मल्हार

छत्तीसगढ़ के कृषक ने पेश की मिसाल…केले की फसल को बनाया वैवाहिक मंडप और उसके नीचे ही दो बेटों की बजी शहनाई….कर्मभूमि बनी साक्षी

हरिशंकर पांडेय

मल्हार – कुछ नया करने की जिद व अपने कर्म स्थल को पवित्र मानकर मांगलिक कार्य सम्पन्न करवाकर नरोत्तम कैवर्त ने आम लोगो को बड़ा संदेश दिया है। नगर के वार्ड नम्बर 2 निवासी 45 वर्षीय नरोत्तम कैवर्त ने अपने घर से लगे बाड़ी में बहुत ही छोटे से मात्र 15 डिसमिल जमीन में 65 नग केला की प्राकृतिक खेती की है। एक वर्ष पूर्व उन्होंने वेद परसदा के अंजली नर्सरी से 26 सौ रुपये में 65 नग केला का पौधा लेकर लगाया था जो अब पूरी तरह से फसल तैयार है जल्द ही बाजार में बेचकर अपनी मेहनत की कमाई से परिवार का खर्च चलाएगा।

इन सबके बीच नरोत्तम को विचार आया कि क्यो न अपने दोनों पुत्रों की शादी इसी फसल के नीचे मंडप बनाकर किया जाए। परिवार के लोगो को भी यह बात अच्छी लगी और इसी महीने के 1 व 2 मई को उन्होंने केला फसल के बीच शानदार प्राकृतिक माहौल में शादी का मंडप बनाकर दोनों पुत्रों का मांगलिक कार्य सम्पन्न कराया और दोनों बहुओं का स्वागत भी इसी जगह उत्साह के साथ किया। नई नवेली बहुओं ने भी अपने ससुराल के नए रिवाज के साथ अपनी शादी को यादगार बताया।

शुद्ध रूप से की प्राकृतिक खेती….

नरोत्तम ने बताया कि इस केले के फसल को पूरी तरह से जैविक तरीके से उत्पादित किया गया है। उन्होंने अब तक सिर्फ एक बार शुरुवात में ही गोबर खाद का प्रयोग किया था जिसके बाद सिर्फ देखभाल और पानी की सिंचाई की है। इन्होंने कहा कि नगर के ही प्रगतिशील किसान जदुनंदन वर्मा के जैविक पद्धति से तैयार केला को देखकर प्रभावित हुए जिसके बाद श्री वर्मा के मार्गदर्शन व सलाह से केला की खेती की। इससे पहले इस जमीन पर पपीता की खेती भी कर चुके है जिससे उनको 40 हजार रुपये की कमाई भी हुई। अब वे इस केला फसल से ढाई लाख रुपये तक की कमाई की उम्मीद कर रहे है। उनका कहना है कि वे परम्परागत रूप से सब्जी की खेती करते आ रहे है इस जगह के अलावा पुस्तैनी 40 डिसमिल जमीन में भी वे सब्जी की खेती करते है जिस पर उनका पूरा परिवार निर्भर है।

नरोत्तम ने बेटी बचाओ बेटी बढ़ाओ अभियान को किया आत्मसात…..

सरकार के बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान को साकार करते हुए नरोत्तम ने बड़ी व एकमात्र बेटी की शादी अभी इसलिए नही किया है क्योकि बेटी अभी पढ़ रही है और बेटी भी कहती है कि वे अभी शादी नही करेगी बल्कि अच्छे से पढ़ाई करेगी। दो पुत्र व एक पुत्री के पिता नरोत्तम का कहना है कि उन्होंने पुत्र व पुत्रियों में कभी भेदभाव नही किया है। बेटी के सबसे बड़ी होने बाद भी उन्होंने दोनों छोटे पुत्रो की शादी कर दी अब वे अपनी पुत्री की शादी पढ़ाई पूरी होने के बाद ही करेंगे। इसके लिए वे अपनी बेटी को मेहनत मजदूरी कर पढ़ाएंगे। पुस्तैनी सब्जी भाजी की खेती भी पूरी लगन के साथ करेंगे।

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