मल्हार

मल्हार में सहस्त्रचंडी महायज्ञ की तैयारियां जोरों पर…आयोजन समिति जुटी व्यवस्थाओं में…एसडीएम, तहसीलदार ने किया निरीक्षण

हरिशंकर पांडेय

मल्हार – धर्मनगरी मल्हार में पहली बार गुप्त नवरात्र पर्व के पावन अवसर पर आयोजित सहस्त्रचंडी महायज्ञ व पाठ को लेकर क्षेत्रवासियों में उत्साह देखा जा रहा है। 19 से 27 जून तक चलने वाले इस भव्य अनुष्ठान को लेकर आयोजक व मंदिर ट्रस्ट भी भव्य तैयारी में लगे हुए है यज्ञ के लिए आवश्यक पूजा पाठ के सामग्रियों के अलावा सभी जरूरी समान एकत्रित की जा रही है वही यज्ञ मंडप पूरी तरह से तैयार है।

मंदिर परिसर स्थित भोगशाला को पाठ स्थल बनाया गया जहां 71 पण्डित आचार्य के साथ 71 शक्तिपीठो के देवियों के नाम से पाठ व अनुष्ठान संपन्न कराएंगे। आयोजक व यजमान मनीष सुल्तानिया व रविन्द्र वैष्णव ने जानकारी में बताया कि बड़े स्तर पर हो रहे धार्मिक अनुष्ठान में प्रतिदिन हजारो लोगो के आने की उम्मीद है इसलिए तैयारियां भी की जा रही। शासन प्रशासन से सहयोग के लिए सभी संबंधित विभाग को पत्र व्यवहार भी किया जा रहा है जिससे यह अनुष्ठान शान्तिपूर्व व उत्साह के साथ संपन्न हो सके।

यज्ञ के आचार्य पण्डित किशोरशरण पाठक ने बताया कि महायज्ञ के दौरान वेदी की स्थापना माँ डिडनेश्वरी देवी के ठीक सामने बनाई जाएगी जहां प्रतिदिन वेदी की पूजा होगी। इसके अलावा सभी अनुष्ठान संपन्न होंगे, उन्होंने बताया कि सनातन वैदिक परम्परानुसार मन्त्रो के साथ आहुतियां दी जाएगी जिससे यज्ञ के साथ ही पूरा यज्ञ क्षेत्र के वातावरण शुद्ध होंगे व माता की कृपा दृष्टि बनी रहेगी। पौराणिक मान्यता के श्रीकृष्ण वट के नीचे हो रहे सहस्त्रचंडी महायज्ञ सभी के लिए फलदायी होगा।

एसडीएम ने किया दौरा.…..

रविवार को उच्चाधिकारियों के निर्देश पर मस्तूरी एसडीएम महेश शर्मा एवं नायब तहसीलदार अप्रतिम पांडेय ने यज्ञ की तैयारी व व्यवस्था को लेकर मल्हार का दौरा कर आवश्यक जानकारी ली। उन्होंने मंदिर परिसर के यज्ञ स्थल, मंगल भवन, विश्राम गृह सहित पार्किंग की व्यवस्था को लेकर आयोजको से जानकारी लेने के बाद सम्बंधित विभागों को जल्द ही निर्देश देकर सभी व्यवस्थाए दुरुस्त कराने की बात कही। और जल्द ही सभी विभागों की बैठक लेकर जिम्मेदारियां सुनिश्चित करेंगे।

तपोस्थली रहा है मल्हार…..

आदि काल से यह धर्मनगरी साधु संतों व ऋषि मुनियों की तपोस्थली रही है। मान्यता है कि स्वयं माता डिडनेश्वरी भगवान शंकर को पाने तप की ही मुद्रा में बैठी है और भगवान प्रसन्न होकर माता को पातालेश्वर के रूप में मिली है। माना जाता है कि मल्हार शैव व शाक्त परम्परा के अनुयायी भी साधना करते थे इसके अलावा अघोर विद्या साधको का साधना करने के प्रमाण मिले है। इसलिए इस भूमि को तपस्थल कहा जाता है। मल्हार से मिले विभिन्न देवी देवताओं के प्राचीन मूर्ति इस बात के प्रमाण है कि यह पूरा क्षेत्र देवस्थल अनंतकाल से रहा है

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