि वहां उनके अलावा और कोई नहीं पहुंचा था। बिलासा कला मंच के संयोजक डॉ सोमनाथ यादव का मानना है कि अरपा नदी को संवारने के लिए सर्वाधिक आवश्यकता पचरी घाट में ही प्रयास करने की है। लेकिन यहां यह प्रयास ना होने से वे हैरान है।

बिलासपुर में पचरी घाट में अधिकांश आयोजन होते हैं। यही देवी देवताओं की प्रतिमाएं विसर्जित होती है लेकिन वर्तमान में यहां हालात इस तरह बदतर है कि आधी नदी में सड़क बन चुकी है। नदी में रेत का नामोनिशान नहीं है और इसी वजह से यहां की धरती इतनी कठोर हो चुकी है इंसानी कोशिश से यहां की मिट्टी हटनी मुश्किल है। इसके लिए एग्जिवेटर और अन्य मशीनों की आवश्यकता पड़ेगी। लेकिन जिलाधीश ने इस पर असहमति जताई। मंगलवार को बिलासा कला मंच के सदस्यों ने फावड़ा और गैती से मिट्टी निकालने की असफल कोशिश की, लेकिन मिट्टी इस कदर कठोर हो चुकी है कि उनसे बहुत कुछ करते नहीं बना ।

बिलासा कला मंच बरसों से अरपा बचाओ अभियान चला रही है, इसलिए अरपा से संबंधित एक-एक बारीकी का अनुभव इन्हें है। मंच का मानना है कि बिलासपुर के पचरी घाट में रेत पूरी तरह खत्म हो चुकी है ।इसीलिए पानी का ठहराव नहीं हो पा रहा। लिहाजा यहां जन प्रयास से रेत के बोरों से एक अस्थाई चेकडैम बनाना होगा जिससे पानी यहां ठहर पाएगा। इस बरसाती नदी में पानी रोकने के लिए नया पुल और डोंगा घाट जूना बिलासपुर में रेत का बांध बनाने की वकालत करते हुए अरपा और सहायक नदी, नालों के उद्गम स्थल को जीवित करने हेतु बेजा कब्जा हटाने की भी मांग बिलासा कला मंच के संयोजक डॉक्टर सोमनाथ यादव ने की है।

पूर्व में भी बिलासपुर की जीवन रेखा अरपा को बचाने की कई कोशिशें हुई है लेकिन मंगलवार के अभियान में जिस तरह 10,000 से अधिक लोग जुटे, इससे यह ज्ञात हुआ कि यहां के लोगों में जागरूकता तो है। बस उसे एक सही दिशा देने की जरूरत है। बिलासा कला मंच का मानना है कि इस वृहद अभियान को केवल 2 दिनों में नहीं समेटा जा सकता। जिला प्रशासन ने भले ही अभियान के लिए 2 दिन तय किए हो लेकिन बिलासा कला मंच का दावा है कि वे लगातार बिलासपुर की जीवन रेखा को बचाने की कोशिश करते रहेंगे। चाहे लोग उनके साथ आए, या फिर ना आये।

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