
हरिशंकर पांडेय
मल्हार – 5 मई को जिला पुरातत्त्व संग्रहालय कोरबा के मार्गदर्शक मल्हार निवासी हरि सिंह क्षत्रीय के शोधों पर आधारित “हसदेव घाटी की पुरातात्त्विक संपदा” नामक शोधपुस्तिका का विमोचन कार्यक्रम उज्जैन में सम्पन्न हुआ। जिसमें पश्चिम महाराष्ट्र के सहसंयोजक व संस्कार भारती के विनीता देशपांडे, वाकणकर शोध संस्थान के डॉ दिलीप वाकणकर, निदेशक अश्विनी शोध संस्थान महीदपुर के डॉ रामचन्द्र ठाकुर, संग्रहाध्यक्ष विक्रम विश्वविद्यालय रमण सोलंकी, कुलसचिव विक्रम विश्व विद्यालय के प्रशांत पुराणिक, पूर्व अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ नारायण व्यास,

अंतर्राष्ट्रीय जीवाश्म वैज्ञानिक डॉ विजय साठे, कुलसचिव डेक्कन काॅलेज के डॉ प्रसाद जोशी, डाॅक्टर श्रीनंद बापट रजिस्टार भंडारकर रिसर्च इंस्टीयूट के द्वारा वाकणकर शोध संस्थान उज्जैन में किया गया। जिसमें चौदह गाँव के सोलह से अधिक शैलाश्रयों के खोजों पर आधारित पुस्तक का विमोचन किया गया।

उल्लेखनीय है कि वाकणकर भारतीय संस्कृति अन्वेषण न्यास उज्जैन के तत्वाधान में 4 व 5 मई को विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया था जिसमे दूसरे दिन 5 मई को हरिसिंह की “हसदेव घाटी पुरातात्विक संपदा” के प्रथम सोपान का विमोचन किया गया। हरि सिंह क्षत्रिय द्वारा कोरबा जिला में खोजे गए शैल चित्रों , शैलाश्रयों एवं पुरातात्विक महत्व के स्थलों का निरीक्षण किया था और इन खोजों से प्रभावित होकर उन्होंने इन्हें राष्ट्रीय – अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने एवं संरक्षित करने की दृष्टि से एक पुस्तक प्रकाशित करने की आवश्यकता प्रतिपादित की थी ।

इतना ही नहीं पश्चिम महाराष्ट्र प्रांत की पुरातत्विक पुस्तकों की लेखिका विनीता देशपांडे ने हरि सिंह की खोजों पर आधारित पुस्तक लेखन का दायित्व भी स्वीकार किया था। इसके अलावा हरिसिंह मल्हार व आसपास पुरातात्विक स्थलों की जानकारी भी रखते है साथ ही वे सुपकला, काष्ठ कला में महारत हासिल कर चुके है।