छत्तीसगढ़रतनपुर

नौकरी के नाम पर महिला से ऐठे 40000 रुपए, खेत बेचकर विधवा ने दी थी रकम

न्याय की उम्मीद लिए उसने मामला दर्ज कराया है उसे लगता है अब तो कानून का रखवाला ही उसे न्याय दिला सकता है

बिलासपुर प्रवीर भट्टाचार्य

पंचायती राज व्यवस्था की शुरुआत इसी मकसद से की गई थी ताकि भोले भाले ग्रामीणों की आवश्यकताएं गांव में ही पूरी हो। अपने बीच के लोग होंगे तो काम सहज ,सरल होगा, लेकिन यही पंचायती व्यवस्था ग्रामीण क्षेत्रों में नासूर बन चुकी है। जिस सरपंच का काम परेशान हाल लोगों की मदद करना है, वे हीं मजलूमो को लूट रहे हैं। ऐसा ही एक मामला रतनपुर क्षेत्र के ग्राम कड़री का आया है। कुछ साल पहले शीला मानिकपुरी का पति पीलिया की बीमारी से ग्रस्त हो गया। गरीबी की वजह से सही इलाज नहीं हो पाया और असमय ही शीला मानिकपुरी के पति की मौत हो गई। अकेली महिला, ऊपर से 2 बच्चों की जिम्मेदारी। कमाई का कोई खास जरिया पास ना होने पर शीला ने सोचा कि अगर उसे कोई नौकरी मिल जाए तो फिर बच्चों का पाला पालन पोषण आसानी से हो पाएगा। इसी दौरान उसे गांव के ही सरपंच संतोष साहू ने नौकरी लगा देने का झांसा दिया और इसके लिए 40,000 रुपए की मांग कर डाली। उज्जवल भविष्य की कामना के साथ शीला मानिकपुरी ने फसल लगे खेत को 35,000 रुपये में गिरवी रखकर, अपनी सारी जमा पूंजी लुटाते हुए ,करीब 3 साल पहले गांव के सरपंच संतोष साहू को 40,000 रुपये दिए थे ।उस वक्त शीला मानिकपुरी के पिता भी मौजूद थे। उसके बाद से ही सरपंच विधवा महिला को नौकरी दिलाने के नाम पर सिर्फ आश्वासन देता रहा। इधर पिछले कुछ समय से उसका व्यवहार भी बदल चुका था और जब भी शिला मानिकपुरी नौकरी दिलाने या फिर रकम वापस देने की बात कहती तो सरपंच संतोष साहू गाली गलौज पर उतर आता। पिछले दिनों तो उसने साफ कह दिया की जाओ पुलिस में रिपोर्ट लिखा दो, मैं पुलिस से सेटिंग कर लूंगा। इससे विधवा महिला की हिम्मत पस्त हो गयी, फिर भी उसने न्याय की उम्मीद में थाने की चौखट लांघी और बड़ी हिम्मत कर सरपंच संतोष साहू के खिलाफ मामला दर्ज कराया।
एक तरफ सरकार महिलाओं को मजबूत करने और उनके साथ खड़े होने का दावा करती है लेकिन बिल्हा विकासखंड के ग्राम पंचायत कडरी के सरपंच संतोष साहू की पहुंच और रसूख की वजह से पुलिस भी मामले को लटकाती नजर आ रही है। पुलिस फिलहाल जांच के बाद ही किसी कार्यवाही की बात कह रही है , लेकिन पुलिस निष्पक्ष जांच करेगी इस पर भी विधवा महिला को संदेह है ।क्योंकि उसे पता है सरपंच रिश्वत देकर या फिर अपनी पहुंच से खुद को बचा लेगा। वहीं एक साधारण महिला के लिए पुलिस कुछ करेगी इसकी उम्मीद उसे भी नहीं है। फिर भी न्याय की उम्मीद लिए उसने मामला दर्ज कराया है उसे लगता है अब तो कानून का रखवाला ही उसे न्याय दिला सकता है।

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