
उदय सिंह
बिलासपुर – जनपद पंचायत मस्तूरी के ग्राम चौहा में जल संकट ने गंभीर रूप ले लिया है। ग्रामीणों ने कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत दर्ज कर गंगा मछवारा समिति पर बांधा तालाब को नुकसान पहुंचाने और पानी की समस्या बढ़ाने का आरोप लगाया है। आवेदन में बताया गया है कि समिति द्वारा बार-बार तालाब को फोड़कर मछली पालन किया जा रहा है, जिससे तालाब में पानी नहीं टिक पा रहा और पूरे गांव के जलस्रोत प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार यह बांधा तालाब वर्ष 2009-10 में शासन से 2 करोड़ 65 लाख रुपये की लागत से स्वीकृत हुआ था।

निर्माण के दौरान ग्राम चौहा और टिकारी के कई किसानों को उनकी जमीन के बदले मुआवजा भी दिया गया था। तालाब बनने के बाद क्षेत्र का जलस्तर संतुलित हो गया था और गांव के कुएं तथा हैंडपंप सालभर पानी से भरे रहते थे। लेकिन वर्तमान में स्थिति इसके उलट हो गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि गंगा मछवारा समिति को पट्टा मिलने के बाद से तालाब का स्वरूप बिगाड़ दिया गया है। मछली पालन के लिए तालाब को बार-बार तोड़ा जाता है, जिससे पानी का भराव नहीं हो पाता और धीरे-धीरे पूरा तालाब सूखने लगता है। इसका सीधा असर गांव के हैंडपंप और कुओं पर पड़ा है, जो अब गर्मी के मौसम में सूखने लगे हैं। इससे ग्राम चौहा के लोगों को पीने के पानी के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने यह भी बताया कि पहले तालाब का रकबा लगभग 100 एकड़ था, जो अब घटकर करीब 51 एकड़ रह गया है। वर्ष 2023-24 में इस संबंध में सीमांकन के लिए एसडीएम मस्तूरी को शिकायत दी गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। वर्तमान में कई जगहों पर मूल जमीन मालिकों का कब्जा बना हुआ है, जिससे तालाब की सीमा और अधिक सिमटती जा रही है।
ग्रामीणों ने कलेक्टर से मांग की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच कराई जाए, तालाब का सीमांकन कर अतिक्रमण हटाया जाए और मछली पालन के नाम पर हो रही छेड़छाड़ पर रोक लगाई जाए। गांव के लोगों का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले समय में पानी का संकट और गहरा जाएगा। ग्रामीणों को अब प्रशासन से त्वरित और ठोस कदम उठाने की उम्मीद है, ताकि बांधा तालाब की मूल स्थिति बहाल हो सके और गांव को पानी की समस्या से राहत मिल सके।